पांच हत्याओं से दहले दिल, पूरा कुनबा साफ, पड़ोसियों को खबर नहीं, 2010 से अब तक तीन परिवारों का सफाया 

हमीरपुर:  शहर के रानी लक्ष्मीबाई इलाके में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई। गुरुवार शाम को गृहस्वामी जब लौटा तो पूरे कुनबे के शव खून से लथपथ पड़े देख वह कांप उठा। कमरों में चारों तरफ खून फैला था। परिवार के पांच लोगों की हत्या की खबर फैलने से पूरे शहर में दहशत पसर गई। डीएम-एसपी मौके पर पहुंचे। वारदात में किसी करीबी के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
रानी लक्ष्मीबाई तिराहे में रिटायर कर्मी नूरबख्श का मकान है। इसमें उसकी मां सकीना (85) के अलावा पुत्र रईस, उसकी पत्नी रोशनी, रईस की पुत्री आलिया (4) समेत परिवार के अन्य सदस्य रहते थे। बुधवार को नूरबख्श अपनी दूसरी पत्नी के साथ शादी में बिवांर गया था। गुरुवार देरशाम 7:30 बजे वह लौटा। घर में दाखिल होते ही वहां का मंजर देख वह चीख पड़ा। पुत्र रईस, बहू रोशनी, पोती आलिया, मां सकीना और एक अन्य बच्ची रोशनी का शव घर के अलग-अलग कमरों में खून से लथपथ पड़े हुए थे।
शोर-शराबा सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। परिवार के पांच लोगों की हत्या हथौड़े और पत्थर के प्रहार से की गई थी। मौके से खून से सना हथौड़ा भी बरामद हुआ। एक ही परिवार के पांच सदस्यों की हत्या की खबर से प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीएम अभिषेक प्रकाश, एसपी हेमराज मीना भारी पुलिस फोर्स के साथ पहुंच गए हैं। पुलिस की टीमें घटना के खुलासे में जुटी हुई है। नूरबख्श का बुरा हाल है। पुलिस को शक है कि हत्याकांड में परिवार का ही कोई सदस्य शामिल हो सकता है।
हमीरपुर जिले के एसपी हेमराज मीना ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई इलाके में परिवार के 5 लोगों की हत्या का मामला सामने आया है। हमलावर ने हथौड़े के साथ-साथ पत्थर से कुचलकर सभी की हत्या की है। मामले की जांच के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं। हत्याकांड में किसी परिचित के शामिल होने की आशंका है।  जल्द ही खुलासा कर दिया जाएगा।

पांच हत्याओं से दहले दिल
एक ही परिवार के पांच लोगों की हत्या के बाद हमीरपुर में लोगों के दिल दहल गए। सामूहिक नरसंहार से रानी लक्ष्मीबाई तिराहा क्षेत्र में दहशत फैल गई। घर के अलग-अलग कमरों में रईस, रोशनी, आलिया, सकीना और बच्ची रोशनी के शव खून से लथपथ पड़े हुए थे। परिजनों की चीत्कारें गूंज रही थीं। मातम देख आसपास के लोगों की आंखें भी नम थीं। सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस की टीमें अलर्ट हो गईं। हालांकि अभी तक कोई अहम सुराग नहीं मिला है लेकिन शक की सुई किसी करीबी के इर्द-गिर्द घूम रही है।
सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद नूर बख्श ने रानी लक्ष्मीबाई तिराहे पर मकान बनवाया था। बूढ़ी मां सकीना भी रहती थी। नूरबख्श का पुत्र रईस पत्नी रोशनी और अपने बच्चों के साथ रहता था। आसपास के लोगों का कहना है कि परिवार की किसी से भलाई-बुराई नहीं है। रईस भी सीधे-साधे स्वभाव का था। ऐसे में इस नृशंस वारदात को कौन अंजाम दे सकता है। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस बचे हुए परिजनों से भी अलग-अलग पूछताछ कर तथ्य जुटा रही है।
पूरा कुनबा साफ, पड़ोसियों को खबर नहीं
परिवार के पांच सदस्यों की बेरहमी से हत्या हो गई और पड़ोस तक में किसी को भनक नहीं लगी। जबकि आसपास घनी आबादी है। घटना के सही समय का भी पता नहीं चल सका है। माना जा रहा है कि वारदात दोपहर 3 से 4 बजे के बीच हुई है। शवों को देखने के बाद डॉक्टर ने भी यही कयास लगाया है। अहम बात है कि सामूहिक हत्याकांड हो गया और किसी की भी चीख अगल-बगल सुनाई नहीं पड़ी। पुलिस ने घटनास्थल से खून से सना हथौड़ा भी बरामद किया है।
11 साल की भांजी लापता
इधर, पांच लोगों की हत्या और उधर रईस की 11 साल की भांजी के लापता होने की खबर से और हड़कंप मच गया। परिवार के सदस्यों को संभालना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में बच्ची के लापता होने से परिवार के सदस्य और परेशान हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही आला अधिकारियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। जांच के लिए कानपुर से डॉग एस्क्वॉयड को भी बुलाया गया है।

2010 से अब तक तीन परिवारों का सफाया 
सामूहिक हत्याकांड की घटनाएं हमीरपुर के लिए नई नहीं हैं। वर्ष 2010 से लेकर अब तक तीन ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें पूरे परिवारों का सफाया कर दिया गया। ऐसे में दहशत इस कदर हो गई कि कोई उबर ही नहीं सका। मार्च 2010 में होली से पहले थाना ललपुरा के मोराकांदर गांव में जगदीश सिंह के पूरे कुनबे का खात्मा कर दिया गया था। जगदीश, उनकी पत्नी और चार बच्चों का बेरहमी से धारदार हथियारों से कत्ल किया गया था। वारदात के दूसरे दिन जगदीश की लाश गांव से करीब तीन किमी दूर बेतवा नदी की तलहटी में जली हुई बरामद हुई थी। इस नृशंस हत्याकांड में गांव के ही कुछ लोगों के नाम सामने आए थे। जिनकी गिरफ्तारी हुई थी और कुछ समय पूर्व ही कोर्ट ने आरोपियों को सजा भी सुनाई थी। 12 मई 2017 को मौदहा कस्बे के बड़ी देवी मंदिर के पास किसान केपी सिंह चंदेल और उनके परिजनों को भी इसी तरह मौत के घाट उतारा गया। केपी सिंह के अलावा उसकी पत्नी कुसमा सिंह, पुत्री रानी, नातिन रामलली और रामलली की दुधमुंही बच्ची को मारा गया था। पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ था कि हत्या शव मिलने से दो दिन पूर्व की गई थी। सभी को जहर देकर मारा गया था। कुछ का गला भी घोटा गया था।

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