Wednesday, December 8, 2021 at 3:10 PM

शहर के ज्यादातर मुहल्लों में बंदरों का आतंक

औरैया।  दिबियापुर मार्ग समेत कानपुर-इटावा व जालौन मार्ग पर बंदरों का झुंड रात आठ बजे के बाद एकत्र होने लगता है। ऐसे में मार्ग या बाजार से घर जाने वाले लोग सहमे रहते हैं। कई घटनाएं हो भी चुकी है। कुछ ऐसी घटनाएं रही जिसमें जख्मी हुए लोगों की जान चली गई। बावजूद वन विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। तीन दिन पहले शहर के मुहल्ला बजरिया में धर्मेंद्र बंदरों के खदेड़ने से सीढि़यों से नीचे आ गिरा। जिसकी वजह से उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। उपचार के दौरान उसकी कानपुर के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इसके अलावा मुहल्ला नरायनपुर में सभासद ममता की बेटी को भी घायल कर दिया। बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ रहा है कि लोगों का रास्ता चलना मुश्किल है।

आवास विकास में जीवन बीमा निगम कार्यालय के सामने व पुलिस लाइन को जाने वाले रास्ते पर शाम ढलते ही इनके झुंड सड़क के दोनों तरफ एकत्रित हो जाते हैं। दिन में भी हाथ में पॉलीथिन या झोला लेकर चलना खतरे से खाली नहीं है। सुबह टहलते समय भी लोगों को हाथ में डंडा लेकर जाना पड़ता है। मंदिरों पर भी माताओं बहनों के हाथ से पूजा की थाली पर झपट्टा मारकर सामग्री छीनना रोजाना की घटनाएं हैं। पिछले एक साल में तिलक नगर, नरायनपुर, गोविद नगर आदि ज्यादातर मुहल्लों में आधा दर्जन से अधिक दर्दनाक घटनाएं हो चुकी हैं। जिला वन अधिकारी वीके सिंह ने बताया कि विभाग के पास कोई प्रशिक्षित टीम नहीं है और न ही बजट आता है। फिलहाल, कोई वैकल्पिक रास्ता निकालते हुए समस्या का निस्तारण किया जाएगा।