हरदोई

राजकीय राजमार्ग पर रजबहा की पुलिया की टूटी बाउंड्री,बड़े हादसे के इंतजार में पीडब्ल्यूडी विभाग

पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड 2 में भ्रष्टाचार का जमकर बोलबाला
बिलग्राम।हरदोई24नवम्बर।नगर स्थित लोकनिर्माण विभाग की कार्य करने के तरीके पारदर्शी नही हैं जहां धरातल पर काम कम और कागजों पर ज्यादा निपटाए जाते हैं।आम आदमी से लेकर जनता व विभागीय स्वच्छ ठेकेदारों तक को कार्यों की खबर नहीं होती है।इसका भरपूर खयाल रखते हुए कई कार्यों को गुपचुप तरीके से निपटा लिया जाता है।जिसका ताजा उदाहरण बिना बांड के बगुलहिया तिराहा जरौली नेवादा मार्ग से रामपुर मझियारा तक नवीनीकरण डामरीकरण कार्य कराया गया।जिसमें लाखों रुपए खर्च हुए।लेकिन गुणवत्तापूर्ण सड़क पर चलने के साथ हर व्यक्ति आसानी से पता लगा सकता है।जाहिर सी बात है उक्त कार्य करने के किसी खास व्यक्ति को कमीशन के मोटे बंदरबांट के सहित दिया गया।जो कहीं न कहीं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की ओर इशारा करती है।इसी गुणवत्ता विहीन डामरीकरण हुई सड़क की शिकायत सम्बंधित ग्राम सभा के वाशिन्दों द्वारा विभागीय उच्च अधिकारियों से की गई।लेकिन सूत्रों की मानें तो वगैर निविदा प्रकाशित करने के साथ किसी कार्य को करवाना किसी बड़े घोटाले की कहानी बयां करता है।अगर सूत्रों की मानें तो घपला यही नहीं रुका।इसी कार्यालय के निर्माण खण्ड दो मुख्यालय बिलग्राम में दो बोलेरो गाड़ियां प्राइवेट नम्बर की टैक्सी के नाम से किराए पर कई महीनों से संचालित हैं।अब सवाल यह उठता है कि यदि विभाग के मन में कोई खोट नहीं तो वह टैक्सी कोटे की गाड़ियां अपने कार्य हेतु उपयोग में क्यों नहीं लेता।यदि कोई हादसा हो गया तो जिम्मेदारी किस पर होगी।लोगों ने बताया कि उक्त वाहन विभाग में ठेकेदार के तौर पर कार्य करने वाले एक खास व्यक्ति के हैं।जो मजबूर होकर साहब की जी हुजूरी के लिए हाज़िर करवाई गई हैं।जिसका किराये का पैसा विभाग निकालता है जो ख़र्च भी होता है वहीं जी हुजूरी के बदले ठेकेदार को मन माफ़िक कार्य मिलता रहता है,जिसके कारण वह सन्तुष्ट है।यही नहीं ,प्रदेश के कई जनपदों को जाने वाले लोग बड़ी संख्या में सवारियों से भरे दो पहिया,चार पहिया व सरकारी बसों के साथ कई विभागों के हाकिमों के वाहन जनपद मार्ग से इसी टूटी बाउंड्रीवाल वाली पुलिया से गुजरते हैं।इसी मार्ग पर लोक निर्माण विभाग कार्यालय के बमुश्किल दो किमी दूर जरौली शेरपुर रजबहा पुलिया की बाउंड्रीवाल वर्षों से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।जहां पर अग्निशमन विभाग का कार्यालय भी इसी पुलिया के ठीक सामने है।यदि रात में कोई वाहन इसी टूटी पुलिया की बाउंड्रीवाल से टकराने के साथ रजबहा में गिरे तो कितनी जनहानि होगी।इसका अंदाजा लगाना ज्यादा मुश्किल नहीं लेकिन जनहित के इस कार्य को करने के लिए विभागीय अधिकारियों को बजट का टोटा दिखाई देता है वहीं दूसरी ओर वगैर निविदा के बंदरबांट कर सड़क डामरीकरण के लिए किसी भी बजट का रोना नहीं है।जिस पर जानकारों का कहना है उक्त पुलिया की बाउंड्रीवाल निर्माण की जांच जनपद के कई उच्चाधिकारियों द्वारा किसी भी समय की जा सकती है।जो गुणवत्ता युक्त ही बनानी विभागीय मजबूरी होगी, शायद यही कारण है कि गुणवत्तायुक्त निर्माणकार्य कराने की अपेक्षा वह निर्माण कार्य ही न कराया जाय, जिसमें अल्प लाभ हो।कुल मिलाकर लोगों का यह मानना है कि तहसील मुख्यालय पर काबिज लोकनिर्माण विभाग उदासीन है।वहीं उक्त प्रकरण पर विभागीय जानकारों का कहना है कि विभाग के एक्सईएन को यह अधिकार दिया गया है कि आपात स्थिति में वह कुछ कार्य निजी अधिकार से करवा सकते हैं।लेकिन इस कार्यालय पर उक्त कई कार्य एक  ही ठेकेदार द्वारा कराया गया, जबकि विभाग में कार्यरत कई ठेकेदार नगर व तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पंजीकृत हैं।फिर एक पर ही मेहरबानी क्यों?इस पर अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।अगर लाटरी पद्धति का बहाना बनाकर उदाहरण देते हैं तो भी बात समझ से परे है कि एक ही व्यक्ति विशेष की लॉटरी हर बार कैसे निकलती है।
अब विभाग ने भ्रष्टाचार की सारी हदें उस समय पार कर दीं।जब जनपद के तेज तर्रार जिलाधिकारी पुलकित खरे ने गंगा स्नानार्थियों को सुव्यवस्थित यात्रा कराने के उद्देश्य से राजघाट का सर्वेक्षण कर छिबरामऊ से राजघाट तक सड़क बनाने का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से रखा।जिस पर वगैर किसी देरी के उक्त कार्य को पूर्ण करने के लिए मनपसंद व्यक्ति का नाम पीडब्ल्यूडी के अधिकारी द्वारा चुना गया।लेकिन हैरत की बात अन्य लोगों को उस समय लगी जब उक्त सड़क के कार्य हेतु किसी अनुभवी ठेकेदार को न देते हुए उस व्यक्ति को दिया गया, जिसे विभाग में कार्य करते हुए बमुश्किल छह महीने ही हुए हैं।लेकिन मोटा कमीशन व एक सजातीय वर्ग के अधिकारी के क्षेत्रीय रिश्तेदार की मध्यस्थता के कारण यह ठेकेदार इसी तरह कार्य करता रहेगा। ऐसा लोगों का आरोप है।अगर पीडब्ल्यूडी के कारनामे इसी प्रकार चलते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब विभाग में पंजीकृत ठेकेदारों को कार्य करने हेतु धरना प्रदर्शन भी करना पड़ेगा।इसकी सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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