यूपी में ‘लल्लू’ के दम पर ‘मिशन-विजय’!

प्रदेश कांग्रेस में बब्बर राज खत्म, अजय युग शुरू

प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नई टीम के गठन में भाई के चहेतों को बहन का झटका

मोदी लहर व योगी के गृह क्षेत्र गोरखपुर के करीब होने के बावजूद दो बार विजयी रहें अजय

अजय कुमार लल्लू पर 2022 के विस चुनाव में 7 सीटों से आगे बढ़ाने का रहेगा दबाव

लखनऊ। तकरीबन ढाई दशक से देश के सबसे वृहद जनसंख्या वाले राज्य में राजनीतिक वनवास झेल रही सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस अब अजय कुमार उर्फ लल्लू के दम पर यूपी में मिशन विजय का स्वप्न देख रही है। अब बहुत ही कम समय के राजनीति कैरियर में अजय कुमार ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के साथ-साथ पार्टी की महासचिव और यूपी की सर्वेसर्वा मानी जा रही प्रियंका गांधी वाड्रा के कोर टीम में अपना मजबूत और स्थायी स्थान पक्का किया। वहीं पार्टी जानकारों की मानें तो जिस तौर-तरीके से प्रियंका का रुझान पार्टी के लिये फिर से ठोस जमीन तैयार करने के मद्देनजर यूपी में बढ़ रहा है, उसी तर्ज पर कांग्रेस हित में वो एक-एक करके चौंकाने वाले फैसले भी लेने से नहीं चूक रहीं। देखा जाये तो एक तरह से यूपी कांग्रेस की नई टीम के गठन में बहन ने भाई की पुरानी और रटे-रटाये नेताओं को एक सिरे से खारिज करते हुए खासकर युवा और जमीनी नेताओं को शामिल किया है। इसका ताजा और सटीक उदाहरण…प्रदेश कांग्रेस कमेटी में राहुल के चहेते रहें बब्बर का राज खत्म होना और प्रियंका के करीबियों में शुमार कांग्रेस विजय के मद्देनजर लल्लू युग का आगाज होना।

पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है चूंकि कांग्रेस आलाकमान का फिलहाल सारा फोकस पश्चिमी यूपी के बजाये पूर्वी प्रदेश की तरफ है। ऐसे में गत लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पराजय के बाद से ही उस समय पूर्वी यूपी प्रभारी रहीं प्रियंका की नजरें इसी क्षेत्र से किसी जमीनी और मजबूत जनाधार वाले जन नेता की तलाश कर रही थीं। आखिरकार प्रियंका की तलाश लल्लू पर आकर खत्म हुई। बता दें कि अजय कुमार लल्लू लगातार दो बार से कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र के तमकुही राज विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक हैं।

क्षेत्र में लल्लू की ठोस क्षेत्रीय पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक तो मोदी लहर और दूसरे सीएम योगी के गृह क्षेत्र गोरखपुर मुख्यालय से महज 80 किमी की दूरी पर स्थित तमकुही राज सीट पर उन्होंने दोनों बार बीजेपी प्रत्याशियों को शिकस्त दी। इसी का परिणाम रहा कि लल्लू को यूपी सदन में कांग्रेस ने पहले विधायक दल के नेता की कमान सौंपी और फिर सारे राजनीतिक और क्षेत्रीय समीकरण को भांपते हुए प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा। बहरहाल, अब इसमें कोई संशय नहीं दिख रहा है कि प्रियंका की अगुवाई में अब धीरे-धीरे ही सही यूपी कांग्रेस ‘एक्शन मोड’ में आती दिख रही है। संभवत: काफी अर्से बाद यूपी कांग्रेस ने अपनी चिर-परिचित, पुरातन और वंशानुगत वाली विचार धारा से बाहर निकलने का साहस दिखाया है। ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि 2022 के आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में लल्लू की लोकप्रियता और उनकी ठोस जमीनी छवि सूबे के सदन में अभी महज सात सीटों पर सिमटी कांग्रेस को और कितने दहाई अंकों का लाभ पहुंचा सकती है।

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