वीजा को लेकर ब्रिटेन ने उठाया ये बड़ा कदम, सबसे अधिक भारतीयों को होगा फायदा

यूके सरकार वीजा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत सरकार ने विदेशी पीएचडी डिग्रीधारकों को अपने यहां काम करने के लिए वीजा की संख्या की सीमा खत्म करने जा रही है। यूके के चांसलर फिलिप हैमंड ने यह ऐलान किया है। इससे सबसे अधिक भारतीय उच्च डिग्रीधारी पेशेवरों को फायदा मिलने वाला है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या भारतीय पेशेवर कार्यरत हैं। इस कदम के बाद इसी वर्ष से उच्च शिक्षा आधारित नौकरियों के लिए ब्रिटेन में आने वाले लोगों की संख्या की सीमा नहीं रहेगी।

हैमंड ने हाउस ऑफ कॉमन्स को अपने संबोधन में बताया, ‘ब्रिटेन को तकनीकी क्रांति के अगुआ बनाए रखना हमारी योजना का प्रमुख स्तंभ है। इससे हमारी अर्थव्यवस्था का कायाकल्प हो रहा है। और, इस लक्ष्य को साधने लिए पतझड़ के मौसम से हम पीएचडी लेवल की नौकरियों के लिए वीजा की संख्या की सीमा खत्म कर देंगे।’

उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘ऑटम 2019 से पीएचडी स्तर की नौकरियों को टियर 2 (जनरल) की सीमा से मुक्त कर देंगे और उसी वक्त 180 दिनों की अनुपस्थिति से संबंधित आव्रजन कानून (इमिग्रेशन रूल्स) भी बदल दिए जाएंगे ताकि विदेशों में फील्डवर्क करने वाले रिसर्चर यूके में रहना चाहें तो उन्हें परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।’

यूके के गृह मंत्रालय के बिल्कुल ताजातरीन आंकड़ों के मुताबिक 2018 में उच्च कौशल की नौकरियों के लिए 54 प्रतिशत टियर 2 (जनरल) श्रेणी के वर्क वीजा भारतीयों को दिए गए थे। पिछले साल भारतीयों को इस कैटिगरी के वीजा की स्वीकृति में भी सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़े बताते हैं कि 2017 के मुकाबले 2018 में भारतीयों को 6 प्रतिशत यानी 3,023 ज्यादा वीजा मिले।

भी यूके के वीजा सिस्टम में टियर 2 स्किल्ड वर्कर्स सेक्शन के तहत सीमित संख्या में वीजा जारी किए जाते हैं। यूके की सरकार 2021 तक नया इमिग्रेशन सिस्टम लागू कर स्किल्ड वर्कर्स के लिए वीजा की संख्या की सीमा पूरी तरह खत्म करना चाहती है। पीएचडी लेवल के प्रफेशनल्स के लिए वर्क वीजा पर से पाबंदी हटाने का ताजा ऐलान इसी दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम माना जा रहा है। इसी साल इमिग्रेशन मिनिस्टर कैरोलिन नोक्स ने कहा था, ‘नए सिस्टम में हम भारत से बेहद कुशाग्र एवं सर्वोत्तम (पेशेवरों) का खुलकर स्वागत करेंगे।’

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