बच्चों की ड्रेसों में गोलमाल करने की जुगत में ड्रेस सप्लायर

पोलिस्टर से बनी पुराने स्टाक की ड्रेसों को स्कूलों में खपाने के लिए किया जा रहा है प्रधानध्यापकों से संपर्क

बिलग्राम हरदोई।। तहसील व ब्लाक क्षेत्र के गांवों में प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में इन दिनों ड्रेस सप्लायर पिछले साल की सिर्फ पोलिस्टर से बनी ड्रेसों को खपाने की जुगाड़ में लगे हुए हैं सूत्रों से मिल रही जानकारी से पता चला है कि ये ड्रेस सप्लायर आये दिन स्कूलों के प्रधानाचार्यों से मिलकर उन्हें मोटा कमीशन देने की बात भी कर रहे हैं ताकि उनके पास पिछले साल का रखा स्टाक खत्म हो जाये आपको बता दें कि इस वर्ष सरकार ने प्राथमिक व जूनियर स्कूलों के बच्चों को दी जाने वाली यूनीफॉर्म की गुणवत्ता में सुधार के लिए न सिर्फ पैसे बढायें है बल्कि उन्हें मिलने वाली केवल पोलिस्टर से बनी ड्रेसों की जगह पर अब काटन मिक्स पोलिस्टर वाली ड्रेस वितरण करने का आदेश दिया है। पिछले वर्ष तक प्रति स्कूली बच्चों को दो यूनीफॉर्म दी जाती थी जिसका पैसा सरकार प्रति यूनीफॉर्म दो सौ रुपये अदा करती थी जिसमें भी कमीशन के नाम पर पचास रुपये अधिकारियों का निकालना पड़ता था अब बचे 150 रुपये इतने कम पैसों में बच्चों को गुणवत्ता परक यूनीफॉर्म कैसे उपलब्ध हो सकती है ये सोचने वाली बात है इसलिए ड्रेस सप्लायर सिर्फ पोलिस्टर से बनी ड्रेसों को स्कूलों में सप्लाई कर के खुद भी मुनाफा कमाते हैं क्योंकि ये कपड़ा मार्केट में बहुत सस्ता मिलता है आपको बता दें कि सिंथेटिक कपड़ो में सबसे कामन नाम है पोलिस्टर ये कपड़ा फाइबर सिंथेटिक पोलिम्स से बनता है। जो शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। पोलिस्टर के बने कपड़े लगातार और लंबे समय तक पहने से श्र्वसन तंत्र की बीमारी खुजली त्वचा पर चकत्ते आदि होने का खतरा पैदा हो सकता है। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की त्वचा वैसे ही नाजुक और कोमल होती है इसलिए बच्चों को पोलिस्टर से बने कपड़े पहनने से त्वचा संबंधी बीमारियों का शिकार होना लाजमी है इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस बार बच्चों को दी जाने वाली यूनीफॉर्म की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए बच्चों को प्रति यूनीफॉर्म सौ रुपये बढा कर देने का फैसला किया है यानी दो सौ रुपये की जगह अब सरकार तीन सौ रुपये प्रति ड्रेस अदा करेगी लेकिन कपड़े का बदलाव करते हुए सरकार ने ये भी कहा कि अब सिर्फ पोलिस्टर से बनी ड्रेस नहीं चलेगी उसमे काटन मिक्स होना जरूरी है। 67, 33 उसके मानक का भी निर्धारण कर दिया गया यानी कि अब यूनीफॉर्म के कपड़े में 67 पर्सेंट पोलिस्टर और 33 पर्सेंट काटन होना जरूरी है। सरकार के इस आदेश के बाद जिनके पास पिछले साल की पोलिस्टर से बनी ड्रेस रखी है उनके अरमानों पर पानी फिर गया अब वो इन्हें खपाने की जुगाड़ में इधर उधर स्कूलों के चक्कर लगा रहे हैं।

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