एक्सप्रेस-वे पर तेजी से ‘सिक्योरिटी होमवर्क’ शुरू!

दर्दनाक बस हादसा होने के बाद जागा सरकारी तंत्र

रोडवेज, परिवहन, टैफिक और पुलिस विभाग के आला अफसर अहम इनपुट देने-लेने में जुटे

सीसी कैमरा, पेट्रोलिंग, ई-चालान, रोड इंजीनियरिंग, एम्बुलेंस सेवा को लेकर उठे प्रश्न

आगरा व यमुना एक्सप्रेस वे पर दो साल के अंदर 17 छोटी-बड़ी बस दुर्घटनायें हुर्इं

लखनऊ। यूपी रोडवेज की जनरथ बस क्या दुर्घटनाग्रस्त हुई…आगरा और यमुना एक्सप्रेस-वे जैसे प्रमुख हाईवे की सुरक्षा व संरक्षा तंत्र की वर्तमान व्यवस्था को लेकर कई विभागों ने एक तरह से ‘सिक्योरिटी होमवर्क’ करना शुरू कर दिया है। आलम यह है कि अभी तक रोड सेफ्टी जैसे अहम मुद्दे को लेकर जो रोडवेज, परिवहन और टैफिक विभागों के बीच उतना बेहतर समन्वय या तालमेल नहीं दिखता था, वही तीनों विभाग अब एक्सप्रेस वे की सुरक्षा व्यवस्था और साथ ही साथ खामियों को लेकर भी आपस में अहम सूचनाओं और जानकारियों का सहजता के साथ आदान-प्रदान कर रहे हैं।

मसलन, एक्सप्रेस वे पर कितने सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, पेट्रोलिंग कैसे हो रही है, ई-चालान व लाइटिंग की क्या व्यवस्था है, रोड इंजीनियरिंग कैसा है, एम्बुलेंस कितने हैं, रोड पर रंबल स्ट्रिप लगे हैं कि नहीं, जहां बस हादसा हुआ आसपास कितने जनपदों का लोकेशन है…ऐसे अति महत्वपूर्ण सूचनाओं को एकत्रित करने में ये सभी विभागों के आला अधिकारी माथापच्ची कर रहे हैं। आगरा और यमुना एक्सप्रेस वे की बात करें तो बीते दो साल में 17 छोटी-बड़ी बस दुर्घटनायें हुर्इं जिसमें रोडवेज के अलावा अनुबंधित बसें भी शामिल हैं।

बता दें कि सोमवार तड़के यूपी रोडवेज की एसी जनरथ बस यमुना एक्सप्रेस-वे पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी जिसमें ड्राईवर समेत 29 यात्रियों की मौत हो गई जबकि तकरीबन दो दर्जन मुसाफिर घायल हैं। इस वीभत्स बस हादसे के बाद से ही योगी सरकार एक्सप्रेस-वे पर वर्तमान में चल रहे सिक्योरिटी सिस्टम को लेकर सजग हुई। यही नहीं इसी क्रम में शासन द्वारा कभी रोडवेज, कभी परिवहन तो कभी टैफिक और पुलिस डिपार्टमेंट से एक्सप्रेस वे पर अब तक हुई सड़क दुर्घटना, रोड संरचना, रोड सेफ्टी आडिट, हाईवे पेट्रोलिंग से जुडे आंकड़े मांगे जा रहे हैं। ऐसे में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उक्त प्रकरण का संज्ञान लेने के बाद इन विभागों की सक्रियता आम दिनों की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ गई है।

वहीं परिवहन विभाग के जानकारों की मानें तो यमुना एक्सप्रेस-वे जिस पर यह भीषण बस हादसा घटित हुआ है, उसके सेफ्टी आडिट का काम दिल्ली आईआईटी की एक महिला प्रोफेसर जोकि सिविल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञ हैं, उनकी अगुवाई में सौंपा गया था। उन महिला प्रोफेसर की टीम ने एक्सप्रेस वे के सेफ्टी आडिट की क्या रिपोर्ट दी और उसे ग्रीन सिग्नल दिया तो किन आधारों पर…ट्रांसपोर्ट कमिश्नर कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी इन अहम बिंदुओं को लेकर लगातार उनसे संपर्क करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

बसों में चेक किये जायेंगे स्पीड लिमिट डिवाइस

लखनऊ। रोडवेज बसों की आन रोड गति को नियंत्रित रखने और उसका आनलाइन फीडबैक रखने के उद्देश्य से हर श्रेणी के बसों में स्पीड लिमिट डिवाइस लगाये जाने के निर्देश दिये गये थे। लेकिन सुरक्षा तंत्र को पुख्ता करने के इस अहम कार्य से बेपरवाह परिवहन निगम की नींद अभी तक नहीं टूटी थी। एक्सप्रेस वे पर जब दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से जनरथ बस दुर्घटनाग्रस्त हुई, 29 बेकसूर यात्री काल के गाल में समां गये और कई घायल अभी भी जिंदगी और मौत के बीच अपनी सांसे गिन रहे हैं…तब जाकर रोडवेज मुख्यालय की कुम्भकर्णी नींद टूटी। मंगलवार को रोडवेज के मुख्य महाप्रबंधक (तकनीकी) जयदीप वर्मा ने निर्देश दिये कि सभी बसों में स्पीड लिमिट डिवाइस को अतिशीघ्र चेक कराया जाये। गौर हो कि दो साल पहले जारी इस निर्देश के तहत कुछ बसों में एसएलडी लगवाने की पहल शुरू हुई, मगर बाद में मामला ठप पड़ गया। हालांकि 2017 के बाद से निगम के बेडे में जो भी बसें शामिल हो रही हैं, उसमें एसएलडी सिस्टम साथ में लगा आ रहा है। जबकि एक्सप्रेस वे पर इस समय आधा दर्जन जनरथ बसों का संचालन हो रहा है।

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