Wednesday, September 30, 2020 at 11:42 PM

आजादी के दिन इसकी विदाई, भावुक हुई यूपी पुलिस…….

लखनऊ.  चंबल के डाकुओं को लोहा मनवाने वाली थ्री नॉट थ्री की अंतिम विदाई 26 जनवरी को अब आखिरी बार परेड के दौरान पुलिस जवानों के कंधों पर दिखायी देगी। बता दें कि ये बंदूकें प्रथम विश्वयुद्ध के संघर्ष के दौरान एक लम्बे समय तक यूपी पुलिस का हिस्सा रहीं। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था में बदलाव के खरे दावों के साथ सत्ता में पूर्ण बहुमत के साथ आई भाजपा सरकार और यूपी के मुख्यमंत्री पूरी तरह से अपराध और अपराधियों के लगाम के लिए पूरी जोर प्रयास में जुटे हुए हैं। इसके बाद राजधानी सहित ग्रेटर नोयडा में पायलट प्रोजेक्ट के तहत पुलिस कमिश्रन सिस्टम पर मोहर लगा दी गई। यह यूपी में हुए एक ैथिसाइक निर्णय के रूप में साबित हुआ है जो कि पिछले सात दशकों में में कभी न हो सका। वहीं इसी कवायद को लेकर अब यूपी पुलिस में एक और बड़े बदलाव के साथ आजादी से भी पहले समय से इस्तेमाल की जा रही थ्री नॉट थ्री व ली इन्फिल्ड (.0303 बोर )बंदूकों को यूपी पुलिस से हमेशा के लिए विदाई दे दी जायेगी। यह बंदूकें अब आखरी बार राजधानी में होने वाली गणतंत्र दिवस की ऐतिहासिक परेड में यूपी के पुलिस जवानों के कंधों पर दिखेंगी, जिसके बाद इन बंदूकों को इंसास एसएलआर से रिप्लेस कर दिया जायेगा और यह पुरानी बंदूकें आरआरआई के पास मालखाने की शोभा बढ़ाएंगी।

आइये जाने क्या है थ्री नॉट थ्री बंन्दूक?

थ्री नॉट थ्री का असली नाम ली-एन्फील्ड है और यह एक प्रसिद्ध राइफल है जिसे जेम्स पैरिस ली ने सबसे पहले बनाया ेइसका उपयोग ब्रितानी साम्राज्य तथा कामनवेल्थ देश 20 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में करते थे और आज भी कुछ देशों में इसका उपयोग होता है। यह राइफल बोल्ट-ऐक्शन, मैगजीन से चलने वाली, रीपीटिंग राइफल है।1895  से शुरू होकर1926 तक यह ब्रितानी सेना की मानक राइफल थी ेजबकि इसका सबसे अधिक उत्पादन 1895 से 1904 के बीच सबसे अधिक हुआ े इसकी मारक क्षमता 2 किलोमीटर के आसपास तक होती है।

यूपी पुलिस में थ्री नॉट थ्री का इतिहास

यूपी पुलिस के पास यह हथियार 1945 में आया था इससे पूर्व मस्कट राइफल 410 का प्रयोग किया जाता  था जिसके बाद सन 80 के दशक में पुलिस को एसएलआर मिली बाद में एके-47, इंसास, एसएलआर जैसी आधुनिक और आॅटोमैटिक गैन का प्रयोग बढ़ा तो थ्री नॉट थ्री उस दौड़ से बाहर होती नजर आई े

पहले विश्व युद्ध का हिस्सा रह चुकी है थ्री नॉट थ्री
पहले विश्व युद्ध में मिली थी अलग पहचानजानकारों के मुताबिक थ्री नॉट थ्री का 1914 में पहले विश्व युद्ध में इस्तेमाल हुआ था. इसकी मारक क्षमता लगभग 2 किलोमीटर थी।

चंबल हो या बीहड़, डाकुओं को मनवाया लोहा
मध्यप्रदेश से सटा हुआ उत्तर प्रदेश में पड़ने वाली चंबल की घाटियाँ हो या या बीहड़ो के  खूंखार डकैत हों, आतंकवादी हों या माफिया के खिलाफ कार्रवाई, उत्तर प्रदेश पुलिस की पहचान मानी जाने वाली .303 की रायफल अब इतिहास होने जा रही हैं े अब इनके जगह आॅटोमेटिक एसएलआर और इंसास रायफलों का प्रयोग किया जाएगा ेउत्तर प्रदेश शासन की तरफ से आदेश जारी कर दिए गए हैं कि किसी थाने पर अब .303 रायफल का उपयोग न हो. साथ ही ये भी कहा गया है कि यदि इस का उपयोग किया जाता है तो संबंधित थानाध्यक्षों, प्रतिसार निरीक्षकों के खिलाफ कार्यवाही की जाए दरअसल यूपी पुलिस को अत्याधुनिक 63 हजार इंसास व 23 हजार एसएलआर पूर्व में ही मिल चुकी हैं, वहीं नई भर्तियों को देखते हुए 8 हजार इंसास रायफल रिजर्व मे रखी गई हैं साथ ही 8 हजार इंसास रायफल व 10 हजार 9 एमएम पिस्टल खरीदने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था।

कारगिल युद्ध के दौरान कारगर साबित
इसने कई मोर्चों पर यूपी पुलिस का बखूबी साथ भी निभाया है. बीहड़ों में डाकुओं से मोर्चा लेने की बात रही हो, या फिर साम्प्रदायिक दंगों के हालात बने हों. पुलिसकर्मी हमेशा अपने इसी हथियार के बल पर हर बार स्थिति को काबू करने में सफल रहे हैं. अब जिस हथियार इंसास से इसे रिप्लेस किया जा रहा है वह हथियार 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान कारगर साबित हुई थी. उनके मुताबिक बदलते दौर में जब तकनीक में बदलाव हो रहे हैं, ऐसे में तकनीकी रूप से पिछड़ चुके इस हथियार को बदलने का राज्य सरकार फैसला भी सही है।

बढेगी यूपी पुलिस की ताकत
कानून-व्यवस्था को मजबूत और नया लुक प्रदान करने के लिए ही थ्री नॉट थ्री रायफल को रिप्लेस किया जा रहा है इसकी शुरूआत 2005 में हो गयी थी जिसके बाद फेज वाइज थ्री नॉट थ्री राइफल को हटाया जा रहा था. उनके मुताबिक प्रदेश के थानों में 63 हजार इंसास और 23 हजार एसएलआर राइफलें दी जा चुकी हैं। यूपी पुलिस के अत्याधुनिक हथियारों से लैस हो जाने से जहां यूपी पुलिस की ताकत बढ़ेगी। वहीं बदमाशों के साथ होने वाली मुठभेड़ों में भी यूपी पुलिस के जवान इन नये हथियारों से डटकर उनका मुकाबला कर सकेंगे

भावुक हुए पुलिसकर्मी
बहरहाल, सत्तर सालों से भी ज्यादा समय तक यूपी पुलिस में राज करने वाली थ्री नॉट थ्री रायफल की विदाई का ये समय पुलिस कर्मियों को भी भावुक कर रहा है, क्योंकि इतने सालों से इस हथियार से उनका वास्ता रहा है।  लेकिन यूपी पुलिस के लिए अच्छी बात ये है कि इसके बदले अब उसे अत्याधुनिक हथियार इंसास और एसएलआर हथियार भी मिल रहे हैं जिससे यूपी पुलिस भी हथियारों के मामले में पहले से ज्यादा हाईटेक नजर आयेगी और इस प्रकार थ्री नॉट थ्री शस्त्र इतिहास में एक इतिहास के रूप में हमेशा याद की जायेगी।

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