Saturday, January 22, 2022 at 1:46 AM

संस्थानों की उम्मीदों पर फिर रहा पानी

सुपौल:   खासकर लगातार संक्रमण की बढ़ी रफ्तार से उनके होश उड़ने लगे हैं। गत दो वर्षों से कोरोना की मार झेल रहे ऐसे संचालकों को मार्च में नए सत्र से व्यवस्था पटरी पर लौटने की उम्मीद थी । ऐसे में जनवरी में एक बार फिर कोरोना की तेज रफ्तार से उनकी बेचैनी बढ़ने लगी है। खासकर छोटे निजी स्कूल के संचालकों को इसकी ज्यादा फिक्र सताने लगी है । जिले में किराए के मकानों में स्कूल चला रहे कई संचालकों ने बताया कि दो वर्षों से इस

स्कूल के प्रभावित रहने के कारण किराया का बडा बोझ पूर्व से ही है। इधर जब कोरोना संक्रमण कम हुआ तो विद्यालय पटरी पर लौट रहा था। हालांकि इसके बाद भी 75 फीसद बच्चे वापस नहीं आ पाए थे। ऐसे में नए सत्र से सब कुछ ठीक-ठाक हो जाने की उम्मीद थी। मकान मालिक सहित अन्य को भी इसी बात का भरोसा दिलाकर स्थिति सामान्य करने के प्रयास में जुटे हुए थे । इसी बीच जनवरी माह में कोरोना के प्रकोप ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है । अब तो मकान मालिक के सब्र का बांध भी टूटने लगा है और वह बकाया भुगतान के लिए दबाव बनाने लगे हैं । खासकर जिनके पास अपना संसाधन नहीं है उनकी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई है। कोरोना के कारण एक तो पहले ही कई कोचिग, स्कूलों में ताले लग चुके थे जो बचे भी हैं उस पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मोहम्मद एम वली ने सरकार से आर्थिक मदद देने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि कोरोना की पहली और दूसरी लहर के कारण लगभग 2 वर्षों से स्कूलों को बंद रखा गया। जिससे उन स्कूलों में कार्यरत हजारों शिक्षक,कर्मचारी ,चालक, आदेशपाल एवं सफाई कर्मियों के सामने भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई थी। स्कूल बंद रहने के कारण अभिभावक फीस भी नहीं दिए। जिससे इन कर्मियों को मिलने वाले वेतन से वंचित रहना पड़ा। इधर पिछले अगस्त से जब स्कूल खुले तो कुछ आस जगी।