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शक्ति भवन पर बिजली कर्मियों-इंजीनियरों का शक्ति प्रदर्शन

शक्ति भवन पर बिजली कर्मियों-इंजीनियरों का शक्ति प्रदर्शन
शक्ति भवन पर बिजली कर्मियों-इंजीनियरों का शक्ति प्रदर्शन
-इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट 2021 बिल वापस लेने की मांग
-कहा कि नयी बिजली व्यवस्था किसानों व घरेलू उपभोक्ताओं पर होगी भारी
लखनऊ। राजधानी के अशोक मार्ग स्थित शक्ति भवन पर सोमवार को बड़ी संख्या में बिजली कर्मी व इंजीनियरों का हुजूम एकत्र हुआ। इनकी यही प्रमुख मांग रही कि हर हाल में सरकार 2021 का इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल वापस ले। ऐसा नहीं करने पर आगामी 10 अगस्त को सभी 15 लाख कर्मी व अभियंता एक दिन का कार्य बहिष्कार करेंगे। यह विरोध प्रदर्शन कर्मचारियों व अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी आॅफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉईज एन्ड इंजीनियर्स (एनसीसीओईई) के आह्वान पर बिजली कर्मियों व अभियंताओं ने किया। यही नहीं राजधानी के शक्तिभवन समेत अनपरा ओबरा परीछा ,हरदुआगंज, पनकी, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, बस्ती, अयोध्या, बरेली, कानपुर, आगरा, झांसी, अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बुलंदशहर, सहारनपुर समेत प्रदेश के समस्त परियोजनाओं व जनपद मुख्यालयों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किये। आॅल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने जारी बयान में कहा कि केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 संसद में रखने और पारित करने का एलान किया है, इसलिये सत्र के पहले दिन आज देशव्यापी प्रदर्शन आयोजित किये गए हैं।  
संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों प्रभात सिंह, जीवी पटेल, जयप्रकाश, गिरीश पांडे, सदरूद्दीन राना, राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल, सुहेल आबिद, विनय शुक्ला, बृजेश त्रिपाठी, महेंद्र राय, डीके मिश्रा, शशिकांत श्रीवास्तव, प्रेम नाथ राय, पूसे लाल, एके श्रीवास्तव, वीके सिंह कलहंस, उत्पल शंकर, आरके सिंह, सुनील प्रकाश पाल आदि ने लखनऊ की सभा को संबोधित करते हुए मांग रखी कि बिजली कानून में व्यापक बदलाव वाले इस बिल को जल्दबाजी में पारित न कराया जाये। आगे कहा कि इसे संसद की बिजली मामलों की स्टैंडिंग कमेटी को भेजा जाना चाहिए और कमेटी के सामने बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को अपने विचार रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। कहा कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में उत्पादन का लाइसेन्स समाप्त कर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का निजीकरण किया गया जिसके परिणाम स्वरुप देश की जनता को निजी घरानों से बहुत महंगी बिजली की मार झेलनी पड़ रही है। अब इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 के जरिये बिजली वितरण का लाइसेंस लेने की शर्त समाप्त की जा रही है जिससे बिजली वितरण के सम्पूर्ण निजीकरण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। बताया कि निजी कम्पनियां केवल मुनाफे वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को ही बिजली देंगी जिससे सरकारी बिजली कंपनी की वित्तीय हालत और खराब हो जाएगी। इस प्रकार नए बिल के जरिये सरकार बिजली वितरण का सम्पूर्ण निजीकरण करने जा रही है जो किसानों और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं के हित में नहीं है।        

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