जब गैस बढ़ने लगे पेट में तो करें ये रामबाण उपाय

कम से कम एक चौथाई लोग आज पेट में गैस की समस्या से त्रास्त नजर आते हैं। कुछ लोग तो यहां तक मानते हैं कि गैस अत्यधिक चढ़ जाए तो वह दिल और दिमाग तक बढ़ जाती है जो बेहद खतरनाक होती है। यह एक मिथ्या धारणा है। गैस न दिल को चढ़ती है न दिमाग को। एक रोचक तथ्य यह है कि गैस अल्प मात्रा में हर किसी के पेट में हरदम रहती है। हां, गैस के मरीजों के पेट में ज्यादा रहती है। गैस के मरीजों को यह समस्या भरे पेट भी रहती है और खाली पेट भी।

गैस की समस्या आम हो गई है। यह जानलेवा रोग कतई नहीं है मगर इससे परेशानी बहुत होती है। खान-पान में अनियमितताएं, अशुद्ध, गरिष्ठ, अधिक मिर्च मसालेदार खाद्य, स्टार्च या मद्यपान जैसे पदार्थों के अधिक सेवन से गैस हो सकती है। एसिडिटी बढ़ने, अल्सर अथवा डायरिया होने पर भी गैस बनती है। जो लोग भोजन ठीक से चबा कर नहीं खाते, जो लोग भोजन करते समय खूब पानी पीते हैं, उन्हें भी गैस की समस्या पैदा हो जाती है।

भोजन करते समय ज्यादा वायु पेट में चली जाए, भोजन अधपका खाया जाए, कार्बोनेटेड पदार्थों का अधिक सेवन किया जाए, अधिक चाय अथवा कॉफी पीने की आदत हो, पौष्टिक पदार्थों के सेवन के बिना शराब पीने की आदत हो, कच्ची चीजें (जैसे खीरा, ककड़ी आदि सलाद वाले पदार्थ) ज्यादा खाए जाएं तो भी गैस की परेशानी पैदा हो सकती है। पेट में एमियोबॉएसिस होने से गैस बनती है। तले-भुने, अधिक तेज नमक मसाले युक्त पदार्थ खाना भी गैस बनाता है।

गैस के शिकार को खट्टी डकारें आ सकती हैं। कभी-कभी खाली पेट से भी गैस बढ़ने लगती है कि पेट गुब्बारे की मानिंद फूल रहा है। गैस के मरीज को पेट में चुभन, दर्द या जलन का अहसास भी हो सकता है। मुंह में खट्टा-नमकीन सा पानी आ सकता है। इस तरह से गैस का बढ़ना कई लक्षणों में प्रकट हो सकता है।

गैस के अनेक उपचार हैं। यूनानी, आयुर्वेदिक, एलोपैथिक और होम्योपैथिक गैस रोधी दवाएं उपलब्ध हैं परंतु कोई भी ऐसी कारगर दवा नहीं है जो गैस की बीमारी का स्थाई रूप से अंत कर सके। ये गैस के अस्थाई समाधान हैं। उचित खान-पान और परहेज ही गैस से छुटकारा दिला सकता है। गैस की समस्या जब विकराल हो तो ही दवा ली जाए लेकिन परहेज को हाशिये पर न डाला जाए।

खाना स्वच्छ और शीघ्र पचने वाला हो। उसमें अत्यधिक चिकनाई, मसालों, तेज मिर्च का प्रयोग न किया जाए।

गैस के मरीज पौष्टिक-संतुलित भोजन करें मगर पेट पूरी तरह भरें नहीं। आवश्यकता का तीन चौथाई ही खाएं।

खाना तसल्ली से, बिना बोले, चबा-चबाकर खाएं ताकि लार ज्यादा भोजन के साथ पेट में जाए। यह लार भोजन शीघ्र पचाने में सहायक होती है और आंतों को सेहतमंद रखने में भी। भोजन के प्रारंभ, मध्य अथवा अंत में पानी या कोई तरल पदार्थ का सेवन न करें क्योंकि तरल पदार्थ लार को भोजन से पृथक कर देती है जिससे खाना देर से पचता है और गैस बनने का खतरा बढ़ जाता है। पानी आदि भोजन के आधा घंटा बाद ही पिएं।

चाय कम पिएं। खाली पेट तो कदापि न पिएं। जब भी चाय पिएं,

साथ में खाने के लिए कुछ पौष्टिक पदार्थ हो।

यदि मद्यपान की आदत हो तो मात्रा घटाएं और पौष्टिक पदार्थ के साथ ही सेवन करें। धूम्रपान, तंबाकू या गुटखा सेवन भी अल्प मात्रा में ही करें।

प्रातः खुले में व्यायाम करें। गैस के मरीजों को वज्रासन और शलभासन विशेष रूप से लाभकारी हैं।

कच्चा प्याज, फूलगोभी, मटर, उबले चने गैस बनाते हैं। इनसे बचें। बाजार के चाट-पकौड़े, भुट्टे, ढाबों के भोजन से बचें क्योंकि न सिर्फ इनमें खटाई, तेज मिर्च मसालों का प्रयोग होता है बल्कि ये अशुद्ध (संक्रमित) भी हो सकते हैं।

जब गैस ज्यादा हो जाए तो जरा सी हींग तवे पर भून कर गुनगुने पानी के साथ लें। पुदीने के पत्तों का ताजा रस एक चम्मच निकालकर मामूली से काले नमक के साथ आधा कप पानी में मिलाकर पिएं। लहसुन के एक दो दाने घी में तलकर चबाएं। मूली के ताजे पत्ते का रस पानी में मिलाकर पिएं।

अजवायन को तवे पर हल्का सा भून कर पीस लें। इसमें मामूली सा नमक मिलाकर गुनगुने पानी के साथ लें। साबुत हल्दी आंच पर भूनकर नमक के साथ पीसकर आधा चम्मच हल्दी पानी के साथ लेने से भी गैस पर काबू पाया जा सकता है।

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