पांच साल में पहली बार मीडिया से रूबरू मोदी, नही दिया किसी प्रश्न का जवाब

अशोक सिंह विद्रोही/ कर्मबीर त्रिपाठी
नई दिल्ली। शुक्रवार को अंतिम दौर के चुनावी शोर थमने से चंद मिनटों पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान प्रेस से मुखातिब हुए। ठीक उसी वक्त कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपने पार्टी दफ्तर में पत्रकारों के जरिए मोदी पर सवालों की बौछार कर रहे थे।

चुनावी इतिहास में शायद पहली बार प्रचार अभियान थमने के साथ देश के दो प्रमुख दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों द्वारा इस तरह मीडिया का सहारा लिया गया है। बात अगर भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के पत्रकार वार्ता से शुरू की जाए, तो 5 साल में पहली बार पीएम मोदी ने किसी सियासी पत्रकार वार्ता में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। लेकिन पत्रकारों के सवाल पूछे जाने पर कहा कि जो पूछना है अध्यक्ष जो से पूछें।

राजनीतिक गलियारों में इसके सियासी मायने तलाशने की नूरा कुश्ती चालू है। विपक्षी दलों खासतौर पर काग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा पत्रकारों से दूर रहने के आरोपों से घिरे पीएम मोदी ने अंतिम दौर के मतदान से पहले मीडिया के बीच अपनी आमद दर्ज करा कर जनता के बीच संदेश देने की कोशिश की है।
तमाम बातूनी दिग्गज पत्रकारों के सवालिया अरमानो पर पानी फेरते हुए पीएम मोदी ने बिना किसी सवाल जवाब के पूर्ण बहुमत के साथ सरकार के दोबारा वापसी की बात कही। अतीत में पार्टी दफ्तर मे पत्रकारों के साथ बैठकर चाय पीने की बात के साथ मोदी ने पत्रकार वार्ता की शुरुआत की। चिर परिचित अंदाज में मोदी ने 17 मई को रोचक ढंग से सटोरियों के लिए अभिशाप वाला दिन बताया।

प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार किसी सियासी पत्रकार वार्ता के दौरान मोदी ने पिछले यूपीए सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अब इतना बड़ा चुनाव चल रहा है। दो चुनाव (2009 और 2014) ऐसे भी हुए कि आईपीएल मैचों को देश से बाहर ले जाना पड़ा था। आज जब सरकार सक्षम होती है तो रमजान, आईपीएल मैच, ईस्टर, हनुमान जयंती, रामजयंती, नवरात्रि, बच्चों के एग्जाम और चुनाव भी एक साथ होते हैं।

आम चुनाव पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि चुनाव शानदार रहा, एक सकारात्मक भाव से चुनाव हुआ। विपक्षी दलों को घेरते हुए मोदी ने एक बार फिर से मोदी सरकार के नारे के सहारे अंतिम दौर के मतदाताओं को साधने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पूर्ण बहुमत वाली सरकार पांच साल पूरे करके दोबारा जीतकर आए ये शायद देश में बहुत लंबे अर्से के बाद हो रहा है। ये अपने आप में बड़ी बात है।

चुनाव के दौरान सियासी सट्टेबाजी पर चुटकी लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 16 मई को पिछली बार रिजल्ट आया था और 17 मई को एक दुर्घटना हुई थी, 17 मई को सट्टाखोरों को मोदी की हाजिरी का बड़ा नुकसान हुआ था। सट्टा लगाने वाले तब सब डूब गये थे, यानी ईमानदारी की शुरुआत 17 मई 2014 को हो गई थी। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनना जनता ने तय कर लिया है। हमने संकल्प पत्र में देश को आगे ले जाने के लिए कई बातें कही हैं. जितना जल्दी होगा, उतना जल्दी नई सरकार अपना कार्यभार ग्रहण करेगी । एक के बाद एक करके निर्णय हम लेंगे। बंगाल में भाजपा के 80 कार्यकर्ता मारे गए हैं।हम तो पूरे देश में चुनाव लड़ रहे हैं, कहीं और हिंसा क्यों नहीं होती है। हमारे कारण हिंसा होती तो देश के हर हिस्से में होती। मीडिया को ममता जी से पूछना चाहिए कि वहीं ऐसा क्यों होता है’।

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