फोटो कैमरे से नहीं बल्कि दिमाग से खींची जाती है : अखिलेश

लखनऊ। ‘‘दि यूथ फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन‘‘ द्वारा आयोजित सामूहिक राष्ट्रीय फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन कलास्रोत आर्ट गैलरी, अलीगंज, लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किया। इस अवसर पर अखिलेश ने कहा कि फोटो कैमरे से नहीं बल्कि दिमाग से खींची जाती हैं क्योंकि जरूरी नहीं कि जिसके पास मंहगा कैमरा हो वो अच्छी तस्वीर भी खींच सकता है। एक अच्छी तस्वीर क्लिक करने के लिए अच्छे विजन की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि आज फोटो जर्नलिस्ट का वही सम्मान है जो लेखक-पत्रकार का होता है। फोटो कला जीवंत है। अब नई तकनीक का प्रयोग भी होने लगा है। मोबाइल और कैमरा में भी प्रतियोगिता रहती है। परन्तु मौसम की मार, असुविधा, अवरोध और कई बार तो जीवन का जोखिम उठाकर भी इस कला का सफर जारी रहता है। कभी एक तस्वीर ही उन्हें बुलंदियों पर भी पहुंचा देती है।
अखिलेश ने कहा कि हर कोई यात्रा से सीखता है। हर परिस्थिति से जूझते हुए फोटो जर्नलिस्ट घटना को साकार करता है। अब जमाना काफी बदला है तो फोटो लेने से पहले सोचना भी पड़ता है। राजनीति में तो फोटोग्राफी का काफी महत्व होता है। समाज की घटनाओं का प्रदर्शन करने में फोटोजर्नलिस्ट को कठिनाइयां भी आती हैं। इस सबके बावजूद वह जिस ईमानदारी और निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाता है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार बनी तो फिर उन्हें सम्मान और यशभारती भी मिलेगा।
अखिलेश ने कहा कि फोटो प्रदर्शनी में कुल 91 भारतीय छायाकारों के चित्र थे वहीं 4 विदेशी फोटोग्राफरों ने भी रूस और मिस्र से चित्र भेजे थे। प्रदर्शनी में वन्य जीवन, पक्षी संसार, प्राकृतिक दृश्य, स्मारक और राजनीतिक घटनाचक्र के भी सुंदर चित्र प्रदर्शित थे। दि यूथ फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष साहिल सिद्दीकी ने श्री यादव का स्वागत किया और बताया कि यह पांचवीं प्रदर्शनी है। संरक्षक सर्वेश गोयल ने कहा कि श्री अखिलेश जी का व्यक्तित्व सहज, सरल है किन्तु शक्तिशाली है। कार्यक्रम का संचालन डॉ0 अंकिता पाण्डेय ने किया।
दि यूथ फोटो जर्नलिस्ट एसोसिएशन की ओर से आज गोविन्दा गोल्डेन क्लिक अवार्ड सुनील रैदास को दिया गया। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ छायाकारों में विनय पाण्डेय, मोहम्मद अशफाक, विभू गुप्ता तथा राज कुमार बाजपेयी को सम्मानित किया गया। सुमित कुमार को विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।

=>