उत्तर प्रदेश

डीसीपी यातायात कार्यालय प्रकरण :- छिन गया निर्णय लेने का अधिकार तो आँखों में खटकने लगी शीर्ष की कुर्सी

 

आयुक्त प्रणाली आने के बाद पीपीएस और पीसीएस संवर्ग में रार बरकार ,कभी कार्यालय तो कभी फील्ड में सीनियरिटी को लेकर आईपीएस पर वार

लखनऊ–यूपी में कानून व्यवस्था में सुधार के लिए दो बड़े जिलों में आयुक्त प्रणाली लागू की गई है | वही आयुक्त प्रणाली को लागू किये जाने के पूर्व से ही पीसीएस, पीपीएस और आईएएस के अधिकारियों में रोष बरकार है और इसके रुझान कार्य क्षेत्र में साफ़ देखने को मिल रहे है | आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद से पीसीएस और आईएएस वर्ग से कई मामलों में निर्णय लेने के अधिकार छिन गए है जिसके चलते ये दोनों ही वर्ग कार्यक्षेत्र में तैनात आईपीएस पर निशाना साधते हुए किसी न किसी चीज को विवाद बना कर उसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश करते है | ताजातरीन मामला यातायात कार्यालय को लेकर है | जहां पीसीएस वर्ग ने अब यातायात कार्यालय को लेकर आईपीएस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है | यही नहीं उनसे इस्तीफे तक की मांग कर ली गई |

अवगत करा दें कि राजधानी में आयुक्त प्रणाली लागू होने के बाद आयुक्त प्रणाली के तहत आईपीएस अधिकारियों की संख्या बढ़ा दी गई है | आयुक्त प्रणाली के तहत जोनवार कई आईपीएस तैनात किये गए है | इसी क्रम में यातयात की जिम्मेदारी आईपीएस चारु निगम को डीसीपी ट्राफिक के रूप में दी गई है साथ ही उन्हें महानगर स्थित विधिविज्ञान प्रयोगशाला में कार्यालय भी दिया गया है |

आपको बता दें कि आयुक्त प्रणाली लागू होने से पूर्व प्रधानमंत्री की स्मार्ट एंड सेक्योर सिटी योजना के तहत कैसरबाग थाना क्षेत्र के लालबाग गर्ल्‍स कालेज के सामने स्थित बिल्डिंग में एक कार्यालय बनाया गया था, जिसमे नगर निगम और यातायात पुलिस के कैमरों का कंट्रोल रूम स्‍थापित किया गया है | जहां यातयात नियमों का पालन करने के निर्देश के साथ ही उल्लंघन करने वालो के खिलाफ कार्रवाई की जाती है |

जानकारी के अनुसार बीते शुक्रवार डीसीपी ट्राफिक चारु निगम लालबाग के यातायात कार्यालय में बैठी हुई थी कि कुछ कर्मचारियों ने ट्राफिक कंट्रोल रूम के कमरे के बाहर इंद्रमणि त्रिपाठी की नेमप्लेट लगा दी, वही चारु निगम द्वारा बिना अनुमति के नेमप्लेट लगाए जाने पर विरोध भी किया | चारु निगम ने मामले की जानकारी मंडलायुक्त को दी तो उन्होंने भी ट्राफिक कार्यालय बने रहने पर सहमति जताई।
इसके साथ ही वह ऑटो टेम्पो टैक्सी संघ के पदाधिकारियों से मीटिंग के लिए महानगर स्थित कार्यालय निकल गई | मंडलायुक्त की सहमति की खबर पाकर अधीनस्थों द्वारा वहां पर चारु निगम की नेमप्लेट लगा दी गई | जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया |

वही पुलिस कमिश्नर ने डीसीपी यातायात चारू निगम और नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी दोनों से वार्ता की और विवाद को ख़त्म किया गया |

कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि डीसीपी ट्राफिक का दफ्तर शिफ्ट करने की कोई योजना नहीं है | उनका कार्यालय महानगर में बना दिया गया है | उन्होंने कहा है कि लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने में हमें संयुक्त प्रयासों की जरूरत है, हम एक टीम का हिस्‍सा हैं।

(रिपोर्ट–सत्य प्रकाश भारती)

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