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ऐसा मेडल किस काम का जो जून की रोटी भी न दिला सके, अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी झोपड़ी में रहने को मजबूर

गोंडा। जी हाँ आँखों में रोशनी नहीं मगर उन्हीं आँखों में एक लम्बी उड़ान के सपने और इसी सपने ने राजन बाबू को एक छोटे से गांव से वियतनाम तक पहुंचा दिया।

मुफलिसी और लाचारी की जिंदगी के बीच इस दिव्यांग युवक ने इतनी ऊंची उड़ान भरी की उसने देश-प्रदेश और फिर अंतर्राष्ट्रीय खेलों में अपनी जगह बना ली। उसने वियतनाम में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय जूडो चैम्पियनशिप में भारत के लिए कांस्य पदक जीतंकर अपने देश का ही नहीं बल्कि अपने गाँव का भी नाम रोशन कर दिया। मगर हालात ऐसे हैं की यह अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर है।

खेलों की गलैमरस जिंदगी के बीच यह प्रतिभा अभी भी घास फूस के मकान में सिसक रही है। मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर जिले के हलधरमऊ का हड़ियाडांडा गाँव जहाँ पर एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी राजन बाबू रहता है। बचपन से ही प्रकृति ने इसके साथ क्रूर मजाक किया और राजन ने जन्म तो ले लिया मगर उनकी आँखों में रोशनी नहीं थी।

इस गांव के छोटे से मजरे पोस्टआफिस पुरवा में ही राजन की पढ़ाई लिखाई हुई और उसके माता पिता ने जमीन गिरवी रखकर कर्ज लेकर राजन को जूडो का खिलाड़ी बनाया। राजन ने भी हार नहीं मानी और सीढ़ियां चढ़ते गए और उनको मंजिल तब मिली जब वियतनाम में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय जूडो चैम्पियनशिप में कांसा जीतकर भारत का सर ऊंचा किया।

क्या कहता है राजन
राजन का कहना है की मेहनत करने वालों की हार नहीं होती और उनकी आँखों में अभी भी भारत को ओलम्पिक में पदक दिलाने का सपना है। वहीं उन्हें अपने देश और प्रदेश की सरकारों से शिकायत भी है की ऐसे लोगों पर आज भी सरकार की नजरे इनायत नहीं हैं।

क्या कहते है माता पिता
तमाम परेशानियों के बीच राजन के माता पिता ने हार नहीं मानी और अपने बेटे का हौसला बढ़ाया साथ ही अपना सब कुछ दांव पर लगाकर उसको ख़िलाड़ी बनाया। आज भी राजन के पिता हनुमान सिंह बीमार रहते हैं। सारा जिम्मा माँ पर है मगर अपने लिये कुछ भी नहीं चाहते हैं। कहते हैं कि कोई तो बेटे की सुधि ले।

गांव के लोग भी है खफा
राजन के गांव के लोग भी उसकी इस कामयाबी पर नाज करते हैं मगर ऐसे लोगों पर ध्यान न देने के लिए सरकारों को कोसने से नहीं थकते हैं। मनोहर कहते हैं कि कोई इस प्रतिभा को निखारने के लिए आगे नही आया।

बोले डीएम
डीएम जेबी सिंह ने बताया कि इस खिलाड़ी के बारे में जानकारी नही थी। अब जानकारी मिली है निश्चित रूप से प्रशासन की ओर से उसकी और परिवार की हर संभव मदद की जायेगी।

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