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महाराष्ट्र और राजस्थान में भी सीएए के खिलाफ विधानसभा में पेश होंगे प्रस्ताव

नई दिल्ली। राजस्थान व महाराष्ट्र ने भी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा कांग्रेस की ही सत्ता वाले मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी जल्द ही यह कदम उठाए जाने की संभावना सूत्रों ने जताई है। अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार ने सीएए के खिलाफ आगामी बजट सत्र में एक संकल्प प्रस्ताव विधानसभा में पारित कराने का निर्णय लिया है।

राज्य के संसदीय मामलों के मंत्री शांति धारीवाल ने कहा, विधानसभा में बजट सत्र 24 जनवरी से शुरू होगा और यह प्रस्ताव पहले दिन ही पेश होने की संभावना है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी/एसटी आरक्षण को 10 साल के लिए आगे बढ़ाने वाले बिल को 25 जनवरी से पहले ही मंजूरी देना आवश्यक है। इसलिए बजट सत्र 24 जनवरी से ही शुरू हो जाएगा।

सूत्रों का कहना है कि पिछले साल बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले छह विधायकों ने वाजिब अली के नेतृत्व में शुक्रवार को इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र सौंपकर विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव लाने की मांग की थी।

उधर, महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी व कांग्रेस के गठबंधन वाली महाविकास अघाड़ी सरकार भी जल्द ही विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश करेगी। कांग्रेस प्रवक्ता राजू वाघमारे ने कहा, हमारे गठबंधन के वरिष्ठ नेता जल्द ही इस मुद्दे पर बैठक आयोजित कर निर्णय लेंगे।

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर पंजाब सरकार के नक्शेकदम पर अन्य कांग्रेस शासित राज्य भी चलने की तैयारी में हैं। पंजाब विधानसभा सीएए के खिलाफ पहले ही प्रस्ताव पास कर चुकी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने रविवार को कहा कि हम पंजाब के बाद अब राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इसके खिलाफ प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं।

पटेल ने कहा कि विधानसभाओं से सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास करने से केंद्र सरकार को स्पष्ट संदेश जाएगा कि वह इस पर पुनर्विचार करे। राजस्थान में इसकी तैयारी भी शुरू हो चुकी है। वहां 24 जनवरी से विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सत्र के पहले ही दिन सीएए के खिलाफ प्रस्ताव लाया जा सकता है।

वहीं दूसरी ओर, पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि हर राज्य की विधानसभा के पास सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास करने और इसके वापस लेने की मांग करने का सांविधानिक अधिकार है लेकिन जब किसी कानून को सुप्रीम कोर्ट सांविधानिक घोषित कर देता है तो राज्यों के लिए इसका विरोध करना मुश्किल होगा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सिब्बल ने एक दिन पहले ही कहा था कि संसद से पारित कानून को कोई भी राज्य लागू करने से मना नहीं कर सकता है।

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