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सामुदायिक शौचालय के साफ सफाई के लिए तय नौ हजार रु  दिए गए ₹27हजार 

सामुदायिक शौचालय के साथ सफाई में क्या 9000 के बेवफाई गाना
सन्त कबीर नगर – स्वच्छ भारत ( ग्रामीण ) मिशन के तहत घर – घर शौचालय के बाद ग्राम पंचायत स्तर पर सामुदायिक शौचालय नीति एक बार फिर भ्रष्टाचार की भेट चढ़ी हुई दिखायी दे रही है । पूर्ण – अपूर्ण सामुदायिक शौचालयो के तीन जुलाई से छै जुलाई के मध्य हेतु अभियान चलाकर सामुदायिक शौचालय हैंडओवर एवं स्वयं सहायता समूह को साफ – सफाई देखभाल मेन्टेनेन्स खर्च संचालन के नाम पर सीधे सत्ताइस हजार रूपये भुगतान का मामला सामने आ रहा है प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह राशि समूहो के खाते मे सीधे प्रोत्साहन के नाम पर दिया गया है ताकि समूह सरकार पर भरोसा कर उसके योजनाओ पर विश्वास करे और स्वच्छता अभियान खुले मे शौच मुक्त अभियान का हिस्सा बन ग्रामीण स्तर रोजगार प्राप्त करे । भुगतान नीति को इतने वेग से लागू किया गया है कि जनपद के समस्त ग्राम पंचायतो मे बने पूर्ण – अपूर्ण शौचालयो को पूर्ण दिखा कर भुगतान कर दिया गया । यही नही कदाचित सामुदायिक शौचालयो को छोड़ दिया जाय तो बाकी पूर्ण – अपूर्ण शौचालयो के साफ – सफाई देखभाल के लिए किसी सफाईकर्मी / केयर टेकर की नियुक्ति नही हुई है ।
ऐसे मे यह सवाल उठना लाजिमी है कि जिन सामुदायिक शौचालयो का निर्माण कार्य ही पूरा नही हुआ है उस सम्बन्धित ग्राम पंचायत के स्वयं सहायता समूहो को सीधे सत्ताइस हजार रूपये किस उत्साहवर्धन के लिए दिया गया है ? क्यो सहायक विकास अधिकारी ( पंचायत ) और ब्लाक मिशन प्रबन्धक सत्ताइस हजार का लाभ पाये ग्राम पंचायत समूहो की जानकारी देने मे आनाकानी कर रहे है ?
बतौर उदाहरण विकास खण्ड बेलहर कला के ग्राम पंचायतो के स्वयं सहायता समूहो को सामुदायिक शौचालयो के साफ – सफाई देखभाल व मेन्टेनेन्स खर्च के लिए एडवांस के रूप मे दे दिया गया है । जबकि सत्ताइस हजार के प्रोत्साहन राशि के लाभ मे ग्राम पंचायत कुसहरा , कोलकी चमरसन जैसे अनेको ग्राम पंचायतो का सामुदायिक शौचालय अर्ध निर्मित है साफ – सफाई देखभाल कर्ता की नियुक्ति की बात तो कोसो दूर की बात है । जनपद के पूरे नौ विकास खण्डो के उक्त हालो के होते हुए किस आधार पर तीन महीने का खर्च सत्ताइस हजार रुपया दिया गया ? अगर इस भुगतान मे ईमानदारी है तो इसकी जानकारी सहायक विकास अधिकारी ( पंचायत ) सभाजीत यादव एवं ब्लाक मिशन प्रबन्धक रामेन्द्र आदि जैसे जिम्मेदार लोग देने से साफ इनकार क्यो हो रहे है ?
बताते चले कि ग्राम पंचायत स्तर पर बने स्वच्छता की प्राथमिकता मे बहुउद्देशीय सामुदायिक शौचालयो का जहां अधिकतम निर्माण कार्य अधूरा है वही सम्बन्धित ग्राम पंचायत किसी एक स्वयं सहायता समूह को सामुदायिक शौचालयो के साफ सफाई देखभाल व मेन्टेनेन्स खर्च के नाम पर एडवांस मे सत्ताइस हजार रुपया दिया जा रहा है । जबकि जारी शासनादेश के मुताबिक देखा जाय तो सामुदायिक शौचालय के साफ सफाई व देखभाल के तौर सफाईकर्मी / केयर टेकर नियुक्त किये जायेगे और उनके मेहनताना के छै हजार रूपये सहित मरम्मत जैसे बिजली प्लंबिंग , नल टोटी मरम्मत पर पांच सौ रूपये । साफ सफाई सामग्री जैसे – झाड़ू , ब्रश , वाइपर , स्पंज , कपड़े पोछा , बाल्टी मग आदि पर बारह सौ रुपया । निः संक्रामक सामग्री जैसे – साबुन , वाशिंग पाउडर , एयर फ्रेशनर , ग्लवस , हारपिक , मास्क व एप्रेन । युटिलिटी चार्जेज जैसे पानी , बिजली , सालिड वेस्ट मैनेजमेंट एक हजार रूपये व अन्य मे तीन सौ रुपया कुल प्रतिमाह तीन हजार मिला कर प्रत्येक माह नौ हजार रूपये के हिसाब से पूरे वर्ष का व्यय अधिकतम दो किश्तो मे पहला प्रारम्भिक माह एवं दूसरा किश्त छै माह बाद बराबर किश्तो मे ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध कराये जाने का है । शासनादेश पत्रांक संख्या 1758/33-3-2020-31/2019 के मुताबिक स्वच्छ भारत ( ग्रामीण ) के अन्तर्गत बड़ी संख्या मे तैयार सामुदायिक शौचालयो के निर्माण लागत अनुमन्य तीन लाख के नियमित साफ – सफाई और रखरखाव मे ऐसी कोई व्यवस्था नही दी गयी है कि बिना संचालन के भुगतान किया जाय ।

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