‘द ताशकंद फाइल्स’ मूवी रिव्यू : पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री की मौत से पर्दा उठाती फिल्म

नई दिल्ली। फिल्मी शुक्रवार को फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत कैसे हुई जैसे मुद्दे पर आधारित फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ रिलीज हो गई है। फिल्म रिलीज से पहले ही सुर्खियो में छाई हुई है। फिल्म में ‘ताशकंद फ़ाइल’ एक युवा, महत्वाकांक्षी पत्रकार रागिनी (श्वेता बसु प्रसाद) के इर्द-गिर्द घूमती हैं, जो भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बारे में एक लेख प्रकाशित करती हैं। रागिनी चीजें भाप लेती हैं और शास्त्री की मौत की जांच के लिए सरकार द्वारा एक आधिकारिक जांच समिति का गठन करवाती है।

फिल्म अपने रिलीज पर उस वक्त विवाद में आ गई, जब फिल्म रिलीज की रोक को लेकर शास्त्री जी के पोते की और से निर्देशक को लीगल नोटिस प्राप्त हुई। फिल्म की कहानी एक अति महत्वाकांक्षी पॉलिटिकल पत्रकार के स्कूप लाने के चैलेंज से शुरू होती है।

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने अपनी फिल्म को विश्वसीनय बनाने के लिए कई ऐतिहासिक किताबों, खबरों, संदर्भों और तथ्यों का सनसनीखेज ढंग से इस्तेमाल किया है, मगर साथ-साथ एक बड़ा डिस्क्लेमर भी दिया है कि उसमें उन्होंने सिनेमैटिक लिबर्टी भी ली है, मगर अफ़सोस वह अपने इस मुद्दे को सही तौर पर एग्जिक्यूट नहीं कर पाए।

फिल्म कही-कही खींची और बोझिल से लगने लगती है। वहीं सेकेंड फिल्म का थोड़ा बोरिंग नजर आता है। नसीरुद्दीन शाह का रोल बहुत छोटा है, मगर मिथुन चक्रवर्ती ने श्याम सुंदर त्रिपाठी की भूमिका में भरपूर मनोरंजन किया है।

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