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Today's Paper

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नाइट कर्फ्यू में पब्लिक ट्रांसपोर्ट कैसे चलेगा, कोई तो बताये!
 

-रात नौ के बाद व सुबह छह बजे से पहले कोई कैसे पहुंचे रेलवे, बस स्टेशन व एयरपोर्ट
-निजी वाहन वालों को राहत मगर ऑटो, टैम्पो, टैक्सी आदि पर निर्भर लोगों की आफत
-आवश्यक सेवाओं से जुडे लोगों को प्रतिबंध से छूट, पर आना-जाना कैसे संभव

रवि गुप्ता
लखनऊ।
बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए लखनऊ नगर निगम सीमा के अन्तर्गत रात्रि नौ बजे से लेकर सुबह छह बजे तक नाइट कर्फ्यू लगा दिया है। इस बाबत बकायदा डीएम स्तर से नाइट कर्फ्यू के मददनेजर दिशानिर्देश भी जारी कर दिया गया है। लेकिन कई राजधानी वासियों का यह कहना रहा कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर प्रशासन के इस गाइडलाइन में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं है। इसमें संबंधित यात्री के लिये तो यह बताया गया है कि उसका टिकट ही उसका मान्य पास होगा, मगर उक्त गंतव्य तक जाने के लिये जिस पब्लिक ट्रांसपोर्ट (आॅटो, टैम्पो, ओला-ऊबर, सिटी बस आदि) पर वो निर्भर है...नाइट कर्फ्यू के दौरान इसको लेकर कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं है।

नतीजतन, राजधानी में लगे नाइट कर्फ्यू में प्रशासन व परिवहन के बीच एक तरह से आम व मध्यम वर्गीय यात्री, मुसाफिर व शहरी फंसा हुआ है। यही नहीं गाइडलाइन में इससे संबंधित कोई स्थिति साफ नहीं होने से आॅटो, टैम्पो, ओला-ऊबर और सार्वजनिक वाहन संचालनकर्ता भी पशोपेस में है कि आखिर वो किस आधार पर नाइट कर्फ्यू के दौरान अपनी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवायें यात्री सुविधा के मद्देनजर चालू रखें। सवाल यह भी उठता है कि प्रशासन के उपर्युक्त गाइडलाइन के अनुसार कोई भी यात्री नाइट कर्फ्यू के दौरान अगर अपना टिकट मांगे जाने पर दिखा देता है तो उसे आगे जाने दिया जायेगा। लेकिन पेंच यहां फंसता है कि रेलवे व हवाई सेवाओं का तो टिकट आॅनलाइन एडवांस में बुक हो जाता है, एसी बसों का भी हो जाता है...लेकिन देर रात साधारण रोडवेज बसों में यात्रा करने वाला आम मुसाफिर बीच रास्ते किसी प्रवर्तन दस्ते या स्थानी पुलिस टीम को कैसे एडवांस टिकट शो कर पायेगा जबकि उसे टिकट बस में बैठने के बाद ही मिलेगा।

वहीं जब इस मुद्दे पर परिवहन विभाग के कुछ स्थानीय जिम्मेदारों से बात की गई तो उनका यही कहना रहा कि नाइट कर्फ्यू को लेकर जो डीएम की गाइडलाइंस जारी की गई है, उसके तहत ही ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी संचालित होगा, उससे इतर कोई व्यवस्था नहीं होगी। दूसरी तरफ शहर के प्रमुख आॅटो व टैम्पो यूनियन के पदाधिकारी भी संशय की स्थिति में है कि आखिर नाइट कर्फ्यू के दौरान पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर क्या निर्देश है। उनका कहना है कि ऐसे में यदि डीएम की गाइडलाइंस से इतर वो लोग अपने वाहन सड़कों पर निकालते हैं तो एक तो नियम का उल्लंघन होगा और दूसरे फिर वो भारी जुर्माने का भी शिकार हो सकते हैं। वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि नाइट कर्फ्यू में जिन आवश्यक सेवाओं से जुडेÞ लोगों को उनके संस्थान के परिचय पत्र के आधार पर आवागमन को प्रतिबंधित नहीं किया जायेगा, उनमें से कितनों के पास अपने निजी वाहन हैं और जिनके पास नहीं है उन्हें फिर कैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा मिल सकेगी।
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देर रात आने-जाने वाले यात्रियों को हो सकती है दिक्कत!
नाइट कर्फ्यू रात नौ बजे से शुरू है, ऐसे में यदि कोई यात्री देर रात चारबाग व लखनऊ जंक्शन स्टेशन, या फिर आलमबाग टर्मिनल, कैसरबाग व अवध बस स्टेशन पर उतरता है और उसे अपने गंतव्य तक जाना होगा तो वो किससे जायेगा। यही हाल उन लोगों का भी होगा जिनके पास अपना निजी वाहन नहीं है। चंूकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालन के मद्देनजर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है ऐसे में यदि कोई आॅटो, टैम्पो या प्राइवेट वाहन नाइट कर्फ्यू में चलता भी है तो दो स्थितियां बनेंगी...एक तो वो अपने रिस्क पर वाहन सड़क पर निकाले या फिर कुछ सेटिंग वाले सिस्टम का किसी न किसी रूप में हिस्सा बनकर बिना किसी रोकटोक के नाइट कर्फ्यू में अपना वाहन सन्नाटे सड़क पर दौड़ाये। 

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