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टेस्ट क्रिकेट के लिये मैंने आक्रामकता खो दी थी: उथप्पा

टी-20 विश्व कप जीत के बाद मैं तीन दिन तक नहीं सोया

नई दिल्ली। पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज रोबिन उथप्पा को लगता है कि 25 साल की उम्र में टेस्ट क्रिकेट में खेलने की महत्वाकांक्षा के कारण उन्होंने अपनी बल्लेबाजी तकनीकी में बदलाव करने की गलती की थी। उथप्पा अब 34 साल के हैं और उन्होंने भारत की तरफ से आखिरी मैच 2015 में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेला था। उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिये जाना जाता है। उन्होंने राजस्थान रायल्स के पोडकास्ट सत्र के दौरान कहा, मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य भारत के लिये टेस्ट क्रिकेट खेलना था।

अगर मैं 20-21 की उम्र में ऐसी कोशिश करता तो टेस्ट क्रिकेट खेल लिया होता। मैं अपने करियर के आखिर में पछताना नहीं चाहता था और अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ करना चाहता था। उथप्पा ने प्रवीण आमरे की सेवाएं ली और अपनी तकनीकी में कुछ बदलाव किया लेकिन इससे उनकी नैसर्गिक लय खो गयी। उन्होंने कहा, इसलिए मैंने 25 साल की उम्र में प्रवीण आमरे की देखरेख में अपनी बल्लेबाजी तकनीकी में बदलाव करने का फैसला किया जो तकनीकी तौर पर पहले से बेहतर बल्लेबाज हो और लंबे समय तक क्रीज पर टिककर खेल सके। इस प्रक्रिया में मैंने अपनी बल्लेबाजी की आक्रामकता खो दी। उथप्पा ने भारत की तरफ से 46 वनडे और 13 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उन्होंने कहा, मैं सोचता था कि भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट खेलने के लिये मुझे अपनी तकनीकी बदलनी होगी। मुझे लगता है कि मैंने 25 साल की गलत उम्र में ऐसा करने की कोशिश की।

धोनी की कप्तानी में 2007 में टी-20 विश्व कप का पहला संस्करण जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य रॉबिन उथप्पा ने बताया है कि वह यह टूनार्मेंट जीतने के बाद तीन दिन तक सो नहीं पाए थे।
उथप्पा ने आईपीएल फ्रेंचाइजी राजस्थान रॉयल्स के साथी और स्पिन सलाहकार ईश सोढ़ी के साथ पोडकास्ट पर बात करते हुए कहा, विश्व कप जीतने के बाद मैं लगातार तीन दिन नहीं सो पाया था। शुरूआत में पता नहीं चला, हम काफी उत्साहित थे कि हमने विश्व कप के फाइनल में पाकिस्तान को हराया है।

उन्होंने कहा, हम जब भारत लौटे तो इस जीत की भव्यता ने हमें खुश कर दिया। जो स्वागत हमें मिला वो शानदार था। मुंबई किसी के लिए नहीं रुकती, लेकिन उस दिन मुंबई रुकी थी और सिर्फ एक ही दिशा में बढ़ रही, हमारी बस की दिशा में। हमने उस दिन भारत के सभी मौसम देखे।
दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने बताया, वानखेड़े स्टेडियम पहुंचने में आमतौर पर 45 मिनट या एक घंटा लगता है लेकिन हमें उस दिन पांच घंटे लगे। उस दिन बारिश भी हो रही थी, ठंड भी लग लगी थी और गर्मी भी लग रही थी।
उन्होंने कहा, मुझे याद है कि लोग हम पर पानी की बोतलें, फल और चॉकलेट फेंक रहे थे ताकि हमारी ऊर्जा खत्म न हो। हमारे लिए यह बेहतरीन चीज थी और हमने इन पलों का लुत्फ उठाया। 1983 की विश्व कप जीत के बाद यह विश्व कप जीतना बड़ी राहत है।

उथप्पा ने कहा, मुझे नहीं लगता कि विश्व विजेता की भावना को शब्दों में बयां किया जा सकता है। एक क्रिकेटर के तौर पर आप जो महसूस करते हो यह उससे आगे निकल जाता है। यह एक खिलाड़ी के लिए सबसे शानदार भावना है। रॉयल्स ने उथप्पा को तीन करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ा है। इससे पहले उथप्पा कोलकाता नाइट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के साथ भी रह चुके हैं।

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