Wednesday, December 8, 2021 at 3:28 PM

फरवरी 2025 तक साफ होगी यमुना, सीएम अरविंद केजरीवाल ने किया यमुना क्लीनिंग सेल का गठन

नई दिल्लीl मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने युद्ध स्तर पर यमुना नदी की सफाई में तेजी लाने के उद्देश्य से आज यमुना क्लीनिंग सेल का गठन किया। यह सेल सबंधित विभागों की ओर से किए जा रहे कार्यों पर नजर रखेगा। दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को सेल का अध्यक्ष बनाया गया है और सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधि सदस्य होंगे। फरवरी 2025 तक यमुना को साफ कराने की जिम्मेदारी सेल के पास होगी। यमुना सफाई के संबंध में दिल्ली सचिवालय में आज संपन्न समीक्षा बैठक की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अंतर-विभागीय निर्णय लेने और कार्य निष्पादन में तेजी लाने के लिए हमने यमुना क्लीनिंग सेल का गठन किया है, इससे यमुना की सफाई में तेजी आएगी। एक जिम्मेदार सरकार होने के नाते यमुना की सफाई हमारी पहली प्राथमिकता है। हम यमुना की खोई सुंदरता को वापस लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। यमुना क्लीनिंग सेल के गठन से सभी कार्यों की जिम्मेदारी अब एक ही जगह तय होगी और परियोजनाओं में तेजी आएगी। साथ ही, यह सभी प्रशासनिक बांधाओं को भी दूर करेगा। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि पिछले कार्यकाल में जैसे हमने स्कूलों और अस्पतालों का कायाकल्प किया, वैसे ही इस बार हमें यमुना को भी प्राथमिकता के आधार पर साफ करना है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज यमुना सफाई के संबंध में औद्योगिक क्षेत्रों और जेजे क्लस्टरों से अपशिष्ट जल के प्रबंधन पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में उद्योग मंत्री और दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन, मुख्य सचिव विजय कुमार देव और दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ उदित प्रकाश राय के साथ-साथ संबंधित विभागों के कई उच्च पदस्थ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में यमुना नदी की सफाई को लेकर आने वाली विभिन्न चुनौतियों और उससे निपटने के समाधानों पर गंभीरता से चर्चा हुई।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों को कार्य योजना में खामियों की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ने के निर्देश देते हुए कहा कि एक जिम्मेदार सरकार होने के नाते यमुना की सफाई, हमारी सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। हमें इस मुद्दे पर उसी मानसिकता और गंभीरता के साथ काम करना होगा, जो हमने पिछले कार्यकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में किया था। इस कार्यकाल में यमुना की सफाई और जलापूर्ति हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लक्ष्य को हासिल करने में किसी भी तरह से कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि यमुना नदी को साफ करने में हम जिस बड़ी बांधा का सामना कर रहे थे, वह यह थी कि यह कई निकायों द्वारा शासित होने की वजह से एक जटिल प्रणाली से त्रस्त थी। इस समस्या को दूर करने के लिए हम यमुना क्लीनिंग सेल बना रहे हैं, जो सभी निकायों के कामकाज की निगरानी करेगा। इस सेल के गठित होने के बाद एक ही जगह जिम्मेदारी तय हो जाएगी और परियोजनाओं में तेजी आएगी। उदाहरण के तौर पर यदि इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योगों या कुछ अन्य प्रदूषणकारी कार्यों के कारण कोई समस्या आ रही है, तो यमुना क्लीनिंग सेल को इसका ध्यान रखना होगा।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केजरीवाल ने ट्विट कर कहा, ‘‘अंतर-विभागीय निर्णय लेने और निष्पादन में तेजी लाने के लिए हमने आज यमुना क्लीनिंग सेल (वाईसीसी) का गठन किया है, जिसके अध्यक्ष दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होंगे और सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधि सदस्य होंगे। इससे यमुना की सफाई प्रक्रिया में तेजी आएगी।’’

डीजेबी, डीयूएसआईबी, डीएसआईआईडीसी, डीपीसीसी और आई एंड एफसी विभाग के प्रयासों को मजबूती देगा यमुना क्लीनिंग सेल

यमुना क्लीनिंग सेल का गठन यमुना की सफाई में तेजी लाने के उद्देश्य से किया गया है। इस सेल में जेजे क्लस्टर और औद्योगिक क्लस्टर, सीईटीपी, प्रदूषण मानदंडों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों, यमुना सफाई परियोजनाओं और इन-सीटू ट्रीटमेंट के सीवरेज की देखभाल करने वाले डीजेबी, डीयूएसआईबी, डीएसआईआईडीसी, डीपीसीसी और आई एंड एफसी विभाग के 6 वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह अधिकारी दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ को रिपोर्ट करेंगे। साथ ही यह अधिकारी यमुना क्लीनिंग सेल की ओर से लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए भी जिम्मेदार होंगे और इससे इनके प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

यमुना क्लीनिंग सेल जेजे क्लस्टर, औद्योगिक क्लस्टर और सीईटीपी के सीवरेज सिस्टम की जिम्मेदारी संभालेगा। यह यमुना सफाई के सभी कार्य बिंदुओं के लिए भी संयुक्त रूप से जिम्मेदार होगा, जिसमें नए एसटीपी, डीएसटीपी का निर्माण, मौजूदा एसटीपी का 10/10 तक उन्नयन और क्षमता वृद्धि, 1799 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवरेज नेटवर्क बिछाना; सेप्टेज प्रबंधन; ट्रंक/परिधीय सीवर लाइनों की गाद निकालना; पहले से अधिसूचित क्षेत्रों में सीवर कनेक्शन उपलब्ध कराना; आईएसपी के तहत 108 नालों की ट्रैपिंग, नालियों का इन-सीटू ट्रीटमेंट शामिल हैं।

यमुना के प्रदूषण को रोकने के लिए जेजे क्लस्टरों से ड्रेनेज को ट्रैप कर एसटीपी में भेजा जाएगा

मौजदा समय में दिल्ली के अंदर करीब 675 जेजे क्लस्टर हैं, जो बिना सीवर के हैं। इन जेजे क्लस्टर्स का अनुपचारित गंदा पानी यमुना नदी में गिरता है। डूसिब ने इन-सीटू जेजे क्लस्टर में सार्वजनिक सामुदायिक शौचालयों को बनाकर सुविधाएं दी हैं। इनमें से कुछ सामुदायिक शौचालय अपने गंदे पानी को करीब के बरसाती नाले में बहा देते हैं, जो यमुना नदी के पानी को प्रदूषित करता है। जेजे क्लस्टर्स से बरसाती पानी के नाले में आने वाले इस गंदे पानी की समस्या से निपटने के लिए ऐसे सभी जेजे क्लस्टर्स को बरसाती पानी के ड्रेनेज सिस्टम से अलग किया जाएगा और वहां से निकलने वाले गंदे पानी को आसपास के एसटीपी में ट्रीट करने के लिए भेजा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि जेजे क्लस्टर्स से बिना ट्रीट हुआ पानी यमुना नदी में नहीं गिरेगा। दिल्ली जल बोर्ड की देखरेख में डूसिब द्वारा ट्रैपिंग व्यवस्था की कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली के सभी औद्योगिक क्लस्टर को सीईटीपी से जोड़ा जाएगा

दिल्ली में 13 सीईटीपी हैं, जो वर्तमान में 17 औद्योगिक क्लस्टर्स की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। डीएसआईआईडीसी दिल्ली में यमुना को प्रदूषित करने वाले औद्योगिक कचरे की संभावना को खत्म करने के लिए दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां भी आवश्यक है, वहां पर सीईटीपी स्थापित करने पर काम कर रहा है