यहां कभी भी डोल सकती है धरती, लग सकते हैं भूकंप के झटके

यहां कभी भी डोल सकती है धरती,  लग सकते हैं भूकंप के झटके

कानपुर: जिस तरह कुछ दिनों पहले म्यांमार से लेकर बैंकाक और फिर टोंगा क्षेत्र में भूकंप की तबाही देखने को मिली, आने वाले समय में कमोबेश यही स्थिति बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक देखी जा सकती है. यहां कभी भी धरती डोल सकती है. लोगों को भूकंप के झटके लग सकते हैं. इससे भारी नुकसान हो सकता है. यह दावा किया है आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ प्रोफेसर व भूकंप विशेषज्ञ प्रो.जावेद एन मलिक ने.
 
21 साल पहले के डाटा पर तैयार हुई स्टडी रिपोर्ट
उन्होंने बताया कि साल 2000 में गंगा-ब्रह्मपुत्र के पास जो एक तटीय इलाका है, वहां भूकंप के तेज झटके उस दौर में लगे थे. वहां ऐसी स्थिति हो गई थी, जिसके प्रमाण आज तक मौजूद हैं. उन दिनों हिरोशिमा विवि के प्रो. नकाटा ने उस क्षेत्र को चिन्हित किया था, जो भूकंप का केंद्र रहा था. जब वहां आईआईटी कानपुर की टीम पहुंची तो हमने करीब 21 सालों बाद और आज से चार साल पहले अपना शोध कार्य शुरू किया. इसमें यह बात सामने आई कि आने वाले समय में बिहार और आसपास क्षेत्रों, बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के पास भूकंप के झटके लग सकते हैं.
 
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
उस समय की बात करें, तो वहां भूकंप के जो अवशेष मिले हैं, उन्हें देखने से ही लगता है कि भूकंप के झटके बहुत तेज थे. इसी तरह वहां की फर्श, सरफेस एरिया में बड़ी-बड़ी दरारें भी कहीं न कहीं तेज भूकंप की बानगी को प्रदर्शित करती हैं. उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर ने जो अपनी स्टडी तैयार की है, जल्द ही उसकी जानकारी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को सौंपी जाएगी.
 
गंगा-ब्रह्मपुत्र के क्षेत्र में भूकंप की तीव्रता बढ़ सकती है
प्रो.जावेद एन मलिक ने बताया कि सालों पहले गंगा-ब्रह्मपुत्र क्षेत्र के पास जो भूकंप आया, उनमें तीव्रता सात मैग्नीट्यूड तक रही थी. आने वाले समय में हम कह सकते हैं कि इतनी ही तीव्रता के झटके एक बार फिर लग सकते हैं. इससे कम तीव्रता भी हो सकती है.
 
भूकंप आने की हो सकती है ये बड़ी वजह
आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ प्रो. जावेद एन मलिक का कहना है, 21 सालों पहले गंगा-ब्रह्मपुत्र के जिस क्षेत्र में तीव्र गति से भूकंप आया था. वहां आज भी इसके कई प्रमाण हैं. जिन पर आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने शोध किया. एक स्थान पर भूकंप आने के लगभग 10 से 20 सालों के अंतराल में दोबारा भूकंप की स्थितियां जरूर बनती हैं. इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है. इसलिए ठोस दावे के साथ कहा जा सकता है, गंगा-ब्रह्मपुत्र क्षेत्र में भूकंप आने की प्रबल संभावना है.
 

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‘तरुणमित्र’ श्रम ही आधार, सिर्फ खबरों से सरोकार। के तर्ज पर प्रकाशित होने वाला ऐसा समचाार पत्र है जो वर्ष 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जैसे सुविधाविहीन शहर से स्व0 समूह सम्पादक कैलाशनाथ के श्रम के बदौलत प्रकाशित होकर आज पांच प्रदेश (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड) तक अपनी पहुंच बना चुका है। 

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