विचार मित्र

ओम बिरला राजनीति जिनके लिए सिर्फ समाजसेवा है

राजेश माहेश्वरी

किसी जमाने में राजनीति और समाजसेवा एक सिक्के के दो पहलू होते थे। बीच में कुछ समय ऐसा आया जब ये महसूस किया जाने लगा कि राजनीति और समाजसेवा में दूर-दूर तक कोई रिश्ता शेष नहीं है। लेकिन कुछ कर्मयोगी ऐसे भी धरती पर मौजूद हैं, जिनके लिए आज भी राजनीति का अर्थ सिर्फ और सिर्फ समाजसेवा ही है। जिन्होंने राजनीति को पुराने समाजसेवी स्वरूप को अब तक जिंदा रखा है। उन्हीं बिरले महानुभावों में से एक है, राजस्थान के कोटा-बूंदी संसदीय क्षेत्र से लगातार दूसरी बार भाजपा उम्मीदवार के रुप में सांसद चुने गये ओम बिरला।

बिड़ला की समाजसेवा से ओत-प्रोत राजनीति, सादगी, सहृदयता, करुणा, दयाभाव और जमीन से जुड़ी छवि ने ही उन्हें 17वीं लोकसभा के अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाया है। बिरला को मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, दोनों का करीबी माना जाता है। भारत के पहले लोकसभा अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर थे। अब तक 16 लोगों ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। भारत में 17वीं लोकसभा के लिए ओम बिरला को 17वां लोकसभा स्पीकर चुना गया है उन्होंने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन की जगह ली है।

बिड़ला को पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जाने वाले कामों के लिए भी जाना जाता है. ग्रीन कोटा मिशन के तहत उनके काम की काफी सराहना भी हुई थी। बिरला की इमेज काफी साफ सुथरी है। इसीलिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीजेपी की टॉप लीडरशिप तक उनकी पहुंच मानी जाती है। बिरला ने राजनीति का समाजसेवा का अपने संसदीय क्षेत्र में ‘प्रसादम’ और ‘परिधान’ नाम से सामाजिक संस्थाएं चलाते हैं जिनके माध्यम से जरूरतमंद लोगों को भोजन और कपड़े आदि प्रदान किये जाते हैं।

वह छात्र राजनीति से उभरे और वह 1979 में छात्र संघ के अध्यक्ष थे। बिरला ने 1987 से सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और वे भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रमुख पदों पर रहे। ओम बिरला ने 2003 में कोटा (दक्षिण) सीट से अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता। उन्हें 2008 में फिर से असेंबली चुनावों में जीत मिली और फिर वे 2013 में तीसरी बार विधायक बने। वह लोकसभा सदस्य के रूप में पहली बार 2014 में चुने गये और हाल ही में हुये आम चुनाव में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। उन्होंने कोटा-बूंदी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रामनारायण मीणा को 2.5 लाख से अधिक मतों से पराजित किया।

बिरला के लोकसभा स्पीकर चुने जाने के पीछे जो भी राजनीतिक कारण रहे हों, लेकिन एक महत्वपूर्ण वजह यह रही कि वे पिछली लोकसभा में एक सक्रिय सांसद की भूमिका में रहे। पार्लियामेंट में उनकी उपस्थिति 86 फीसदी रही। उन्होंने 671 सवाल पूछे, 163 डिबेट में हिस्सा लिया और 6 प्राइवेट मेंबर बिल लोकसभा में पेश किए। इससे पहले 1991 से 2003 तक वह भाजपा की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रमुख नेता के रूप में पहले संगठन की राजस्थान प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रहे और फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे। वाणिज्य में परास्नातक डिग्री प्राप्त बिरला, ऊर्जा मामलों पर संसद की स्थायी समिति के सदस्य रहे हैं। इसके अलावा वह याचिका समिति तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की परामर्श समिति के भी सदस्य रहे हैं।

वर्ष 2004 से 2008 तक राजस्थान सरकार में संसदीय सचिव रहते हुए बिरला ने गरीब, असहाय, गम्भीर रोगियों इत्यादि को राज्य सरकार से 50 लाख रुपये के लगभग आर्थिक सहायता दिलवाई। वहीं 15-16 अगस्त 2004 को कोटा नगर में आई भयंकर बाढ़ के दौरान दिन रात बाढ़ पीड़ितों के बीच में रहकर राहत दल का नेतृत्व करते हुए पीड़ितों को बचाने, उन्हें आवासीय, चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने में उन्होंने भरपूर मदद की। जिसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की गयी। विभिन्न स्वयं सेवी, सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से कैंसर रोगियों व थैलीसीमियां पीड़ितों की मदद करने में उनकी पहल और भागीदारी हमेशा चर्चा का विषय रही है। वहीं द्विव्यांगजनों को निःशुल्क ट्राई साईकिलें, मोट्राईज सायकल (बैटरी चलित) व्हील चेयर एवं श्रवण यन्त्र सहित आवश्यक सहयोगी उपकरण उन्होंने उपलब्ध करवाए हैं।

बढ़ते प्रदूषण एवं घटती हरियाली को रोकने हेतु कोटा शहर में लगभग एक लाख पेड़ लगाने के लिए वृहद् ‘‘ग्रीन कोटा अभियान’’ चलाया। अभियान के तहत विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक संस्थाओं एवं संगठनों के माध्यम से पार्कों, सार्वजनिक स्थानों पर पौधारोपण करने के साथ ही कोटा शहर के आवासीय क्षेत्रों में घर-घर जाकर निःशुल्क पौधा वितरण कर पौधारोपण करने हेतु लोगों को प्रेरित किया। वहीं धार्मिक महत्व वाले तुलसी का पौधा भी घर-घर वितरण किया गया।

इसके अलावा नेहरू युवा केन्द्र के माध्यम से सम्पूर्ण देश के ग्रामीण क्षेत्रों में खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन की वृहद् योजना बनाकर ग्रामीण प्रतिभाओं का विकास करने के अभियान का नेतृत्व उन्होंने किया है। राजस्थान के बारां जिले के सहरीया आदिवासी क्षेत्र में कुपोषण को समाप्त करने के कार्य का नेतृत्व किया। साथ ही क्षेत्र के लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया।26 जनवरी 2001 को गुजरात में आये भयंकर भूकम्प पीड़ितों की सहायतार्थ चिकित्सकों सहित लगभग 100 से अधिक स्वयंसेवकों के राहत दल का नेतृत्व करते हुए लगातार 10 दिनों तक दिन रात भूकम्प पीड़ितों की सहायता की तथा उन्हें खाद्य एवं चिकित्सा सामग्री वितरित की।

बिरला के सद्प्रयासों से ही शहर की कच्ची बस्तियों में अस्थाई निवास करने वाले घुमन्तु जाति एवं निर्धन परिवार के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने हेतु जन सहयोग से बस्ती में ही “मेरी पाठशाला” के नाम से टीन शेड़ में पोर्टबल स्कूल स्थापित हुआ है। ग्रामीण अंचल में कामकाजी एवं घरेलु महिलाओं को शिक्षित करने के लिए सी.एस.आर. योजना एवं सामाजिक सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ ज्ञान केन्द्रों की स्थापना कर मातृ शक्ति को शिक्षित किया जा रहा है।

वर्ष 2014 में ओला वृष्टि के कारण किसानों की तैयार फसल खराब होने के कारण हताशा एवं आर्थिक परेशानियों से घिरे धरती पुत्रों को जन सहयोग से सबल देने हेतु एक मुठ्ठी अन्न राहत अभियान चलाया गया। निर्धन, असहाय एवं जरूरतमन्द व्यक्तियों को निःशुल्क उपचार एवं दवाईयां उपलब्ध कराने हेतु जनसहयोग से ”मेडिसिन बैंक“ प्रकल्प की स्थापना की गई। वहीं आमजन में विशेष रूप से युवा पीढी में विस्मृत हो रही राष्ट्रीय भावना को जागृत करने, शहीदों के बलिदान को सदैव याद रखने व नई पीढी में राष्ट्रीय चरित्र निर्माण की भावना स्थापित करने के उद्देश्य से स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र भक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम ’’आजादी के स्वर’’ का ऐतिहासिक आयोजन वर्ष 2006 से प्रारम्भ किया जो निरन्तर प्रति वर्ष कोटा शहर में एक महोत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

बिरला जी का मानना है कि वरिष्ठजन हमारे अखण्ड भारत की नीवं है। बुजुर्गों के कार्यानुभव एवं सामाजिक समर्पण के आधार पर कोटा-बून्दी जिले में वरिष्ठजन सम्मान समारोह आयोजन किये गये । आयोजनों के माध्यम से बुजुर्गां का सम्मान करने के साथ ही उनके कार्यानुभव के आधार पर शहर के विकास हेतु सुझाव लेकर शहर के विकास को नई दिशा देने का प्रयास। वर्ष 2013 में उत्तराखण्ड की केदारनाथ घाटी में बादल फटने से आई भारी विपदा के बीच प्रभावित लोगो को तक राहत पहुंचाने के लिए कोटा राहत दल का गठन कर राहत सामग्री उत्तराखण्ड के वंचित पर्यटकों तथा प्रभावित इलाकों में बंटवायी।

बिरला ने गरीब बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिये बुक बैंक की स्थापना की। शहर के स्कूल व काॅलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों से आग्रह किया गया कि सत्र पूर्ण होने के बाद वे अपनी पुस्तकों को बुक बैंक में डोनेट करें, ताकि इन पुस्तकों को अध्ययन के लिए जरूरतमंद विद्यार्थियों को निषुल्क उपलब्ध कराया जा सके। प्रति वर्श बड़ी संख्या में विद्यार्थी बुक बैंक से लाभान्वित हो रहे हैं।

गरीब व वंचित बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिये बाल दिवस 14 नवम्बर को शहर की कच्ची बस्तियों एवं मजदूर तबके के लोगो के अस्थाई निवास वाले चिन्हित क्षेत्रोें में पहुंचकर बच्चों को वस्त्र, जूते-चप्पल, टाॅफी-चाॅकलेट व उनकी आवश्यकताओं के अनुसार वस्तुओं का वितरण कर मुरझाये हुये चेहरों पर खुशियां लाने का बड़ा काम बिरला ने किया। सच्चे अर्थों में बिरला जी राजनीति को समाजसेवा ही मानते हैं। ऐसे में जनभागीदारी जोड़कर छोटे-छोटे प्रयासो से समाज के वंचित वर्ग को खुशियां देने के प्रयास लगातार जारी है। एक विशुद्ध समाजसेवी राजनेता दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की लोकसभ का अध्यक्ष बना है। ऐसे में सारे देश को उनसे आशएं एवं उम्मीदें हैं कि वो देश के कोने-कोने में रहने वाले आम भारतीय की आवाज बनकर उभरेंगे।

loading...
Loading...

Related Articles