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अमेरिका के नेशनल सिक्युरिटी: नॉर्थ कोरिया वह अपने एटमी हथियारों का विकास चाहते…

वॉशिंगटन। नॉर्थ कोरिया इस बात से भी डर रहा है कि ट्रम्प उस पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं। नॉर्थ कोरिया के पास कुछ सीमित चीजें ही हैं। वह अपने न्यूक्लियर हथियारों को अमेरिका पर इस्तेमाल करना चाहता है। अपने इस मकसद को पूरा करने के लिए वह बातचीत के जरिए कुछ वक्त चाहता है। ऐसा वह बीते 25 साल से कर रहा है। नॉर्थ कोरिया ने अमेरिका को बातचीत की पेशकश की है लेकिन ट्रम्प एडमिनिस्ट्रेशन इसे अलग तरह से देख रहा है। हाल ही में अमेरिका के नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर बनाए गए जॉन बोल्टन ने कहा नॉर्थ कोरिया ने बात करने का न्योता भेजा है। इस दौरान वह अपने एटमी हथियारों का विकास करना चाहता है।

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नॉर्थ कोरिया के मकसद का पता लगाना जरूरी
बोल्टन ने एक रेडियो को दिए इंटरव्यू में कहा मुझे लगता है कि नॉर्थ कोरिया के मकसद का पता लगाना जरूरी है। नॉर्थ कोरिया व्हाइट हाउस के नए राष्ट्रपति से डर रहा है। उसे पता है कि अब जो प्रेसिडेंट (डोनाल्ड ट्रम्प) हैं वे बराक ओबामा से काफी अलग हैं।

नॉर्थ कोरिया ने यूएस को दिया था बातचीत का न्योता
मार्च में ही नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने ट्रम्प को बातचीत का न्योता भेजा था जिसे यूएस राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया था। ट्रम्प ने उन से मई में मिलने की सहमति भी जताई थी।
नॉर्थ कोरिया के हवाले से साउथ कोरिया ने कहा था कि उन एटमी टेस्ट बंद करने या परमाणु अप्रसार करने के लिए प्रतिबद्ध (कमिटेड) हैं। साउथ कोरिया ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
व्हाइट हाउस की स्पोक्सवुमन सारा सेंडर्स ने कहा था ट्रम्प ने किम जोंग उन का इनविटेशन स्वीकार कर लिया है। दोनों नेताओं की मुलाकात नॉर्थ कोरिया में ही तय वक्त पर होगी।
हम चाहते हैं कि नॉर्थ कोरिया एटमी प्रोग्राम बंद करे। इसी के चलते उस पर सेंक्शंस लगाए गए हैं और दबाव डाला जा रहा है।

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कौन हैं जॉन बोल्टन?
24 मार्च को बोल्टन को अमेरिका का नया एनएसए बनाया गया है। वे 9 मार्च को पदभार ग्रहण करेंगे। ट्रम्प ने खुद ट्वीट करके इस बात की जानकारी दी थी।
वे यूएन में अमेरिका के एम्बेसडर रह चुके हैं। बोल्टन पाकिस्तान नॉर्थ कोरिया और ईरान के प्रति अपने तल्ख रुख के लिए भी जाने जाते हैं।
पिछले साल उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा था कि अगर पाकिस्तान के परमाणु हथियार आतंकियों के हाथ में पड़ जाते हैं तो उसकी स्थिति नशे जैसी हालत वाले नॉर्थ कोरिया और ईरान जैसी होगी।
बोल्टन नॉर्थ कोरिया और ईरान में सैन्य कार्रवाई की बात कह चुके हैं।
2005-06 में बोल्टन यूएन में अमेरिका के एम्बेसडर रहे। 2001-05 के दौरान वे विदेश मंत्रालय के आर्म्स कंट्रोल एंड इंटरनेशनल सिक्युरिटी विभाग में मंत्री रहे।

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