सुनो कलेक्टर ! तुम जनता के नौकर हो, बादशाह नहीं

कुमार सौबीर

अलीपुरद्वार/कोलकता : पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिला में बदतमीजीऔर सड़कछाप गुंडागर्दी पर आमादा कलेक्टर निखिल निरमल को सरकार ने निलंबित कर दिया है। निखिल वो कलेक्टर हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक लड़के की पुलिस थाने में जमकर कुटाई कर दी थी। इस कलेक्‍टर-दम्‍पत्ति द्वारा की गयी इस गुंडागर्दी का वीडियो वायरल हुआ, तो हंगामा हो गया। इसके बाद सरकार ने पहले तो निखिल को जबरन अवकाश पर भेज दिया था। लेकिन मामला ठण्‍डा न होने पर सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई पर मजबूर हो गयी। नतीजा, यह कलेक्‍टर अब सस्‍पेंड हो चुका है।
आरोप है कि उस युवक ने कलेक्टर की बीवी के बारे में किसी व्हाट्सएप ग्रुप पर बदतमीजी कर थी जिसके बाद कलेक्टर साहब और उनकी बीवी ने उस लड़के की जमकर कुटाई कर दी। हैरत की बात है कि इस मामले में पुलिस ने युवक को बिना कोई केस दर्ज किये ही थाने पर बुलाया। और वहां पुलिस ने उस युवक को वहां के डीएम डीएम निखिल निरमल और उनकी पत्नी के हवाले कर दिया, इसके बाद में इन दम्‍पत्ति ने पूरे थाना कर्मियों के सामने युवक को लातों-थप्‍पड़ों से जमकर पीटा।
हमारा मानना है कि अगर उस युवक ने कलेक्टर की पत्नी के साथ कोई हरकत की थी, तो निश्चित ही वो सज़ा का पात्र है। परंतु वो सज़ा कानून देगा, न्यायालय देगी। कानून की किस किताब में लिखा है कि कलेक्टर को मारपीट करने का अधिकार है, वह भी सरेआम या फिर थाना में घुस कर पीटने का हक किसी जिम्‍मेदार अफसर को है? माना कि इस मामले में दोषी वो लड़का है, लेकिन उतना ही दोषी तो वो कलेक्टर भी है क्यूंकि दोनों ने ही कानून अपने हाथ में लिया है। बल्कि यह अफसर का अपराध उस युवक से कई गुना ज्‍यादा है, क्‍योंकि उसने यह हरकत जानबूझ कर की और अपने अधिकारों का उल्‍लंघन किया।
इस बीच कलेक्टर की पत्नी ने फेसबुक पर बड़ी बेशर्मी से अपने पति का बचाव करते हुए लिखा है कि उनको अपने पति पर गर्व है। कलेक्‍टर का तर्क है कि क्यूंकि उनके पति ने उनके साथ सात फेरे लेकर कसम खाई थी कि वो उनकी रक्षा करेंगें। इससे साफ ज़ाहिर है कि उनको अपने किये पर पछतावा नहीं है।
अरे मिसेज कलेक्टर ! पत्नी की रक्षा करने की कसम तो हर पति लेता है शादी के समय। जो घटना आपके साथ हुई, वो अगर वो किसी आम आदमी की पत्नी के साथ होती तब क्या आपकी पुलिस उस आम आदमी को कानून हाथ में लेने की इज़ाज़त देती? नही। तब वही सरकारी लिखा-पढ़ी की जाती, रिपोर्ट लिखी जाती और फिर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता। एसे में आपकी इस सफाई का कोई मतलब नही है।
गलती अकेले इस आइएएस अफसर की नहीं है। दरअसल ये गलती है मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक संस्थान की, जहां इन आला अफसरों की ट्रेनिंग होती है। वहां पर इन आइएएस अफसरों के दिमाग में ये बात ठूंस-ठूंस कर भर दी जाती है कि आप इस देश के राजा हो और बाकी जनता तो प्रजा है। आपको कलेक्टर बनकर जिले पर राज करना है और मातहत अफसरों को गाली देकर उनसे काम लेना है। शाम को पार्टी में रिश्वत में मिली महंगी विलायती शराब की नदियां बहानी हैं।
जी हां ! यही असलियत है। और आजकल सोशल मीडिया के आ जाने से कई अफसर तो खुद को खुदा ही समझने लगे हैं। कहीं भी खड़े होकर किसी अधीनस्थ अफसर को डांटकर बेइज्जत करके वीडियो बनाकर उसको फेसबुक पर डाल दो और जनता की वाह-वाही लूट लो। ऐसी ही एक पूर्व महिला कलेक्टर की कलई अभी हाल-फिलहाल में जनता के सामने खुली है। अभी ऐसे कई और अफसर हैं जिनकी पोल खुलना बाकी है जिनमें उत्तर प्रदेश के कुछ अफसर और उत्तराखंड का एक अफसर भी शामिल हैं।

 

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