एक्स-रे की हाई डोज ब्रेन ट्यूमर के रिस्क फैक्टर्स-डॉ.गुप्ता

ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों के प्रति जागरूकता बढ़ाना जिंदगी बचाने का सबसे अच्छा तरीका

लखनऊ। दुनिया में हर साल लगभग 2,50,000 लोगों में ब्रेन ट्यूमर के मामले पहचान में आते हैं। दरअसल, विश्व में प्रतिदिन ब्रेन और इंट्रा क्रेनियल ट्यूमर के 600 से अधिक मामले पहचाने जाते हैं। हालांकि इसके सामान्य लक्षणों में सिर में लगातार दर्द, दौरा, देखने में तकलीफ, उल्टी और मानसिक स्थिति में बदलाव आदि हैं। ब्रेन ट्यूमर आदि के कारण मरीज के सिर में अत्यधिक दबाव बनने के कारण उसे सुबह के वक्त सिरदर्द और उल्टी का अहसास हो सकता है। इसके अलावा मरीज को चलने-फिरने, बोलने में तकलीफ और संवेदनशीलता जैसी कुछ समस्याएं उभर सकती हैं।

नई दिल्ली स्थित बत्रा अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग के एच ओ डी डॉ. अमिताभ गुप्ता का कहना है कि लोगों और स्वास्थ प्रोफेशनल्स में ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों के प्रति जागरूकता बढ़ाना जिंदगी बचाने का सबसे अच्छा तरीका है। न्यूरोसर्जन ट्यूमर के प्रकार,ग्रेड और स्थिति तथा मरीज की सामान्य सेहत के मुताबिक इलाज का सुझाव दे सकते हैं। शीघ्र डायग्नोसिस और समय पर इलाज कराने से ब्रेन ट्यूमर से होने वाले बड़े नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।

डॉ.अमिताभ गुप्ता का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर की डायग्नोसिस एमआरआई, एंजियोग्राफी, सीटी स्कैन या पेट स्कैन टेस्ट से कराई जाती है। किसी भी प्रकार के कैंसर का मुख्य इलाज सर्जरी है जिसमें प्रभावित हिस्से के टिश्यू को यथासंभव तकनीकों से निकाला जाता है। रेडिएशन के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल करते हुए ट्यूमर पर ही केंद्रित करना अब आसान हो गया है।

डॉ. अमिताभ गुप्ता के अनुसार लिनियर एक्सीलेरेटर (लिनैक) कैंसर पीड़ित मरीजों के एक्सटर्नल बीम रेडिएशन इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाला एक प्रचलित उपकरण है। यह मरीज के ट्यूमर वाले हिस्से में हाई-एनर्जी एक्स-रे भेजता है। इनका इलाज इस तरीके से किया जाता है कि यह एक्स-रे आसपास के टिश्यू तक फैलने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर दें। ब्रेन ट्यूमर के लक्षण उनके आकार, प्रकार पर निर्भर करते हैं, वयस्कों में प्राइमरी ब्रेन ट्यूमर का सबसे आम प्रकार एस्ट्रोसाइटोमा, मेनिंनजियोमा और ओलिगोडेंड्रोग्लियोमा है पारिवारिक पृष्ठभूमि और एक्स-रे की हाई डोज ब्रेन ट्यूमर के रिस्क फैक्टर्स माने जाते हैं। डॉक्टरों द्वारा ब्रेन ट्यूमर की डायग्नोसिस मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम की मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच तथा विभिन्न प्रकार की विशेष जांच के नतीजों पर आधारित होती है। ब्रेन ट्यूमर के इलाज के अन्य विकल्पों में सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी तथा कीमोथेरेपी या एक साथ।

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