‘कैप्टन’ की पिच पर बोल्ड सिद्धू!

रास नहीं आ रही पंजाब की राजनीति, राहुल-प्रियंका की शरण में पहुंचे सिद्धू

सिद्धू के बड़बोलेपन की आदत से कांग्रेस की हुई फजीहत

सीएम अमरिंदर सिंह की कैबिनेट में घटा राजनीतिक कद

रवि गुप्ता

लखनऊ। क्रिकेट की कमेंटरी से लेकर रंगमंच…और इसी कड़ी में राजनीतिक मंच पर अपनी पंजाबियत वाली अदायगी, शेरो-शायरी और वाकपटुता के लिये मशहूर पूर्व क्रिकेटर व राजनेता नवजोत सिंह सिद्धू ‘पॉलिटिकल कैरियर’ आजकल ठीक-ठाक नहीं चलता दिख रहा। एक जमाने में भारतीय क्रिकेट टीम के शानदार ओपनर बल्लेबाज रहे सिद्धू इन दिनों पंजाब में कैप्टन अमरिंदर की बिछाई ‘पॉलीटिकल पिच’पर लगातार बोल्ड होते जा रहे हैं। नतीजतन पंजाब में अपने घटते राजनीतिक कद की चिंता में सिद्धू सीधे पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी से मिलने दिल्ली पहुंच गये।

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो देश-प्रदेश और विदेश में भले ही अपने पंजाबी वाद-संवाद और स्टाइल के लिए सिद्धू की कोई सानी न हो, मगर उनके ही गृह राज्य यानी पंजाब की बात करें तो अभी भी वहां पर कैप्टन अमरिंदर सिंह की ही चलती है। तमाम उठापटक के बाद सिद्धू कैप्टन के मंत्रिमंडल में शामिल किये गये, लेकिन अभी तक वो कैप्टन की टीम में सही तरीके से फिट नहीं हो सके। आलम यह रहा कि कांग्रेस अध्यक्ष से लेकर दिल्ली बैठे कई प्रमुख पार्टी नेताओं की छत्रछाया होने के बावजूद सिद्धू पंजाब की राजनीति में कुछ खास नहीं कर पाये। ऐसे में कैप्टन और उनके बीच रही तल्खी का असर यह दिखा कि हाल-फिलहाल ही सिद्धू से कुछ अहम मंत्रालय वापस ले लिये गये और उन्हें केवल ऊर्जा विभाग तक सीमित कर दिया गया।

वहीं कुछ राजनीतिक जानकारों का तो यहां तक कहना है कि दरअसल, इस लोकसभा चुनाव में सिद्धू के बड़बोलेपन की वजह से भी पंजाब में सत्तासीन कांग्रेस सरकार को काफी फजीहत झेलनी पड़ी। हालांकि सीएम अमरिंदर की राज्य में गहरी राजनीतिक पैठ के चलते कांग्रेस का वहां पर चुनावी प्रदर्शन अपेक्षाकृत प्रदेशों के ठीक-ठाक रहा। गौर हो कि पहले भाजपा की भगवा पगड़ी पहनने वाले नवजोत सिंह सिद्धू ने कुछ ही समय पहले कांग्रेस का दामन थाम लिया। कांग्रेस आलाकमान ने भी एक खास चुनावी रणनीति के तहत बीजेपी के तेजतर्रार बोलने वाले नेताओं को काउंटर करने की मंशा से सिद्धू को अपने पाले में ले लिया और पंजाब सरकार के मंत्रिमंडल में बड़ा ओहदा दिया। लेकिन कुछ ही समय बीतने पर सिद्धू का अड़ियल रवैया सीएम अमरिंदर व उनके कोर कैबिनेट टीम के उद्देश्यों के आडेÞ आने लगा और बस यहीं से दोनों खेमे में खींचतान का दौर शुरू हो गया। अब जबकि लोकसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही देश में नई सरकार का गठन हो गया है, ऐसे में पंजाब के सीएम कैप्टन ने अपने मंत्रिमंडल की ओवरहालिंग शुरू की और इसमें सबसे पहले गाज गिरी सिद्धू पर। अब देखना यह है कि राहुल-प्रियंका के शरण में पहुंचे सिद्धू को वापस कैप्टन की टीम में मैनेज किया जाता है या फिर उन्हें दिल्ली के दरबार में ही सेट किया जाता है।

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