‘स्वच्छता मिशन’ को मुंह चिढ़ाता यूपी का रोडवेज मुख्यालय

पीएम मोदी और खुद सीएम योगी भी स्वच्छता कार्यक्रमों को लेकर हैं गंभीर

एक ओर सफेद बिल्डिंग के साफ-सुथरे केबिनों में बैठते हैं मंत्री और ब्यूरोके्रट

दूसरी तरफ सर्वेंट क्वार्टर के आसपास फैला है गंदगी-कूड़ा करकट का अंबार

निगम मुख्यालय पर बैठते हैं दर्जन भर रोडवेज अफसर, पर किसी ने नहीं लिया संज्ञान

लखनऊ। पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी लगातार देश-प्रदेश और यहां तक कि विदेशी दौरों के दौरान भी केंद्र संग राज्य सरकारों के स्वच्छता मिशन को लेकर लगातार वाद-संवाद और जनजागरुक भाषण देते आ रहे हैं। इसका असर यह दिख रहा है कि चाहे केंद्रीय हो या फिर राज्य सरकार के अन्तर्गत आने वाले सरकारी विभाग, मुख्यालय या फिर क्षेत्रीय कार्यालय…आये दिन यहां पर स्वच्छता आधारित खास कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है ताकि अधिकारियों से लेकर कर्मचारी तक इस व्यापक जन जागरण मिशन का हिस्सा बनें और अपने आसपास लोगों को भी साफ-सफाई के प्रति प्रेरित करें। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बार आगामी दो अक्टूबर को पड़ रहे गांधी जयंती से पहले ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ के आह्वान के बाद तो जैसे स्वच्छता मिशन को पंख लग गये हों…विभागीय मंत्री भी जनता-जनार्दन के बीच जाकर स्वच्छता से जुड़े जमीनी कार्यक्रमों में अपनी सहभागिता दिखा रहे हैं।

लेकिन इन सबसे इतर…राजधानी लखनऊ के टेहरी कोठी स्थित उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम का मुख्यालय संभवत: ऐसा सरकारी विभागीय हेडक्वार्टर है, जहां एक तरफ तो परिवहन मंत्री का चेम्बर होने से लेकर निगम के चेयरमैन, एमडी, एएमडी जैसे सीनियर ब्यूरोके्रट्स की टीम अपने साफ-सुथरे, हवादार और खुश्बूदार कार्यालयों में बैठते हैं। साथ ही इसी हेडक्वार्टर के एक-एक कक्ष में रोडवेज के मुख्य प्रधान प्रबंधक से प्रधान प्रबंधकों जैसे निगम के आला अधिकारियों का दल बैठता है। मगर यूपी रोडवेज मुख्यालय के इसी वीआईपी बिल्डिंग के दूसरे तरफ की तस्वीर कुछ ऐसी है…टूटी-फूटी व जर्जर बिल्डिंग और उसके आसपास गंदगी व कूड़ा-करकट का अंबार जमा, घास-फूस, ऊबड़खाबड़ रोड पर जमा बरसाती पानी और रह-रहकर वहां से उठने वाली बदबू। और सबसे हैरानी तो तब होती है जब खुद रोडवेज मुख्यालय पर तैनात कुछ कर्मी इसी कूडे के ढेर पर अपनी ‘लघुशंका’ का समाधान करने से बाज नहीं आते।

फिलहाल, रोडवेज मुख्यालय पर व्याप्त ऐसी भौतिक गंदगी की तरफ नैतिक जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षण कराने के लिए ‘तरुणमित्र’ के संवाददाता और कैमरामैन की टीम ने आन-द-स्पॉट इसे कवर करने की जमीनी कोशिश की।

एक से डेढ़ साल में ही उठता है कूड़ा!

जब पता चला कि रोडवेज मुख्यालय पर साफ-सफाई व पेयजल आदि की व्यवस्थाा का जिम्मा यहां के नजारत विंग के पास है, तो इससे जुडेÞ अनुभाग अधिकारी दीपक वर्मा से बात की गई। वहीं जब उनसे यह पूछा गया कि आखिर बारिश का आधा समय निकल गया और अब ठंड आने वाली है और ऐसे संक्रामक मौसम में भी मुख्यालय पर पसरे ऐसे कूडेÞ के अंबार को अभी तक नहीं साफ कराया गया…तो उनका जवाब हैरान करने वाला रहा। उन्होंने यही कहा कि हमें पता है, वहां से कूड़ा एक से डेढ़ साल में एक बार ही नगर निगम की टीम द्वारा उठवा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि आरआर विभाग को इसके लिये लेटर लिखा है। बहरहाल, नजारत अधिकारी की उक्त बातों से यही लगा कि वो कहीं न कहीं अपने मूल विभागीय जिम्मेदारी को लेकर उतने गंभीर नहीं लगे।
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भईया, छोटे कर्मचारी हैं…हमारी कौन सुनेगा!
निगम मुख्यालय के पार्किंग एरिया के तरफ जहां कूड़े का टीला जैसा बनता जा रहा है, वहां एक ओर लाइन से ऊपर कुछ सर्वेंट क्वार्टर बने हैं और उसके ठीक नीचे अलग-अलग गैरेज हैं जहां पर देर शाम अलग-अलग रोडवेज अफसरों के सरकारी वाहन पार्क होते हैं। सर्वेंट क्वार्टर की भी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर ही हो चुकी है। जगह-जगह दीवारों से पानी रिसता नजर आता है और जबकि पीछे गली में जंगली घास-फूस, प्लास्टिक की बोतलें और तमाम बेकार चीजें फेंकी हुई दिखायी दी। तीन-चार शौचालय भी बनाये गये, मगर उनमें कभी भी पानी का कनेक्शन नहीं जोड़ा गया। अब तो वो भी खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। वहीं जब इस अव्यवस्था को लेकर कुछ सर्वेंट से बात करने की कोशिश की गई तो उनका यही कहना रहा कि भईया हम बहुत छोटे कर्मचारी हैं, हमारी कौन सुनेगा…कुछ भी नहीं बोल सकते, साहब लोग जाने…अपनी सबकी तो जैसे-तैसे कट रही है। बता दें कि अभी कुछ ही दिन निगम मुख्यालय पर तैनात कुछ कर्मचारियों ने कुछ पैसा जोड़-जमाकर नगर निगम की टीम से कुछ कूड़ा यहां से हटवाया।

अभी तक नहीं गई एमडी की नजर!

हालांकि यूपी रोडवेज के नवागत एमडी डॉ. राजशेखर लगातार बस स्टेशनों से लेकर विभिन्न जनपदीय डिपो का दौरा कर रहे हैं और वहां पर समुचित साफ-सफाई के मद्देनजर कड़े निर्देश भी क्षेत्रीय अधिकारियों को दे रहे हैं। यानि कहीं न कहीं वो पीएम और सीएम के स्वच्छता मिशन को लेकर सजग हैं, लेकिन कहते हैं न…पहले अपने घर के अंधेरे को दूर कर लेना चाहिये और तभी बाहर निकलकर रौशनी फैलानी चाहिये। बहरहाल, उनका ध्यान रोडवेज मुख्यालय के एक ओर फैले ऐसी गंदगी की तरफ अभी तक क्यों नहीं जा पाया…ये विचारणीय प्रश्न है। वहीं या फिर यह भी हो सकता है कि जब मुख्यालय के ही संबंधित अधिकारी को ही अपने आसपास फैली इस गंदगी के बारे में कोई ज्ञान नहीं है तो वो अपने निगम मुखिया को इसके बारे में क्या बता पायेंगे। गौर हो कि अभी एक दिन पहले ही एमडी ने नाइट ड्यूटी पर चलने वाले कंडक्टरों व ड्राईवरों के लिए कैसरबाग डिपो में बेहतर व्यवस्थाओं से लैस रेस्ट रूम को शुरू कराया है जिसमें बकायदा लगेज व सामान आदि रखने के लिए छोटे-छोटे लॉकर भी बनाये गये हैं। एमडी की इस पहल को लेकर रोडवेज कर्मियों में काफी उत्साह का माहौल दिख रहा है, मगर फिर वही प्रश्न आ खड़ा होता है…जमीनी सुधार की शुरूआत सबसे पहले अपने आसपास से करें तो इसका नतीजा बेहतर ही आता है।

स्वतंत्र देव तक उठा चुके हैं झाड़ू!
ऐसा नहीं है कि निगम मुख्यालय पर स्वच्छता कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होता है। इससे पहले जब स्वतंत्र देव सिंह के पास यह विभाग रहा, तो यही मुख्यालय के बगीचे में उन्होंने साफ-सफाई के प्रति जन-जन को प्रेरित करने के उद्देश्य से खुद अपने हाथों से झाड़ू उठायी और सफाई करने लगे। इतना देख वहां पर खड़े मुख्यालय के अफसर भी उनका अनुसरण करने लगे। स्वतंत्र देव ने तो गोमतीनगर डिपो में भी इसी प्रकार से सफाई करते हुए संदेश दिया था।

पूर्व सीएम एनडी तिवारी के बेटे ने किया था दौरा!
बताते हैं कि रोडवेज मुख्यालय के एक कोने में फैली इस प्रकार की अव्यवस्था को लेकर काफी लम्बे अर्से से न तो किसी मंत्री और न ही किसी एमडी का ध्यान गया। हालांकि निगम मुख्यालय के ही कुछ कार्मिकों की मानें तो पूर्व सीएम एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी जब अखिलेश सरकार में कुछ समय के लिए परिवहन विभाग के सलाहकार बनाये गये थे, तो उन्होंने यहां का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने ऊपर जाकर सर्वेंट क्वार्टर की बदहाली को भी देखा था और आसपास फैली गंदगी को अविलंब साफ कराने के निर्देश दिये थे। उनके निर्देश का असर यह हुआ कि दो-चार दिनों तक कुछ मजदूर वहां पर साफ-सफाई करते दिखायी दिये, मगर समय बीतने के साथ ही वो भी चलता बने क्योंकि निगम पर संबंधित अफसरों को उनके इस कार्य से कुछ भी लेना-देना नहीं बचा था।

‘मुख्यालय पर स्वच्छता संबंधी काम नजारत के पास है। इस अनुभाग से जुड़ी उच्च स्तर की संबंधित फाइलें मेरे द्वारा आगे प्रबंधन को फारवर्ड की जाती हैं। मुझे तो पता हीं नहीं, इस बारे में। चलिये इसके लिये नजारत को बोलता हंू।’
 साद सईद (जीएम, रोडवेज मुख्यालय)

‘नजारत का काम मेरे ही जिम्मे है, पर बगल के परिवहन विभाग के नजारत विंग के पास सबकुछ है, मेरे पास कुछ कार्य आवंटित नहीं है। एक से डेढ़ साल में कूड़ा उठवा दिया जाता है, जल्द ही हटवा दिया जायेगा।’
 दीपक वर्मा (नजारत विंग, रोडवेज मुख्यालय)

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