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18 फरवरी से प्रस्तावित यूपी बोर्ड की परीक्षा में सरकार करेगी 150 करोड़ रुपये खर्च

,प्रयागराजे। 18 फरवरी से प्रस्तावित यूपी बोर्ड की परीक्षा पर सरकार लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इस बजट से माध्यमिक शिक्षा परिषद के अफसरों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 56 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए डेस्क स्लिप से लेकर अंकपत्र सह प्रमाणपत्र तक का इंतजाम करना है। हालांकि पर्याप्त बजट नहीं मिलने के कारण बोर्ड पर पिछले कई सालों का गवर्नमेंट प्रेस का तकरीबन 200 करोड़ बकाया भी है।

बोर्ड परीक्षा के बजट में सर्वाधिक खर्च विभिन्न विषयों के पेपर बनवाना, उनका मॉडरेशन, छपवाना और जिलों तक पहुंचाना होता है। प्रश्नपत्र कई सेट में बनवाए जाते हैं ताकि लीक होने पर परीक्षा संपन्न कराई जा सके। पेपर का पूरा काम अतिगोपनीय होता है जिसकी जानकारी बोर्ड सचिव के अलावा किसी को नहीं होती। छात्र-छात्राओं की करोड़ों कॉपियां जांचने के लिए तकरीबन डेढ़ लाख शिक्षकों की ड्यूटी लगती है। इसमें 15 करोड़ के आसपास खर्च आता है।

कॉपियां छपवाने पर भी 17-18 करोड़ रुपये का खर्च होता है। इसके अलावा बोर्ड परीक्षा की निगरानी के लिए पांच दर्जन से अधिक विभाग के अफसरों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। उनकी गाड़ी के तेल, उनके मानदेय आदि पर काफी रुपये खर्च होते हैं। रिजल्ट तैयार करने के लिए कम्प्यूटर एजेंसियों की मदद ली जाती है जिसका लंबा-चौड़ा खर्च है। उसके बाद अंकपत्र सह प्रमाणपत्र, टैबुलेशन रिकॉर्ड छपवाने में भी काफी खर्च
होता है।

पूरे प्रदेश में बुधवार से भेजी जाएंगी कॉपियां:2020 की बोर्ड परीक्षा के लिए हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं के लिए उत्तरपुस्तिकाएं विभिन्न जिलों में बुधवार से भेजी जाएंगी। गवर्नमेंट प्रेस सूत्रों के अनुसार सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है। उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने 10 जिलों में सिली हुई कॉपियां भिजवाने के निर्देश दिए थे लेकिन अभी तक जिलों का नाम फाइनल नहीं हो सका है।

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