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Saturday, October 16, 2021 at 11:45 AM

आज भी यहां पर गूंजती है दुर्गा सप्तशती की ध्वनि . . .

उन्नाव ।  मां चंडिका देवी धाम बक्सर में दुर्गा सप्तशती की आज भी ध्वनि गूंजती है। बक्सर धाम मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन तट पर स्थित है सिद्ध पीठ मां चंद्रिका देवी मंदिर क्षेत्र व दूरदराज के  जनपद के लोगों के लिए अटूट विश्वास व आस्था का केंद्र बिंदु है। सुदूर ग्रामीण व जनपद से आने वाले श्रद्धालु पतित, पावनी मां गंगा के प्रवाहित जल में स्नान करने के बाद मां चंद्रिका व अंबिका देवी के दर्शन कर, आत्म सुख की अनुभूति करते हैं। मान्यता है कि मां चंद्रिका धाम में दो विग्रह स्थापित है जिन्हें हम चंद्रिका व अंबिका देवी के रूप में जाना जाता है। इन दोनों विग्रह का मुख गंगा की ओर है।

यहां गंगा स्नान एवं माता जी के दर्शन करने मात्र से ही श्रद्धालु, शारीरिक व मानसिक रूप से छुटकारा पा लेते हैं। यही नहीं माता चंद्रिका व अंबिका देवी के चरणों में सच्चे मन से माथा टेकने के बाद उसकी मन की मुरादे अवश्य पूरी होती हैं। वैसे माता के दरबार में हमेशा श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बनी रहती है। सिद्ध पीठ मां चंद्रिका देवी की महिमा पुराणों में भी वर्णित है जिसके अनुसार यहां मेघा, राजा सूरथ, और समाधि नाम ने मां दुर्गा के महत्त्व का ज्ञान दिया था। परम तपस्वी बकरे ऋषि का आश्रम भी यही था। जिनके नाम से क्षेत्र का नाम बक्सर पड़ा। महाभारत के समय भगवान श्री कृष्ण ने अपने भाई बलराम के साथ यहां मां चंद्रिका धाम की स्थापना की थी। मां चंद्रिका व अंबिका देवी के रूप में मां भक्तों को दर्शन देती है। उल्लेखनीय बात तो यह है कि बक्सर में मां गंगा उत्तर की ओर बहती है इसलिए उन्हेंउत्तरवाहिनी भी कहा जाता है। जिससे इस स्थान को काशी के समान पवित्र माना जाता है। माता के धाम पर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग ही एक मात्र रास्ता है। मां चंद्रिका अंबिका देवी धाम तक पहुंचने के लिए राजधानी लखनऊ व जिला मुख्यालय से बक्सर चंडिका देवी धाम के लिए प्रतिदिन बसों का संचालन होता है। जो उन्नाव से अचलगंज लाल कुआं भगवंत नगर होते हुए मंदिर तक पहुंची हैं जबकि लखनऊ से करीब मंदिर की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। इसी मार्ग के रास्ते मोहनलालगंज, मौरावा, बिहार, भगवंत नगर, ऊंचगांव होते हुए मां के दरबार बक्सर धाम में पहुंचा जा सकता है।