शिक्षा—रोजगार

कोई काम करते हैं तो क्यों करते हैं? ये सवाल अपने से करिए?

अभी हाल ही में एक टीवी चैनल पर चल रहे पॉपुलर शो कौन बनेगा करोड़पति में शो के एंकर इस सदी के महानायक और करोड़ो लोगों के दिलों पर राज करने वाले अमिताभ बच्चन ने एक प्रतिभागी से कम्यूटर स्क्रीन पर प्रश्न पूछा कि हनुमान चालीसा में ‘शंकर सुवन’ किसके लिए आया है । वह प्रतिभागी इस प्रश्न का उत्तर नहीं बता पाया। अभिताब बच्चन ने उससे पूछा कि आप हनुमान चालीसा तो पढ़ते होंगे, उसने कहा, पढ़ते तो है लेकिन इस पर कभी ध्यान नहीं दिया।
सामान्य बु़द्धि से देखे तो यह बात आई-गई हो सकती है, लेकिन अगर इस पर गहराई से गौर किया जाए तो आप पाएंगे कि आज हमारे समाज, देश में या आस-पास ही सही, बहुत सारी बातें इस तरह की हो रही हैं कि लोग जो कर रहे हैं। पर क्यों कर रहे है। अगर आप पूछिये आप ये काम क्यों कर रहे हैं तो बस उत्तर मिलेगा बस आजकल ऐसा होता है, लोग करते है, तो हम भी ऐसा करते हैं। यह एक फैशन सा बन गया है।

आप अगर समाज के किसी क्षेत्र की ओर मुंह घुमाकर देखें तो शायद आपको ऐसा ही लगेगा। खान-पान में आजकल चाउमीन का बड़ा के्रज है। आपको लगभग हर बच्चा चाउमीन का क्रेजी का दिखा जाएगा। अगर आप से कोई पूछे कि आप चाउमीन खाने से क्या फायदा है, इसको खाने से कौन सा विटामिस या पौष्टिक तत्व मिलता है, तो इसका शायद ही कोई जवाब होगा। बल्कि फायदे की जगह नुकसान ही ज्यादा होगा। लेकिन बच्चे खा रहे हैं और उनके माता-पिता या गाॢजयंस उन्हें खिला रहे हैं। हां, ये जरूर है उसको बनाना बड़ा आसान है। टीवी पर विज्ञापन आता है, बच्चा कहता है, मम्मी भूख लगी, मम्मी कहती है बस टू मिनट। सीन बदला झट से एक प्लेट में गरमा-गरम चाउमीन आ जाएगा। बच्चा भी खुश और मम्मी भी खुश। अगर आप कोई अपना भारतीय खाना या नाश्ता बनाएंगे तो हो सकता है आप को कुछ भी देर भी लगे। हम यहां एक बात कह देना चाहते है कि हम यहां किसी के स्वाद या रूचि की बात नहीं कर रहे है बस उसकी उपयोगिता की बात कर रहे है। आज तक हमने किसी भी डाक्टर को किसी भी बीमारी में या शरीर में पोषक जरूरतों को पूरा करने के लिए चाउमीन को खाने की सलाह देते हुए नहीं सुना होगा। डाक्टर हमेशा शुद्ध और पौष्टिक खाने की सलाह देता है।

तो यह हुई बात खाने की लेकिन अगर शिक्षा की ओर देखे, जो शायद जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र, उस ओर देखे, तो भी आप को शायद यही लगेगा। लोगों में अंग्रेजी का ऐसा क्रेज छाया हुआ है कि वे बस अपने बच्चे के मुंह से अंग्रेजी ही सुनना चाहते हैं। बच्चा कुछ भी अंग्रेजी में बोल दे, माता-पिता सुन कर हॢषत हो जाते है। वो क्या बोल रहा, भले ही यह न मालूम हो। बस खुश हैं कि वह अंग्रेजी बोल रहा है।
खैर वो एक अलग बात हो गई, हम जो बात कर रहे थे शिक्षा की। कोर्स को आजकल इस तरह से सेट किया गया है कि उसमें अपने समाज और देश की संस्कृति को कम जानने का अवसर पर मिलता है, दूसरे समाज और देश की संस्कृति को ज्यादा पढऩे का अवसर मिलता है। बच्चे दूसरी संस्कृति से ज्यादा रूबरू होते है। यहां हम अंग्रेजी की बुराई नहीं कर रहे है भाषाएं सारी अच्छी हैं, भाषाओं का ज्ञान भी जरूरी है। अंग्रेजियत भी ठीक है, लेकिन जब आप अपने में बारे में नहीं जानते हैं, अपनी भाषा को नहीं जानते, अपनी संस्कृति को नहीं जानते तो फिर इस देश के बारे में क्या जान पाएंगे। अपनी विरासत को क्या समझ पाएंगे। अपनी संस्कृति को क्या जान पाएंगे। एक बच्चा गोस्वामी तुलसीदास को टीडी दास बोले तो सुनने में बड़ा अटपटा लगता है। यहां पर एक जिक्र और करना चाहेंगे, बात एक बॉलीवुड अभिनेत्री से जुड़ी है, जो इसी कौन बनेगा करोड़पति शो में एक प्रतिभागी की सहयोगी के रूप में आईं थीं, उनसे पूछा गया कि हनुमान जी किसके लिए संजीवनी बूटी लेने गए थे, तो वह नहीं बता पाईं थीं। जबकि वह एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखती हैं, किसी अंगे्रजी स्कूल में ही शिक्षा प्राप्त की होगी, क्योंकि अंग्रेजी बोल लेती हैं, लेकिन यह बात नहीं मालूम नहीं थी, जो शायद एक भारतीय समाज में रहने के नाते मालूम होना चाहिए था। इस देश में रहने वाले को श्रीराम कथा की मोटी-मोटी बातें तो मालूम होनी ही चाहिए, जो हमारी संस्कृति की एक विरासत है। देखा जाए तो अब फिल्मी कलाकार हमारे समाज का आदर्ष भी बन गए है। जैसा वे करते है आम लोग भी वैसा ही करते हैं। इस नाते भी उनको यह बात मालूम होनी चाहिए थी।

एक जो बिल्कुल सही और थोड़ा कड़वी बात भी है, वो ये कि अंगे्रजी को पढ़कर आप अंग्रेज तो बन नहीं पाएंगे। किसी दूसरे की बात को जान लेना अच्छी बात है, लेकिन उसके जैसा ही बनने की कोशिश करना अच्छी बात नहीं है। आप को अपने वजूद के साथ जीना जीने की आदत डालनी चाहिए। जो अपने वजूद से कट जाता है, वह कहीं का नहीं रहता हैं। उसकी हालत धोबी के कुत्ते वाली हो जाती है। क्योंकि यहां के आप रहे नहीं सकते, दूसरा आपको अपना नहीं सकता है।
एक उदाहरण देकर अपनी बात समाप्त करना चाहेंगे, कि जब तक फूल पेड़ से लगा रहता है, तब तक वह खिला रहता है और वातावरण में अपनी सुगंध फैलाया करता है और जब खुद या कोई उसे तोड़ लेता तो उसी पल से वह मुरझाने लगता है, चाहे वह किसी देवता के चरणों में ही क्यों ने चढ़ाया गया हो। इसी तरह से बहुत सारी बातें आप सुबह से शाम तक करते हैं, आप उस काम को क्यों कर रहे हैं, यह सोचिए।

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