काठमांडू में आयोजित अन्तरराष्ट्रीय महाकुम्भ में कुकुही निवासी रेशम सिंह ने गोल्ड मेडल जीता 

कछौना-हरदोई नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित महाकुंभ में रेशलर रेशम सिंह ने गोल्ड मेडल हासिल कर कछौना के गांव कुकुही का मान बढ़ाया। इनकी जीत पर पहलवान साथियों व मित्रगणों व ग्राम सभा में खुशी की लहर हैं। 74 किलो वर्ग भार की फ्री स्टाइल में रेशम सिंह को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया। कोतवाली कछौना के ग्राम सभा कुकुही के ग्राम कुसहा में एक किसान परिवार में जन्म लिया। जहां पर उनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा हुई। पिता राम सिंह किसानी करते हैं। अपने चाचा सुरजीत सिंह पंजाब केसरी से कुश्ती खेल की भावना कर गई है। कुश्ती के दांव पेच चाचा सुरजीत सिंह से सीखे। इसके बाद तत्कालीन जिला क्रीड़ा अधिकारी अनिमेष सक्सेना का काफी सहयोग मिला। जिससे देश के लिए कुछ करने का जब्बा पैदा हो गया। उनके प्रयास से के०डी० सिंह बाबू स्पोर्ट अकादमी लखनऊ में दाखिला कराया। इसके बाद दिल्ली, हरियाणा में प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रतिभा को निखारा। जिसका परिणाम स्वरूप नेपाल देश में अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ में भारत की तरफ कुश्ती लड़कर परचम लहराकर गोल्ड मेडल हासिल किया। रेशम सिंह ने साबित कर दिया ग्रामीण क्षेत्र में सीमित संसाधनों के बावजूद प्रतिभाएं मुकाम हासिल कर सकती हैं। रेसलर रेशम सिंह के बारे में जब सांसद डॉ० अंजू बाला को जानकारी हुई। उन्होंने रेसलर रेशम सिंह को अपने हाथों से साल ओढ़ाकर जोरदार स्वागत किया। ग्रामीण क्षेत्र के युवा ने आगे आकर मेरा नाम, गांव, देश का नाम रोशन किया हैं। यह हमारे युवाओं के लिए प्रेरणा स्वरूप है। उन्होंने कहा हुनर किसी प्रतिभा का मोहताज नहीं होता है। सांसद के रूप खेल कूद के क्षेत्र में पूरी सहायता करके एक नई शुरुआत करेंगे।इस प्रतिभा के बारे में तेजतर्रार युवा जिला अधिकारी को अवगत कराया। इस प्रतिभा का कहीं ओर पलायन न हों। इस प्रतिभा के लिए प्रशासनिक स्तर पर पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया। जिस पर जिलाधिकारी पुलकित खरे ने गोल्ड मेडल विजेता रेशम सिंह को सम्मानित कर हौसला अफजाई की। इस मुकाम पर पहुंचने तक की पूरी कहानी रेशम सिंह से जानी। रेशम सिंह ने जिलाधिकारी को बताया, हम अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए कुछ करना चाहते हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्र से प्रतिभाएं निकल सकें। इसके लिए खेलकूद के मैदानो की नितांत आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्र के खेलकूद के मैदानों पर अवैध कब्जा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेलकूद के नाम पर कोई संसाधन नहीं उपलब्ध है। खेलकूद में संचालित योजनाएं कागजों पर संचालित है। खेल-कूद के अभाव में व सही मार्गदर्शन के अभाव में गांव की प्रतिभाएं जब्बा होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ पाती हैं। जिला अधिकारी ने रेशम सिंह को भरोसा दिलाया, खेलकूद में खिलाड़ी को बेहतर सहयोग व प्रदर्शन के लिए खेलकूद समिति को बेहतर किया जायेगा। रेशम सिंह की मांग पर गांव में मिनी स्टेडियम व खेलकूद मैदान, अन्य सुविधाओं के लिए शासन को पत्र लिखकर उपलब्ध कराई जाएगी। रेशम सिंह ने गोल्ड मेडल का पूरा श्रेय अपने गुरु, माता, पिता, चाचा को देता हैं। रेशम सिंह की जीत ने देश, प्रदेश, जिला, तहसील, गांव का नाम रोशन किया है। इस कामयाबी से बधाई देने वालों का तांता लगा है। ग्राम प्रधान पुत्र निर्भय राजवंशी ने स्टेडियम के लिए ग्राम सभा की भूमि देने की बात कही है।
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