बिहार

बच्चों की ईमानदारी पर छोड़ दी जाती है कि वे सही मूल्य चुकाते हैं या फिर…..

पटना। एक साल पहले पटना में एक स्कूल में ईमानदारी की पाठशाला खोली गयी। जिसमें ईमानदारी की पाठशाला के तहत एक कक्षा चलायी जाती है। बच्चों को रोकने के लिए स्कूल का गेट कभी बंद नहीं होता। स्कूल आने के बाद बच्चे बाहर नहीं जाते। स्कूल में ही जरूरत के हर सामान उपलब्ध होते हैं। इस बहाने बच्चों को ईमानदारी और जिम्मेदारी का पाठ भी पढ़ाया जाता है। यह अनोखा और अभिनव प्रयोग पटना जिला के चकबैरिया स्थित ग्रामीण प्लस टू विद्यालय में हो रहा है।

इस स्कूल में इसमें कलम, पेंसिल, नोटबुक, रबर, कटर, छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकीन आदि उपलब्ध रहता है। इसमें बच्चे खुद जाते हैं। जो उनकी जरूरत का सामान होता है, उसे वे लेते हैं और उसका जो मूल्य होता है, उतने पैसे बगल में रखे बाक्स में डाल देते हैं। यह बच्चों की ईमानदारी पर छोड़ दी जाती है कि वे सही मूल्य चुकाते हैं या फिर सामान उठा कर चले जाते हैं।

पकड़ में आने पर ईमानदारी की चलती कक्षा : स्कूल की शिक्षिका निशि कुमारी ने बताया कि एक हजार रुपये का सामान खरीद कर रखा जाता है। हर माह इसकी जांच होती है। पहले एक हजार के बदले नौ सौ तो कभी 950 आदि रुपये मिलते थे। कई बच्चे सामान लेकर चले जाते थे और उसका पैसा नहीं देते थे। यह पकड़ में आने के बाद सामूहिक कक्षा आयोजित की जाती है।

चकबैरिया विद्यालय के प्राचार्य के के त्रिपाठी ने कहा कि अगर बच्चों में ईमानदारी से रहने की सीख मिल जाये तो फिर वह उनकी आदत हो जाएगी। इसके लिए हमने इसे शुरू किया। ईमानदारी से रहने और चोरी नहीं करने की सीख का असर है कि बच्चे स्कूल से ड्रापआउट नहीं होते हैं।

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