सीतामढ़ी। अप्रैल के महीने में बाढ़ से बचाव की तैयारी की चिता जताकर प्रशासन आश्वस्त कर रहा है कि वह कोई कसर नहीं छोड़ेगा। इस निमित्त जिलाधिकारी सुनील कुमार यादव व डीडीसी विनय कुमार ने तमाम वरीय पदाधिकारियों व बाढ़ से संबंधित सभी विभागों के पदाधिकारियों के साथ बुधवार को बैठक की और तैयारी के बिदु पर सिलसिलेवार समीक्षा की। समाहरणालय स्थित परिचर्चा भवन में आहूत बैठक में डीएम ने हर एक बिदु पर जरूरी निर्देश दिए। बताते चलें कि प्रशासन की हर साल ऐसी रुटीनी बैठकें होती हैं, बाढ़ भी रुटीन में आती है और तबाही मचाकर चली जाती है, प्रशासन की तैयारी धरी की धरी रह जाती है। सच तो यह है कि समय पर सरकारी नाव नहीं मिल पाते, ढूंढने पर पता चलता है कि अमूक प्रखंड में एक भी नाव है ही नहीं। आदमी को जितनी राहत मिल पाती होगी, बाढ़ से घिरे बेजुबान पशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, असहायों को समय पर मदद शायद ही मिल पाती है। बाढ़ पूर्व सड़कों की मरम्मत नहीं होने से वह अक्सर टूटती हैं, पुल-पुलिया बह चलते हैं मगर बाढ़ पूर्व तैयारियां काम नहीं आतीं। बैठक में एडीएम विभागीय जांच कृष्ण प्रसाद गुप्ता, सिविल सर्जन डा. सुरेश चंद्र लाल, डीपीओ आईसीडीएस रोचना माद्री, डीईओ अवधेश कुमार, डीएओ अनिल कुमार, डीपीआरओ विजय कुमार पांडेय आदि उपस्थित थे। अभी से बाढ़ तक हर हफ्ते तैयारी की समीक्षा हो

डीएम ने निर्देश दिया कि सभी शरणस्थली का भौतिक सत्यापन कर वहां आवश्यक सुविधाओं का आंकलन कर लिया जाए। विशेषकर शुद्ध पेयजल की उपलब्धता एवं शौचालय की व्यवस्था को चेक करना जरूरी है। मानव एवं पशुओं की दवा की उपलब्धता पर अभी से ध्यान देने की बात कही गई है। डीएम ने कहा कि पिछले अनुभवों को देखते हुए सर्पदंश की दवा स्टाक रहे। ब्लीचिग पाउडर का छिड़काव समय पर हो। गोताखोरों की सूची एवं मोबाइल नंबर जिला नियंत्रण कक्ष में रहे ताकि, आपात स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सके। तटबंधों का नियमित निरीक्षण बेहद जरूरी है। बाढ़ के समय प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं, धातृ महिलाओं, दिव्यांग जन को किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े अभी से ड्यू लिस्ट बना लें। पॉलीथीन सीट, पशु चारे की उपलब्धता, गोदामों में अनाज, नाव की उपलब्धता एवं उनका निबंधन रहे। हर हफ्ते इन बिदुओं पर तैयारी को लेकर समीक्षा होती रहे।