फिर गर्माया कश्मीर में धारा-370 का मुद्दा, भाजपा ने बनाई रणनीति

श्रीनगर। सत्ता में आने से पहले भाजपा ने कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने का वादा किया था। लेकिन अभी तक उस पर भाजपा सरकार कुछ नहीं कर पायी है। लेकिन अब भाजपा ने रणनीति में बदलाव करते हुए आर्टिकल 370 की बजाए आर्टिकल 35(A) पर फोकस करने की सोची है। बता दें कि आर्टिकल 370 और 35(ए) कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देते हैं। भाजपा का कहना है कि इन आर्टिकलों से भारत और कश्मीर के बीच राजनैतिक खाई चौड़ी होती जा रही है।

दरअसल आर्टिकल 35(ए) के तहत कश्मीर को संविधान में कुछ विशेषाधिकार मिले हुए हैं। जिसके तहत कश्मीर में भारत के अन्य राज्यों के लोग जमीन नहीं खरीद सकते। इसके अलावा कश्मीर की महिला के अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी पर भी रोक है।

ऐसे में एक गैर सरकारी संगठन वी द सिटीजन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस प्रावधान को चुनौती दी है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 3 जजों की एक पीठ बनाकर 6 हफ्तों में इस पर निर्णय देने का आदेश दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस पर सितंबर में फैसला आ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल-35(ए) से जुड़ा एक और मामला विचाराधीन है। दरअसल कश्मीर की एक महिला ने राज्य के बाहर के व्यक्ति से शादी और बाहर सेटल हो गई। लेकिन आर्टिकल 35(ए) के कारण महिला का अपनी पैतृक संपत्ति में अधिकार समाप्त हो गया। जिसके बाद महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस प्रावधान को खत्म करने की मांग की है।

वहीं काफी समय से आर्टिकल 370 पर बहस की हिमायत कर रही भाजपा के लिए यह एक मौका हो सकता है। जब वह अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रख सकती है। हालांकि इस मामले में भाजपा की राह काफी मुश्किल हो सकती है। दरअसल हाल ही में जम्मू कश्मीर की सीएम महबूबा मुफ्ती ने चेतावनी दी थी कि यदि कश्मीर के विशेषाधिकार के साथ छेड़छाड़ की गई तो घाटी में कोई भी तिरंगा उठाने वाला नहीं बचेगा।

ऐसे में एक बार फिर देश में राजनैतिक सरगर्मियां बढ़ने वाली हैं। लेकिन यह भाजपा के लिए एक मौका भी है कि वह अपने वादे को पूरा करने की एक कोशिश तो कर ही सकती है।

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