मिलते नहीं, फोन उठाते नहीं, रामलला के दर्शन से भी रोका

मुंबई। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नाम पत्र लिखा है। इस लैटर में उन्होंने अपनी परेशानियों के बारे में बात की है। उन्होंने शिवसेना सुप्रीमो से कहा कि वह कभी नेताओं की समस्याएं सुनने के लिए उपलब्ध नहीं रहे। तीन पन्नों के इस पत्र में उन्होंने हाल ही में हुए चुनाव पर भी चर्चा की है।

सबसे बड़ी शिकायत- मिले नहीं, फोन नहीं उठाते
शिवसेना नेता शिंदे कैंप की तरफ से मराठी में लिखे गए पत्र में सबसे बड़ा आरोप संपर्क से दूर रहने का लगाया है। उन्होंने लिखा, ‘आपके पास इकट्ठा हुए कथित चाणक्यों ने हमें राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव की रणनीति से दूर रखा गया। नतीजा अब सबके सामने है। हमें कहा गया कि आप छठी मंजिल पर आप लोगों से मिल सकते हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ।’

उन्होंने कहा, ‘अपने विधानसभा क्षेत्रों पर काम के लिए हमने कई बार संपर्क किया तो फोन तक नहीं उठते। ये सारी चीजें हम भुगत रहे थे और सभी विधायकों ने यह सहन किया है। हमने आपके आसपास के लोगों को यह बताने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।’

नेताओं का कहना है कि सीएम से मुलाकात के लिए करीबियों से संपर्क साधना पड़ता है। उन्होंने लिखा, ‘आपने जब वर्षा को छोड़ा तो काफी भीड़ वहां दिखाई दी। अच्छा हुआ कि पहली बार इस बंगले के दरवाजे आम लोगों के लिए भी खोले गए। पिछले ढाई साल से इस बंगले के दरवाजे बंद थे। विधायक होकर भी हमें आपसे मिलने के लिए आपके करीबियों के आगे-पीछे घूमना पड़ता है।’

See also  मवेशी विवाद (Conflict) में भाभी ने अपने देवर पर हशिए से किया हमला

अयोध्या जाने की अनुमति नहीं देने से नाराज
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुंचे थे। इस यात्रा को लेकर पत्र में कहा गया है, ‘हमें भी रामलला के दर्शन करने थे, लेकिन ऐसा क्यों नहीं करने दिया गया।’ उन्होंने कहा, ‘अब हम सब न्याय और हक के लिए एकजुट हुए हैं। इसीलिए हमने उन्हें नेता मानते हुए यह फैसला लिया है। हिंदुत्व, अयोध्या और राम मंदिर शिवसेना के मुद्दे हैं, लेकिन हमें रोक दिया गया। कई विधायकों को खुद उद्धव ठाकरे ने ही अयोध्या जाने से रोक दिया।’

क्रॉस वोटिंग पर सफाई
बागी विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की बातों का खंडन किया है। उन्होंने लिखा, ‘राज्यसभा चुनाव में शिवसेना का एक भी वोट क्रॉस वोट नहीं हुआ था। इसके बाद भी विधान परिषद चुनाव से पहले हम पर अविश्वास जताया गया।’ इसके अलावा उन्होंने सीएम पर समस्याएं नहीं सुनने के आरोप लगाए हैं। शिवसेना नेताओं ने कहा, ‘हमें कभी वर्षा पर जाने की परमिशन नहीं मिली।