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महिलाओं में बढ़ रहा है ओवेरियन सिस्ट का खतरा, जाने लक्षण और बचाव

जैसे जैसे महिलाओं की उम्र बढती जाती है वैसे वैसे उन्हें कई तरह की बिमारियों का सामना करना पड़ता है इसके साथ ही महिलाओं में कई ऐसी बीमारियाँ भी होती है जो उम्र नहीं देखती और किसी भी उम्र में महिला अपने चपेट में ले लेती है और ये बीमारी छोटे गांव से लेकर बड़े शहरों तक की महिलाओं को अपनी गिरफ्त में ले लेती है |आज हम आपको एक ऐसी ही बीमारी के बारे में बताने जा रहे है जिसका नाम है ओवेरियन सिस्ट और ये बीमारी छोटी बच्चियों से लेकर लड़की और औरतों तक को अपनी चपेट में आसानी से ले लेता है |

ओवरीस महिलाओं के प्रजनन तंत्र (फीमेल रीप्रोडक्टिव सिस्टम) का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं ये गर्भाशय के दोनों तरफ निचले तरफ स्थित हैं। महिलाओं के दो ओवरी होते हैं जो अंडे और साथ ही हार्मोन एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का उत्पादन करते हैं और इनकी बनावट या कार्यशैली में किसी भी प्रकार के परिवर्तन का सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है।गर्भाशय में बने छोटे-छोटे दानों को ओवेरियन सिस्ट की समस्या सभी स्त्रियों को उनके जीवनकाल में कभी न कभी जरूर होती है। दरअसल ओवरी के भीतर द्रव्य से भरी थैलीनुमा संरचनाएं होती हैं। हर महिने पीरियड के दौरान इस थैली के आकार की एक संरचना उभरती है, जो फॉलिकल के नाम से जानी जाती है।

इन फॉलिकल्स से एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्ट्रॉन नाम के हॉर्मोस निकलते हैं, जो ओवरी से मैच्योर एग की निकासी में सहायक होते हैं। कुछ मामलों में पीरियड की निश्चित अवधि खत्म हो जाने के बाद भी फॉलिकल का आकार बढता जाता है, जिसे ओवेरियन सिस्ट कहा जाता है।हालाँकि ओवेरियन सिस्ट हानिकारक नहीं होते और ज्यादातर महिलाओं में यह खुद-ब-खुद ही ठीक हो जाते हैं। ये सिस्ट उन महिलाओं में अक्सर होता है जो मातृत्व के दौर में होती हैं, ज्यादातर इससे नुकसान नहीं होता, किन्तु यदि ये गांठ बड़ी होकर फट जाए तो ओवरी को नुकसान पहुंचाती है।अंडाशय में सिस्ट का आकार 2-3 सेंटीमीटर से लेकर पूरे पेट को घेर सकने वाला हो सकता है। सिस्ट फंक्शनल अथवा बिनाइन (नॉन कैंसरस) होते हैं।

ओवेरियन सिस्ट के कारण —

ओवेरियन सिस्ट (Ovarian-cyst) के कई कारण हो सकते हैं जैसे, आनुवंशिक प्रभाव, मोटापा, कम उम्र में पीरियड की शुरुआत, गर्भधारण में अक्षमता तथा हॉर्मोन्स का असंतुलन आदि।
अल्ट्रासाउंड के बढ़ते प्रचलन के कारण ओवेरियन सिस्ट का दिखायी देना भी सामान्य हो गया है। ये एक तरफ तो महिला को सचेत करता है। वहीं दूसरी ओर अनावश्यक चिंता में भी डालता है।

ओवेरियन सिस्ट के लक्षण

ओवेरियन सिस्ट में पेट के निचले हिस्से में रुक-रुक कर दर्द और भारीपन महसूस होना,चुभन ,पीरियड का अनियमित और अधिक मात्रा में ब्लीडिंग होना,व्यायाम या सहवास के बाद पेल्विक क्षेत्र में दर्द महसूस होना,जी मिचलाना,वजाइना में दर्द |यदि इस तरह के लक्षण नजर आने पर भी सिस्ट का उपचार न कराया जाए तो कई बार यह बढ़ते-बढ़ते कैंसर का रूप भी धारण कर लेते हैं। ऐसे में, जरूरी होता है कि यदि किसी महिला को सिस्ट के लक्षण खुद में नजर आ रहे हों तो समय रहते उनका उपचार करा लेना चाहिए

याद रखें ये बातें

ओवरी कैंसर के बारे में तब पता चलता है जब वह काफी आगे बढ़ चुका होता है। लेकिन अगर महिलाएं समय-समय पर चेकअप करवाती रहें तो समय रहते इस गंभीर बीमारी का इलाज शुरू किया जा सकता है।

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