डिफाल्टर होने के कगार पर पाकिस्तान, डालर के मुकाबले 150 पाकिस्तानी रुपया पहुंच सकता

नई दिल्ली। डॉलर की मार से भारतीय मुद्रा रुपया तो लड़खड़ा रहा ही है, लेकिन पाकिस्तानी रुपया तो एक ही दिन में लगभग तबाह ही हो गया। मंगलवार को पाकिस्तानी रुपया एक डॉलर की तुलना में 139 रुपए तक नीचे पहुंच गया था। यह गिरावट एक दिन में 10.24 फ़ीसदी रही। बहरहाल शाम होते-होते कुछ संभला और 133.64 पर बंद हुआ।

सोमवार को एक डॉलर की क़ीमत पाकिस्तान में 124.27 पाकिस्तानी रुपए थी। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक़ 9.371 की गिरावट के साथ मंगलवार को मुद्रा बाज़ार बंद हुआ। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह गिरावट चालू खाता घाटा और डॉलर की मांग-आपूर्ति में बढ़ती गहरी खाई को दर्शाता है।

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमत से पाकिस्तान का तेल आयात बिल लगातार बढ़ रहा है और इससे विदेशी मुद्रा भंडार भी तेजी से खाली हो रहा है। एसबीपी का कहना है कि बाज़ार में डॉलर की मांग बढ़ रही है, लेकिन आपूर्ति उस हिसाब से नहीं है। एसबीपी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान में पिछले कुछ दिनों से खुले बाज़ार में डॉलर की क़ीमत बैंकों के लेन-देन से चार से पाँच रुपए ज़्यादा देखी जा रही है।

पाकिस्तान में करेंसी डीलर इस बात से डरे हुए हैं कि आने वाले दिनों में बाज़ार में डॉलर को लेकर भगदड़ की स्थिति होगी, इसलिए लोग डॉलर ख़रीद रहे हैं। कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी रुपया एक डॉलर की तुलना में 140 रुपए तक जा सकता है। 2017 दिसंबर के बाद से पाकिस्तानी रुपए में पाँच बार अवमूल्यन किया गया है। एक बार फिर से स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान रुपए की क़ीमत कम करने पर विचार कर रहा है।

दरअसल पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) से मदद मांगी है और आईएमएफ़ ने रुपए को एक डॉलर की तुलना में 150 तक ले जाने की सलाह दी है। हालांकि समाचार एजेंसी रॉयटर्स से पाकिस्तान के एक ब्रोकर ने कहा कि एसबीपी को अवमूल्यन की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी क्योंकि रुपया ख़ुद ही उस आंकड़े को छू लेगा। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एसबीपी ने तत्काल कोई अवमूल्यन किया तो बाज़ार में पहले की तरह असंतुलन पैदा हो जाएगा जैसा कि पहले हुआ था। इससे पहले जब अवमूल्यन किया गया था तो बैंक ऊंची क़ीमत पर डॉलर दे रहे थे और खुले बाज़ार में सरकारी दर से सस्ती क़ीमत पर रुपए मिल रहे थे।

पाकिस्तान की सरकार अभी स्पष्ट रूप से कुछ कह नहीं रही है कि तत्काल कितनी विदेशी मुद्रा चाहिए। पाकिस्तान के वित्त मंत्री असद उमर ने कहा है कि इस साल के दिसंबर तक पाकिस्तान को आठ अरब डॉलर के विदेशी क़र्ज़ का भुगतान करना है। अगर पाकिस्तान इसका भुगतान नहीं करता है तो उसे डिफॉल्टर बनने का तमगा अपने सिर बांधना होगा।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इसी संकट और ज़रूरत को देखते हुए 1980 के दशक के बाद से 13वीं बार आईएमएफ़ की शरण में जाने का फ़ैसला किया है। पाकिस्तान को वित्त वर्ष 2019 में एक अनुमान के मुताबिक़ 22 से 25 अरब डॉलर चाहिए। पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद लेना भी इतना आसान नहीं है। आईएमएफ़ की कई शर्तें होती हैं जिन्हें पाकिस्तान के लिए मानना इतना आसान नहीं होगा। आईएमएफ़ ने पाकिस्तान से चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर में चीनी कर्ज़ का हिसाब मांगा है, पर चीन नहीं चाहता है कि ये सार्वजनिक हो। इसके साथ ही पाकिस्तान को अपने रुपए की क़ीमत एक डॉलर की तुलना में कम से कम 150 रुपए तक ले जाने की सलाह दी गई है और ज़ाहिर है इसका असर देश में महंगाई पर पड़ेगा।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान पर विदेशी क़र्ज़ 91.8 अरब डॉलर हो गया है। क़रीब पांच साल पहले नवाज़ शरीफ़ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी तब से इसमें 50 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पाकिस्तान पर कर्ज़ और उसकी जीडीपी का अनुपात 70 फ़ीसदी तक पहुंच गया है। कई विश्लेषकों का कहना है कि चीन का दो तिहाई कर्ज़ सात फ़ीसदी के उच्च ब्याज दर पर है। पाकिस्तान में आय कर देने वालों की संख्या भी काफ़ी सीमित है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार 2007 में पाकिस्तान में आय कर भरने वालों की संख्या महज 21 लाख थी जो 2017 में घटकर 12 लाख 60 हज़ार हो गई। कहा जा रहा है कि इस साल इस संख्या में और कमी आएगी। पाकिस्तान के सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018 में चीन से पाकिस्तान का व्यापार घाटा 10 अरब डॉलर का है। पिछले पांच सालों में यह पांच गुना बढ़ा है। इसका नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान का कुल व्यापार घाटा बढ़कर 31 अरब डॉलर हो गया। पिछले दो सालों में पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में 10 अरब डॉलर की कमी आई है।

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