सीतापुर

नहीं हुई शुरूआत, कैसे गड्ढा मुक्त होगी सड़क…

रामकोट/सीतापुर। 88 हजार ऋषि-मुनियों की तपोभूमि विश्व विख्यात नैमिषारण्य धर्म नगरी के विश्व विख्यात 84 कोसीय परिक्रमा का प्रवेश द्वार रामकोट कस्बे से ही शुरू हो जाता है। इसलिए रामकोट को नैमिषारण्य का प्रवेश द्वार कहते हैंं। 23 फरवरी 2020 से शुरू होने वाले 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को इसी मार्ग से विश्व के कोने-कोने से सृद्धालु सन्त, महत्मा नैमिषारण्य के 84 कोसीय परिक्रमा के लिए निकलते हैं।
वहीं पर लोक निर्माण विभाग की अनदेखी के चलते रामकोट कस्बे के मेन चौराहे पर मार्ग जर्जर होने से एवं गड्डी-गड्ढा होने से जलभराव हो जाता है।
आबादी की जल निकासी ना होने के कारण आए दिन रामकोट चौराहे से लेकर सीतापुर मार्ग की तरफ भुरजिन टोला तक आए दिन रोड पर नालियों का गंदा पानी बहता रहता है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण आए दिन जलभराव व चौराहे के गड्ढों पर पानी भरना आम बात हो गई है, जिससे आये दिन मार्ग दुर्घटनाओं का भय बना रहता है। बताते चलें यह मार्ग  अंतर्जनपदीय मार्ग है इसी मार्ग से हरदोई, कानपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिलग्राम, आदि स्थानों के लिए दैनिक हजारों यात्री, राहगीर गुजरते हैं। लेकिन लोक निर्माण विभाग की लचर कार्यप्रणाली के चलते यात्रियों को निकलना दूभर हो जाता है। व आए दिन मार्ग दुर्घटनाओं की आशंकाएं बनी रहती है। 23 फरवरी 2020 रविवार से परिक्रमा मेला की भी शुरुआत है। जिसमें  विदेश सहित देश के कोने-कोने से लाखों सृद्धालु परिक्रमारथी इसी मार्ग से गुजरेंगे। कस्बा निवासी सौरभ गुप्ता का कहना है मार्ग के पूरब दिशा में बना हुआ नाला लगभग 10 वर्षों से साफ नहीं हुआ है। नाला पूर्ण रूप से चौक हो चुका है, जिसके चलते बरसात का व घरों का पानी चौराहे पर भर जाता है। जिससे चौराहा गड्ढा युक्त हो जाता है। जितेंद्र प्रसाद का कहना है यह लोक निर्माण विभाग की घोर लापरवाही है। आए दिन रामकोट चौराहा पर जलभराव रहता है, जिसमे साइकिल सवार-मोटरसाइकिल सवार गिरकर चोटिल होते रहते हैं, फिर भी इस नाले को साफ नहीं कराया जा रहा है। रमेश चंद्र पाण्डेय का कहना है अगर यह नाला पूरा साफ हो जाए तो जलभराव की समस्या से निजात मिल जाएगी। वहीं कस्बे के ज्यादातर दुकानदारों का भी कहना है। जलभराव की समस्या से उनकी दुकानदारी पर भी काफी असर पड़ रहा है। हम सभी की दुकानों के सामने कीचड़ भरा रहता है, जिससे दुकानों पर ग्राहक आने से कतराते रहते हैं।
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