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वो चीजें जो आपको सिफलिस के बारे में पता होनी चाहिए

यौन संचारित रोगों के बारे में सभी को पता होना जरुरी होता है। अगर आप उस व्यक्ति के साथ असुरक्षित तरीके से यौन संबंध बनाते हैं जो पहले से यौन संचारित रोग से ग्रसित है तो आपके भी इस रोग से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है। इन यौन संचारित रोगों में से एक सिफलिस रोग भी है। सिफलिस रोग की जांच ब्लड टेस्ट के माध्यम से की जा सकती है। जिसकी इलाज करके इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर आप इसका इलाज नहीं करवाते हैं तो यह समस्या गंभीर हो सकती है। इसलिए सिफलिस के संकेतों के बारे में पता होना जरुरी होता है। तो आइए आपको यौन संचारित रोग सिफलिस के बारे में बताते हैं।

सिफलिस से जुड़ी जानकारी

प्राइमरी सिफलिस
सेकेंड्री सिफलिस
लेटेंट सिफलिस
टेरशरी सिफलिस

प्राइमरी सिफलिस: प्राइमरी सिफलिस के संकेत घाव होना होते हैं। यह घाव एक तरह के दाग होते हैं जो बैक्टीरिया के शरीर में घुसने पर बनते हैं। बहुत से लोगों को सिफलिस से ग्रसित होने पर सिर्फ एक ही घाव होता है तो कुछ लोगों को बहुत सारे घाव होते हैं। यह घाव सिफलिस से ग्रसित होने के कम से कम 3 हफ्ते बाद विकसित होते हैं। लोग अक्सर इन पर ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि इन घावों में दर्द नहीं होता है। यह 3-6 हफ्ते बाद ठीक हो जाते हैं।

सेकेंड्री सिफलिस: घाव ठीक होने के कुछ समय बाद ही जननांगो में रैशेज होने लगते है। फिर यह रैशेज पूरे शरीर में फैल जाते हैं। यह रैशेज छोटे लाल-भूरे रंग के होते हैं जो पूरे शरीर पर हो जाते हैं। इसके साथ ही मसल्स में दर्द, बुखार और ग्रंथियों में दर्द होता है। अगर आप इन संकेतों का इलाज नहीं करते हैं यह कुछ समय के लिए चले जाते है उसके बाद दोबारा हो जाते है।

लेटेंट सिफलिस: जब आप सिफलिस के लक्षणों को इलाज नहीं करते हैं तो यह थोड़े-थोड़े समय बाद दिखने लगते हैं। यह इंफेक्शन आपके शरीर में रहता है बेशक इसके संकेत दिखना बंद हो जाएं। बहुत से लोगों को स्पर्म एलर्जी जैसी समस्या भी होती है। इसके बारे में जानने के लिए क्लिक करें।

टेरशरी सिफलिस: यह सिफलिस की आखिरी स्टेज होती है। अगर आप इतने समय में इसका इलाज नहीं करा पाते हैं तो आपको दिक्कत हो सकती है। इससे न्यूरोलॉजिकल समस्या, स्ट्रोक, इंफेक्शन और दिमाग के आस-पास की झिल्ली में सूजन आ सकती है।

सिफलिस हो या कोई अन्य यौन संचारित रोग इसके संकेतों के बारे में पता होना जरुरी होता है ताकि खुद को बचाया जा सके।

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