पिहानी-बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे फर्जी यमराज खाने व नर्सिंग होम

नर्सिंग होम के कथित डॉक्टर के इलाज से गई थी एक नौजवान की जान

मामला रफा-दफा कर नर्सिंग होम का बोर्ड ही बदल डाला इन कथित डॉक्टरों ने

हरदोई।पिहानी कस्बे में एक नहीं सैकड़ों की संख्या में फर्जी क्लीनिक और नर्सिंग होम दवाखाने सरकारी शासन आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए आम व्यक्ति के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।परंतु पूरे जिले में इस गोरखधंधे की विभागीय सांठगांठ अब तो जग जाहिर होती नजर आ रही है।हर वर्ष झोलाछाप डॉक्टर व इन्हीं फर्जी नर्सिंग होम व अवैध मैटरनिटी सेंटर के गलत इलाज के चलते दर्जनों लोग असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं।इस संबंध में तरुण मित्र की पड़ताल में पिहानी कस्बे में एक ऐसे नर्सिंग होम के कारनामों का भंडाफोड़ हुआ है जो वर्षों पहले किसी और नाम से चल रहा था। परंतु इसी बीच इन कथित डाक्टरों के इलाज से एक मरीज की मौत हो गई थी।इन कथित डाक्टरों के ऊपर इस संबंध में विभिन्न धाराओं में मुकदमा भी पंजीकृत हुआ था लेकिन योगी सरकार के जिम्मेदारों की खाऊ कमाऊ नीति के चलते इन कथित संचालकों पर कार्रवाई नहीं हो पाई।इन कथित संचालकों के हौसले इतने बुलंद हैं कि यह जैसे ही किसी मरीज की जान ले पाते हैं मामला रफा-दफा कर दूसरा बोर्ड लगाकर फिर कारोबार शुरू हो जाता है।प्राप्त जानकारी के अनुसार यह गोरखधंधा पिहानी कस्बे के प्रमुख बस अड्डे पर हामिद अली इंटर कालेज और जीजीआईसी के ठीक सामने कोतवाली से मात्र सौ कदम पर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से तकरीबन दो सौ मीटर की दूरी पर लखनऊ हॉस्पिटल के नाम से संचालित फर्जी नर्सिंग होम का पूर्व में मां चंद्रिका हॉस्पिटल के नाम से पिहानी हरदोई मार्ग पर भैंसटा पुल पर बनी स्व० धनन्जय सिंह की दुकान में संचालन चल रहा था लेकिन एक आध वर्ष पूर्व कस्बे के मोहल्ला खुरमुली निवासी अजीजुल्ला का 20वर्षीय नौजवान पुत्र निजामुद्दीन को उपचार के लिए शाम को भर्ती कर लिया था और रात में ही  माता-पिता को सही हालत बता कर सुबह चाय लेकर आने की बात कहकर घर वापस भेज दिया गया था।सुबह वापस आकर देखा तो नौजवान युवक की लावारिस लाश इस फर्जी अस्पताल में मिली और चिकित्सक से लेकर नर्सिंग स्टाफ सब नदारद थे।  इनके गलत उपचार युवक की मौत हो गई थी।जिसको लेकर इन पर पुलिसिया कार्रवाई की शुरुआत ही हुई थी कि पिहानी थाने के गेट पर बैठने वाला एक दलाल नेता नसीम अंसारी पूरे मामले को मैनेज करने का ठेका ले बैठा फिर क्या था हो गया मैनेज।गई गरीब की जान।जबकि विश्वस्त सूत्रों की मानें तो उस गरीब का बीमार पिता और माता आज भी एक झोपड़ी नुमा मकान में अपने परिवार के बोझ तले घुंट घुट कर कस्बे में अपना जीवन यापन कर रहा है।राजनीतिक रसूख व पैसों के चलते उस गरीब की कहीं नहीं सुनी गई।पुलिस व सीएमओ ऑफिस से सांठगांठ कर नर्सिंग होम संचालक डॉक्टर संजय दीक्षित डॉ सुनीता मिश्रा यह दोनों बच गये सुनने में यह भी आया है।कि यह डॉक्टर लखनऊ और सीतापुर से आते हैं। अप्रशिक्षित कर्मचारियों के सहारे इस नर्सिंग होम का संचालन होता है।एक नहीं दर्जनों जानी-अनजानी घटनाएं नर्सिंग होम अंजाम दे चुका है।परंतु जिम्मेदारों की आंखें या तो इस नर्सिंग होम को देखकर बंद हो जाती हैं।या यह लोग इन लोगों पर नजर डालना ही नहीं चाहते हैं। इस संबंध में डॉ सुनीता मिश्रा से फोन पर की गई वार्ता में उन्होंने बताया की नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरदोई के कार्यालय में फाइल विचाराधीन है।संवाददाता द्वारा जब यह जानना चाहा गया कि जब तक रजिस्ट्रेशन नहीं है।तब तक आप  नर्सिंग होम कैसे संचालित कर रही हैं तो उनका जवाब था सब विभाग से व्यवस्थित है।कोई समस्या नहीं आएगी वहीं इस महिला संचालक ने बताया लखनऊ निवासी डॉ एमके अग्रवाल इस नर्सिंग होम के पूर्ण रूप से मालिक है।इस संबंध में संपूर्ण जानकारी वही दे सकते हैं। उनके संरक्षण व पिहानी कस्बे के कुछ राजनीतिक रसूख व थाने के कुछ दलालों के संरक्षण प्राप्त होने के चलते इस नर्सिंग होम पर विभागीय लोग कार्यवाही करने से दहशत में रहते हैं।इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने बताया की जांच कर कार्रवाई की जाएगी वैसे कुछ भी कहो सरकारी महकमे में जिम्मेदारों के पास एक रटा रटाया जवाब होता है किसी भी शिकायत पर जांच कराकर कार्रवाई के अलावा इनके पास कोई रास्ता नहीं होता।कार्रवाई हो न हो पर जांच तो फाइलों में होती ही रहेगी। जबकि मां चंद्रिका देवी हॉस्पिटल लखनऊ मैं भी विवादित रहा है इसके अलावा सूत्रों से जानकारी मिली है कि पिहानी के अलावा भी कई जगहों पर इनका छोटे-छोटे सेंटरों पर अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ के जरिए आए दिन कोई न कोई घटना होने के बाद हटकर नाम बदलकर नवीन नर्सिंग होम का संचालन करके गोरखधंधे करना विवादों और सवालों के घेरे में रहा है।
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