किन-किन नौकरियों पर AI का असर नहीं पड़ेगा? बिल गेट्स ने दिया जवाब

किन-किन नौकरियों पर AI का असर नहीं पड़ेगा? बिल गेट्स ने दिया जवाब

नई दिल्ली। अमेरिका की एआई कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने चैटजीपीटी को 2022 में (ChatGPT) लॉन्च किया था. उसके बाद से एआई ने इंसानों के काम करने और सोचने का तौर-तरीका ही बदल दिया है. अब लोगों के पास चैटजीपीटी के अलावा भी Gemini, Copilot, DeepSeek जैसे दुनियाभर के कई एआई चैटबॉट्स के विकल्प हैं, जिनका इस्तेमाव वो काम करने के लिए करते हैं. हालांकि, एआई की वजह से इंसानों की नौकरियों खतरे में आ गई है, क्योंकि ऐसे बहुत सारे काम है, जो पहले इंसान किया करते थे, लेकिन अब वो एआई की मदद से किए जाते हैं.
 
पिछले महीने, माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने एक भविष्यवाणी की थी कि AI ज्यादातर कामों के इंसानों की जगह ले लेगा. दरअसल, दुनियाभर की कंपनियां काफी तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को अपनाती जा रही है. इसके कारण से इंडस्ट्री में काम करने का तरीका इतनी तेजी से बदल रहा है, जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते. एआई इनोवेटिव तरीके से बेहतर काम करने का वादा करता है, लेकिन इसकी वजह से जॉब डिस्प्लेसमेंट के बारे में भी चिंता बढ़ती जा रही है.
 
एआई से नौकरियों पर कितना प्रभाव पड़ेगा?
बिल गेट्स का मानना है कि एआई की वजह से इंसानों की बहुत सारी नौकरियां खत्म हो जाएंगी. बहुत सारी नौकरियां ऑटोमैटिकली होने लगेंगी और उनके लिए इंसानों की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके कारण बहुत सारे कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे. हालांकि, बिल गेट्स ने यह भी कहा कि, सभी प्रकार की नौकरियों पर एआई का असर नहीं पड़ेगा. आइए हम इस आर्टिकल में उन तरह की नौकरियों की बात करते हैं, जिनपर एआई का प्रभाव पड़ सकता है.
 
 
कोडर्स (Programmers)
कई रिपोर्ट्स और टेक लीडर्स जैसे NVIDIA के जेंसन हुआंग, OpenAI के सैम आल्टमैन, और Salesforce के CEO मार्क बेनियोफ का मानना है कि एआई की वजह से सबसे पहले कोडर्स की नौकरी जा सकती है. हालांकि, एआई सिस्टम्स को ऑपरेट करने वाले लोगों की नौकरी पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा. बिल गेट्स का मानना है कि ह्यमून प्रोग्रामर्स AI एडवांस और बेहतर करने में बड़ा रोल प्ले करेगा. इसका मतलब है कि एआई कोड लिखने में इंसानों की मदद कर सकता है, लेकिन यह स्किल्ड प्रोफेशनल की जगह नहीं ले पाएगा.
 
ऊर्जा विशेषज्ञ (Energy Experts)
एआई स्वतंत्र रूप से एनर्जी के क्षेत्र को संभालने में सक्षम नहीं है, क्योंकि यह बहुत मुश्किल काम होता है. तेल और न्यूक्लियर पॉवर से लेकर रिन्यूबल एनर्जी तक जैसी समस्याओं का समाधान करने के लिए विशेषज्ञों को कई नियमों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. एआई इस क्षेत्र के बारे में जानकारी देने में मदद कर सकता है, लेकिन एआई इंसानों के द्वारा लिए जाने वाले निर्णय और किए जाने वाले निर्माणों की जगह नहीं ले सकता है. गेट्स का मानना है कि इस क्षेत्र में एनर्जी एक्सपर्ट्स की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रहेगी.
 
जैविक विज्ञानी (Biologists)
चिकित्सा अनुसंधान और वैज्ञानिक खोज के मामले में बायोलॉजिस्ट अपनी सोच, रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की क्षमता पर निर्भर होते हैं. इस वक्त एआई इन चीजों को नहीं कर सकता है, लेकिन अगर एआई इन चीजों को समझ ले तो फिर उससे बायोलॉजिस्ट को डेटा समझने में और बीमारियों का इलाज ढूंढने में काफी मदद मिल सकती है. हालांकि, इस मामले में बिल गेट्स का मानना है कि बायोलॉजिस्ट की भूमिका हमेशा ही महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वो चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम करते हैं और जीवन की जटिलताओं को समझने में मदद करते हैं.
 

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‘तरुणमित्र’ श्रम ही आधार, सिर्फ खबरों से सरोकार। के तर्ज पर प्रकाशित होने वाला ऐसा समचाार पत्र है जो वर्ष 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जैसे सुविधाविहीन शहर से स्व0 समूह सम्पादक कैलाशनाथ के श्रम के बदौलत प्रकाशित होकर आज पांच प्रदेश (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड) तक अपनी पहुंच बना चुका है। 

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