Saturday, November 27, 2021 at 1:42 AM

घर में कौन है बॉस?…महिला या पुरुष

लखनऊ: ये आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-5) के हैं। 2015-16 के सर्वे के मुताबिक, 81.7 फीसदी महिलाएं घरों के फैसले लेती थीं लेकिन अब यह आंकड़ा बढ़कर 87.6 फीसदी पहुंच गया है। यानि सिर्फ 12.4 फीसदी पुरुष ही घरों के मुख्तार हैं।

2015-16 में प्रदेश में 34.2 फीसदी महिलाओं के नाम अथवा संयुक्त मकान-जमीन थी जो 20-21 में बढ़कर 51.9 फीसदी हो गई। अब शहर में 46.8 और गांव में 53.9 फीसदी महिलाओं के नाम पर जमीन और घर है।

शादी के बाद पत्नी से घरेलू हिंसा में कमी

18-49 आयु वर्ग में पत्नी के साथ हिंसा में कमी आई है। 2015-16 में 36.7 महिलाओं ने सर्वे में हिंसा को रिपोर्ट किया 20-21 में 34.8 फीसदी दर्ज हुई। 2015-16 में गर्भावस्था में शारीरिक हिंसा का 4.3 महिलाओं ने सामना किया था।

परिवार नियोजन का महिलाओं पर ही भार

परिवार नियोजन में बदलाव नहीं हुआ है। 2015-16 में 0.1 फीसदी पुरुषों ने नसबंदी का तरीका अपनाया। 20-21 में भी यह 0.1 फीसदी रिपोर्ट हुआ है।

शहरों में हर सौ में से 13 पुरुष शुगर के मरीज

बिगड़ती लाइफ स्टाइल और खानपान का सीधा असर यूपी वालों की सेहत पर पड़ रहा है। 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोग तेजी से डायबिटीज के रोगी हो रहे हैं। इनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं की अपेक्षा अधिक है। प्रदेश की बात करें तो सौ में से 13 से ज्यादा पुरुष इस बीमारी की गिरफ्त में हैं और ब्लड शुगर लेवल ठीक रखने के लिए दवाओं का सेवन कर रहे हैं।