उत्तर प्रदेश

हरदोई-गणतंत्र दिवस पर अस्थायी गौ-शाला संरक्षण केन्द्र दिखा गौ-कैद-शाला

पूज्य गौवंश के मातहत जानवरों से भी कर रहे बुरा बर्ताव

मात्र दस दिनों में ही प्रदेश मुखिया के निर्देशों की पिटती लकीर दिख रही गौशाला

पिहानी/हरदोई।गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक नजर पिहानी पालिका की ओर से अभी हाल ही में शासनादेशों के अनुपालन में कांजी हाउस में स्थापित गौवंश संरक्षण केंद्र पर पड़ी।जहां गौवंश स्थल पानी से लबालब भरा हुआ दिखाई पड़ा और वहां उपस्थित सभी गायों की दयनीय स्थिति देखकर लेखनी चलाना हमारी मजबूरी हो गया।यहां स्थित गौवंशों की स्थिति बद से बदतर नजर आई और वे भूखे पेट डंगर हालत में दिखाई पड़े।हल्की-फुल्की बारिश के मौसम ने इस अस्थाई गौ संरक्षण केन्द्र में अव्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है।जहां न तो गायों के बैठने का पर्याप्त सूखा स्थान दिखाई पड़ा और न ही उनके लिए पर्याप्त पशुआहार का इंतजाम नजर आया।स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदेश मुखिया के शासनादेशों के कड़े निर्देशों के अनुपालन में मात्र लकीर पीटने की नियत से आवारा घूमते अन्ना गौवंश पशुओं को एक नजर में जितने पाए पकड़ लाए की मुहिम पालिका लोकसेवकों ने चलाकर जिलाधिकारी से लेकर शासन स्तर तक डिजिटल तकनीक सुविधा से अपना नाम तो गौ-संरक्षण स्थापना केन्द्र के रुप में दर्शाकर वाहवाही लूट ली।मगर वास्तविकता कुछ अलग ही संदेश बयान कर रही है।अगर गौरतलब करें तो हकीकत ये है कि प्रदेश के मुखिया योगी आदित्य नाथ भले ही पूज्य गौवंश की रक्षा के लिए कितना भी सराहनीय योगदान व कुशल कार्य करें मगर उनके ही मातहत जानवरों से बुरा बर्ताव करने से कतई चूक नहीं रहे हैं।यहां बीते दिनों दिनांक 16 जनवरी को पालिकाध्यक्ष के दिशा-निर्देशन में कोतवाली पिहानी के निकट स्थित पुराने कांजी हाउस का जीर्णोद्धार कराकर अस्थायी गौवंश आश्रय स्थल का शुभारंभ पालिका प्रशासक अधिशाषी अधिकारी पीएन दीक्षित ने फीता काटकर किया था।आम जनमानस से अस्थायी गौवंश आश्रय स्थल में अपना सक्रिय योगदान देने की अपील भी की थी।मगर गणतंत्र दिवस के शुभ दिवस पर ये अस्थाई गौशाला गौ-संरक्षण अथवा गौ सेवा केन्द्र गौ-कैद-शाला बना नजर आया।यहां उनके खान-पान,पालन-पोषण और रहन-सहन की सारी व्यवस्थाएं चौपट नजर आईं।यदि समय रहते इन अन्ना गायों को पेट भर पशुआहार न मिला या रहन-सहन में बदलाव करके कोई स्थायी पुख्ता इन्तजाम न किए गए तो प्रणाम बद् से भी बदतर साबित होंगे।वो दिन दूर नहीं जब ये पशु बीमार होकर बीमारी का दंश झेलते-झेलते मौत के घाट पहुंच जाएंगी और प्रशासनिक अमले के जिम्मेदार लोक सेवक यूं ही लकीर पीटते रहेंगे।

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