यूपी: एम्बुलेंस कर्मचारियों ने किया चक्काजाम, संकट में मरीजों की जान

लखनऊ। अगर आपका कोई परिचित या परिवार का सदस्य गंभीर बीमार है और आप अस्पताल ले जाने का प्रयास कर रहे हैं तो सरकारी एंबुलेंस का इंतजार न करें। क्योंकि एंबुलेंस चालकों ने वेतन न मिलने से नाराज होकर एनआरएचएम के तहत चल रही एंबुलेंस आपातकालीन सेवा ठप कर दी है। चक्का जाम होने से मरीजों की परेशानियां बढ़ गई हैं। निजी एंबुलेंस संचालक मनमाने रेट ले रहे हैं। ऐसे में गरीब परिवार के मरीज के लिए अस्पताल पहुंचना काफी दिक्कत भरा है। यूपी के सभी जिलों में नाराज कर्मचारियों ने 108 व 102 समेत सभी सरकारी एंबुलेंस वाहन खड़ी कर दी है। इससे मरीजों की जान पर संकट के बदल छाये हुए हैं।

प्रदर्शनकारी एंबुलेंस चालकों का कहना है कि करीब ढ़ाई से तीन महीने से उन्हें वेतन नहीं मिला है। उनका कहना है कि उन्हें जो राशि वेतन के रूप में दी जा रही है, वह काफी कम है। इससे परिवार का खर्च चलाना काफी मुश्किल है। इसमें वृद्धि की मांग काफी समय से की जा रही है। लेकिन वेतन नहीं बढ़ाया जा रहा है। कर्मचारियों ने वेतन बढ़ाने की भी मांग की है। आरोप है कि संबंधित अधिकारी आश्वासन भी देते रहे, लेकिन वेतन में वृद्ध नहीं की गई। वेतन वृद्धि की मांग को अनदेखा किया जा रहा है। इसके चलते चेतावनी भी दी गई, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया। इसके चलते हड़ताल का कदम उठाना पड़ा है।

यूपी भर में हड़ताल के बाद कर्मचारियों ने एम्बुलेंस गाड़ियों को अस्पतालों और मैदानों में खड़ा कर दिया है। अलीगढ़ में 102, 108 व एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट की 80 एंबुलेंस हैं। सुबह चालक अस्पताल तो पहुंचे लेकिन एंबुलेंस खड़ी रखीं। बाद में चालक दीनदयाल अस्पताल में एकत्रित हुए, यहां धरना शुरू कर दिया गया। सीतापुर में जिलेभर की एंबुलेंस नगर के आरएमपी ग्राउंड पर खड़ी रहीं। जिले भर में कुल 93 एंबुलेंस एन आर एच एम की है। इनमें से 86 एंबुलेंस आरएमपी मैदान पर खड़ी हैं जबकि 7 एंबुलेंस खराब पड़ी हैं। हड़ताल के कारण बरेली, सीतापुर, बदांयू, गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज समेत सभी जिलों में सरकारी एंबुलेंस ड्राइवरों ने सभी एम्बुलेंस गाड़ियों का चक्का जाम कर दिया है। वहीं जीवीके ईएमआरआई की टीम ने लखनऊ से आकर कर्मचारियों को समझाया कि वे हड़ताल न करें। हड़ताल की दशा में वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की तैयारी की। इसे लेकर सरकार द्वारा एस्मा के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।

दरअसल जीवीकेईएमआरआई कंपनी शहर में एंबुलेंस सेवा दे रही है। इसके चालकों का आरोप है कि उनसे आठ घंटे की जगह 12 घटे ड्यूटी कराई जाती है। उन्हें पायलट प्रोजेक्ट के तहत दिहाड़ी मजदूर की तरह 60 रुपये प्रति केस के हिसाब से भुगतान किया जाता है। वह भी समय से वेतन भी नहीं मिलता है। नए प्रोजेक्ट के तहत व्यवस्था की जा रही है कि 108 के वाहन कर्मियों को प्रति केस सौ रुपये और 102 को प्रति केस 60 रुपये दिए जाएंगे। उनका कहना है कि अगर केस न मिला तो उस दिन उन्हें कुछ नहीं मिलेगा। यह नीति गलत है।

बता दें कि रविवार को ही प्रदेश शासन ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र लिखकर एंबुलेंस सेवा पर एस्मा लागू किया है। कर्मचारियों को चेतावनी दी थी कि एंबुलेंस सेवा किसी भी हालत में ठप.न.की जाए। बावजूद इसके रविवार रात से शुरू हुई हड़ताल ने सोमवार सुबह पूरे यूपी को अपनी चपेट में ले लिया।

एंबुलेंस सेवा के नेताओं का कहना है कि एंबुलेंस सेवा में लगे कर्मचारियों को ढाई महीने से वेतन नहीं मिला है जिससे उनका परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। एंबुलेंस सेवा देने वाली निजी कंपनी जीवीके पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि एंबुलेंस स्टॉप पर कंपनी फर्जी मरीज दिखाने का दबाव डालती है जिससे उन्हें फर्जी आईडी की व्यवस्था कर मरीज को अस्पताल लाना और ले जाना दिखाना पड़ता है। कई जिलों के जिला अध्यक्ष ने बताया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी एंबुलेंस का चक्का जाम रहेगा।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
एंबुलेंस कर्मियों द्वारा हड़ताल की चेतावनी पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण वी हेकाली झिमोमी ने एस्मा के तहत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। उन्होंने सीएमओ को इस बावत पत्र भेजकर हड़ताल में शामिल कर्मियों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। वहीं हड़ताल का सीधा असर मरीजों पर पड़ा है। इस संबंध में जीवीके-ईएमआरआई के मीडिया सलाहकार आनंद दीक्षित का कहना है कि उन्होंने कहा कि हड़ताल पर गए कर्मचारियों ने एस्मा का पालन नहीं किया है। यूपी में जिन कर्मचारियों को एम्बुलेंस सेवा से निकाला गया था। वही कर्मचारी ड्यूटी पर लगे कर्मचारियों को भड़काकर ये काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई जिलों में कर्मचारियों का बकाया वेतन दिया जा चुका है। कई जिलों में बकाया वेतन देने की प्रक्रिया चल रही है। वेतन में विलम्ब हुआ है लेकिन सभी को वेतन दिया जा रहा है।

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