धर्म - अध्यात्म

ये है देश के 3 बड़े मंदिर, जहां होती है नागदेवता की पूजा

इस साल नाग पंचमी 5 अगस्त को है। सावन में होने की वजह से इसका महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। मान्यता है कि यदि नाग देवता को नाग पंचमी के दिन दूध पिलाया जाए तो इससे उनका आर्शीवाद बना रहता है। इसके साथ ही नागदंश से भी बचाव होगा। हिन्दू धर्म की मान्यता के मुताबिक नागदेवता की पूजा से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं। नागपंचमी के अवसर पर सपेरों को सर्प दर्शन करवाते हुए आसानी से देखा जा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नागदेवता के कई मंदिर हैं, जो कि बहुत खास हैं। पढ़िए कुछ विशेष मंदिरों के बारे में…

मन्नारसला श्रीनागराज मंदिर –

मन्नारसला श्रीनागराज मंदिर केरल के अलप्पुझा जिले के हरीपद गांव में है। यह मंदिर बहुत घनें जंगल के बीच स्थित है। जब आप इस मंदिर की ओर बढ़ेंगे तो रास्ते में पेड़ों पर 30000 से ज्यादा सापों की आकृति बनी हुई दिखाई देगी। यहां नागदेवता के साथ उनकी पत्नी नागयक्षी की प्रतिमा भी मौजूद है।

नागचंद्रेश्वर मंदिर –

उज्जैन के महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर अद्भुत है। यहां 11वीं शताब्दी की प्रतिमा स्थापित है। जिसमें नाग देवता अपना फन फैलाए हुए हैं। खास बात यह है कि इस फन फैलाए हुए आसन पर भगवान शिव के साथ मां पार्वती विराजमान हैं। इस प्रतिमा को नेपाल से लाया गया था। दिलचस्प बात यह भी है कि इस मंदिर को सिर्फ नागपंचमी के दिन खोला जाता है।

धौलीनाग मंदिर –

उत्तराखण्ड राज्य के बागेश्वर जनपद में स्थित धौलीनाग मंदिर बहुत ही खास है। इस मंदिर में रोज नागदेवता की पूजा होती है। इसकी स्थापना विजयपुर के पास एक पहाड़ी की चोटी पर हुई थी। इस मंदिर में नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि यहां नागपंचमी के दिन मेला लगता है।

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