बृजनाथी सिंह और शैलेश कुमार हत्याकांड में पुलिस नहीं हुई गंभीर तो गवाह , अधिवक्ता के साथ हो सकती है घटना

 हत्या कांडों में शामिल अपराधियों का फैला है हाई नेटवर्क और कनेक्शन ,धमकी देने का आरोप

>> पीडि़त पक्ष वरीय पुलिस अधिकारियों एवं जिला प्रशासन से लगा रहें लगातार सुरक्षा की गुहार

>> जिलाधिकारी के कार्यालय में धूल फांक रहा है आर्म्स लाइसेंस का आवेदन

>> अधिवक्ता मणि भूषण सेंगर को भी मिल रहीं लगातार धमकी ,बॉडीगार्ड भी ले लिया गया वापस

रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) राजधानी में सुपारी किलर, हर एक व्यक्ति के हत्या का टेंडर लेने को तैयार हैं चाहें वह समाज के किसी वर्ग का ही क्यों न हो। उसका बस एक मकसद हैं रूपया पर काम, जो रूपये देगा उसका दुश्मन साफ । इसका जीता-जागता उदाहरण हैं ,पटना हाईकोर्ट के वकील जितेन्द्र सिंह हत्याकांड । जितेन्द्र सिंह का सुपारी उसकी पत्नी ,साला और परिचित लोगों ने देकर हत्या सुपारी किलर के माध्यम से करा दिया । इसी वर्ष पूर्व मेयर दीना गोप की हत्या एके 47 से कर दिया गया हैं ,इसमें भी सुपारी किलर का हाथ सामने आया हैं । रंगदारी के लिए नौबतपुर और बिहटा में कई कारोबारियों की हत्याएं हो चुकी हैं और अभी भी अपराधी सक्रिय हैं । कारोबारी ,समाजिक कार्यकर्ता ,डाक्टर ,अधिवक्ता ,पत्रकार ,प्रोफेसर सब अपराधी के टारगेट पर है। हत्या ,घटना के पूर्व पीडि़त पक्ष,पुलिस के समक्ष सुरक्षा की गुहार लगाते -लगाते थक जाता हैं और आखिर में वह अपराधियों के गोलियों का निशाना बन जाता हैं । घटना के बाद पुलिस कार्रवाई तो करती है लेकिन वह व्यक्ति जो पूर्व में सुरक्षा की गुहार लगा रहता है वह दूसरी दुनिया में जाने के बाद तो लौटकर नहीं आता । मारे गये लोजपा नेता बृजनाथी सिंह और बिल्डर शैलेश कुमार के पीडि़त परिवार ,घटना में शामिल अपराधियों से खतरा की आशंका जता सुरक्षा की गुहार पुलिस -प्रशासन से लगा रहें हैं । केस ट्रायल में हैं पीडि़त परिवार और  गवाहों को लगातार धमकियां मिल रहीं हैं लेकिन अनसुना किया जा रहा है जबतक की घटना नहीं हो जाएं। पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता मणी भूषण सेंगर भी लगातार खतरा की आशंका जता रहें हैं । पुलिस-प्रशासन का सुरक्षा देने में अपना बेहद चौंकाने वाला तर्क होता है की इनपर पूर्व में किसी तरह का खतरा नहीं हुआ हैं ।ऐसे  स्थिति में स्पष्ट हैं की अपराधियों ने जब तक आपके ऊपर हमला नहीं किया ,आपको किसी से कोई खतरा नहीं हैं । बच गये तो अपंग रहिएं, चल बसे तो फिर पुलिस कार्रवाई ।

बृजनाथी सिंह हत्याकांड के पीडि़त परिवार ने जताया खतरा

लोजपा नेता बृजनाथी सिंह हत्याकांड में अपराधियों ने अत्याधुनिक हथियार ए के 47 का इस्तेमाल किया था। गाड़ी को गोलियों से छलनी कर दिया था। हत्या के पीछे राजद पार्टी के संरक्षण प्राप्त अपराधियों का नाम सामने आया था। पुलिस ने घटना में शामिल मुख्य अपराधी सहित कई सुपारी किलर को गिरफ्तार किया था। हाईकोर्ट के आदेश पर पटना सीटी कोर्ट में डे-टू-डे ट्रायल चल रहा हैं । बृजनाथी सिंह के बेटे ,लोजपा आईटी सेल के प्रदेश अध्यक्ष इ. राकेश कुमार और इनकी मां ने पटना के एसएसपी को लिखित आवेदन ,दो दिन पूर्व दिया है की तारीख पर हत्याकांड में शामिल अपराधी कोर्ट में आते हैं ।इनसे जुड़े सैकड़ों संदिग्ध लोग रहते हैं । लगातार रेकी कर रहें है और अंगूली दिखाकर इशारा करते हैं । सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था नहीं की गयी तो किसी भी समय कोर्ट में अप्रिय घटना घट सकती हैं ।

शैलेश हत्याकांड के बाद दहशत में परिवार ,लगातार मिल रहीं धमकी

पांच वर्ष पूर्व पटना के प्रतिष्ठित बिल्डर शैलेश कुमार की हत्या अपराधियों ने कर दिया था। इस हत्या में बड़ी साजिश रची गयी थीं ।बड़े चेहरे बेनकाब होते लेकिन रसुखदारों के आगे नहीं चली । नामजद अभियुक्तों को पुलिस ने जांच में निर्दोष करार कर दिया । पुलिस ने घटना को अंजाम देने वाले 7 अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया । साजिश पुरी संपत्ति कब्जा करने की थीं लेकिन मृतक शैलेश की पत्नी अंजू कुमार ने कड़ा स्टेप लीं और न्याय के लिए जंग में कूद पड़ी। पटना कोर्ट ,एडीजी-13 में स्पीडी ट्रायल चल रहा हैं । तीन अपराधी जेल से छुटकर बाहर आ गये हैं । मृतक की पत्नी अंजू कुमार और गवाहों को जान मारने एवं केस उठाने की धमकी दिया जा रहा हैं । हिरासत और जेल से रहते हुये अपराधियों ने धमकी दिया है यहीं नहीं कोर्ट रूम में भी देख लेने की बात कहीं गयी हैं । यहाँ तक कहां गया है यह एक सरकारी बॉडीगार्ड जब नहीं रहेगा तो तुमको कौन बचाएंगा। जबकि पीडि़ता अपनी जान की सुरक्षा की कीमत के तौर पर बॉडीगार्ड के लिए प्रतिमाह 36 हजार रूपये मोटी रकम देती हैं । जबकि नियम यह कहता हैं की खतरा के मद्देनजर जब तक केस का ट्रायल चलता हैं वादी, गवाह को पर्याप्त सुरक्षा सरकार को नि: शुल्क देना हैं ।निजी सुरक्षा को लेकर महिला अंजू कुमार ने आर्म्स लाइसेंस के लिए आवेदन दी हैं लेकिन चार माह हो गये, आर्म्स कार्यालय से महज चार कदम चलकर  आवेदन डीएम के पास तक नहीं पहुंचा हैं ,पुलिस जांच प्रक्रिया तो अभी कोशो दूर हैं । पीडि़त अंजू कुमार और इस मामले के कई गवाह आज भी दहशत में जीने को मजबूर हैं ।

अधिवक्ता मणि भूषण सेंगर को मिला बॉडीगार्ड भी लिया गया छीन

पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता मणि भूषण सेंगर ,जनहित मामले को लेकर दर्जनों हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुके हैं । कई में भ्रष्टाचारियों एवं माफियाओं के गले फंसे हैं ।अभी भी जांच चल रहीं हैं ।खतरे के मद्देनजर ,इन्हें एक माह के लिए सरकारी बॉडीगार्ड मिला था। समय सीमा समाप्त होते ही बॉडीगार्ड वापस ले लिया गया हैं । सुरक्षा को लेकर अधिवक्ता ने डीजीपी को पत्र लिया हैं ।जांच प्रक्रिया पुरी होने के बाद सुरक्षा बैठक में यह कहं कर इनके आवेदन को खारिज कर दिया गया हैं की इनके साथ आज तक कोई भी घटना नहीं हुई हैं । जबकि रिपोर्ट में यह बताया गया हैं की इनपर किसी भी समय जानलेवा हमला हो सकता हैं ।
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