विचार मित्र

उइगर मुसलमानों पर जुल्म क्यों

निरंकार सिंह

चीन जिस तरह से हांगकांग और झिंजियांग में मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता की बात है। लेकिन अब चीन को पूरा विश्व अलग-थलग करने में जुट गया है। इसके तहत इंग्लैंड, कनाडा, जर्मनी, आस्ट्रेलिया सहित 29 देशों ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद में बयान जारी करके कहा है कि चीन में मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार और शोषण की जांच हो और इसके आयोग की टीम को वहां जाने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही इन देशों ने हांगकांग के लिए चीन की ओर से पारित सुरक्षा कानून पर भी आपत्ति जताई है, सभी ने कहा है कि यह के खिलाफ है।

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ के अनुसार चीन के दमन के निरंतर अभियान ने इस तथ्य को दोहराया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) को मानव जीवन और बुनियादी मानवीय गरिमा के लिए कोई सम्मान नहीं है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, झिंजियांग के शिविरों में दस लाख से अधिक उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों को हिरासत में लिया गया है। सीएनएन ने बताया कि इन शिविरों में उन्हें शारीरिक और यौन शोषण, जबरन श्रम, और मृत्यु तक का सामना करना पड़ रहा है। यह अमानवीय क्रूरता है।

कोरोना वायरस संकट के बीच अमेरिकी कांग्रेस ने चीनी अधिकारियों को उइगर मुस्लिम को हिरासत में लेने से रोकने के लिए लाए गए विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मंजूरी के लिए ह्वाईट हाउस भेजा गया है।अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले दिनों चीनी अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर उइगर मुस्लिमों के खिलाफ किये जा रहे अत्याचार को रोकने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी है।

माना जा रहा है कि इससे अमेरिका और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने उइगर मानवाधिकार अधिनियम के खिलाफ केवल एक वोट दिया था, इसके अलावा सभी वोट इसके पक्ष में पड़े। इसके कुछ घंटों बाद ही विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने हांगकांग मुद्दे पर भी चीन को घेरने के लिए एक कदम उठाया है। अमेरिका ने जब उइगरों के मानवाधिकार को मुददा उठाया है तो एक बार फिर दुनिया का ध्यान इस पर गया है। चीन ने पिछले कुछ सालों में ऐसी ही तमाम जेल सरीखी इमारतें शिनजियांग सूबे में बना डाली हैं.जिसमें उसने मुसलमानों को बिना मुकदमा चलाए कैद कर के रखा है। इस झूठ को छुपाने के लिए ही तालीम का पर्दा चीन ने लगा दिया है।

दुनिया के किसी भी देश में मुसलमानों पर कथित अत्याचार होता है तो मुस्लिम बहुल देश खुलकर इस पर आपत्ति जताते हैं। भारत में अल्पसंख्यकों के खलिाफ होने वाली हिंसा को लेकर भी पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देश उंगली उठाते रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि हिन्दुस्तान में मुसलमान महफूज नहीं हैं।दिलचस्प है कि चीन में उइगर मुसलमानों के खिलाफ उसकी क्रूरता को लेकर मुस्लिम देशों में खामोशी रहती है।

पहली बार तुर्की ने इसी महीने 10 फरवरी को चीन के खिलाफ आवाज उठाई और कहा कि चीन ने लाखों मुसलमानों को नजरबंदी शिविर में बंद रखा है। तुर्की ने चीन से उन शिविरों को बंद करने की मांग की. है । तुर्की के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हामी अक्सोय ने कहा कि चीन का यह कदम मानवता के खिलाफ है। तुर्की के अलावा दुनिया के किसी भी मुस्लिम देश ने चीन के इस रुख के खिलाफ आवाज नहीं उठायी है। पाकिस्तान में इस्लाम के नाम पर कई चरमपंथी संगठन हैं लेकिन ये चरमपंथी संगठन भी चीन के खिलाफ शायद ही कोई बयान देते हैं।

हालांकि चीन सरकार ने इन खबरों को अफवाह बताते हुए हुए कहा कि शिनजियांग में सबकुछ ठीक है।इससे पहले, अप्रैल महीने की शुरुआत में शिनजियांग में ही सरकार ने इस्लामी चरमपंथ के खिलाफ अभियान के तहत उइगर मुस्लिमों पर नए प्रतिबंध लगाए थे।इनमें असामान्य रूप से लंबी दाढ़ी रखने, सार्वजनिक स्थानों पर नकाब लगाने और सरकारी टीवी चैनल देखने से मना करने जैसी पाबंदियाँ शामिल है।.शिनजियांग में इस तरह की पाबंदियां कोई पहली बार नहीं लगी हैं। .इस क्षेत्र में उइगर मुस्लिमों की धार्मिक स्वतंत्रता पर भी सरकार ने अंकुश लगा रखा है. 2014 में शिनजियांग की सरकार ने रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों के रोजा रखने और मुस्लिम नागरिकों के दाढ़ी बढ़ाने पर पाबंदी लगा दी थी।

चीन के पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में चीनी प्रशासन और यहां के स्थानीय उइगर जनजातीय समुदाय के बीच संघर्ष का बहुत पुराना इतिहास है। उइगर असल में मुसलमान हैं। सांस्कृतिक और जनजातीय रूप से वे खुद को मध्य एशियाई देशों के नजदीकी मानते हैं।सदियों से इस इलाके की अर्थव्यवस्था कृषि और व्यापार केंद्रित रही है। यहां के काशगर जैसे कस्बे प्रसिद्ध सिल्क रूट के बहुत सम्पन्न केंद्र रहे हैं। इस इलाके पर कम्युनिस्ट चीन ने 1949 में पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया था।

दक्षिण में तिब्बत की तरह ही शिनजियांग भी आधिकारिक रूप से स्वायत्त क्षेत्र है।इस प्रांत की सीमा मंगोलिया और रूस सहित आठ देशों के साथ मिलती है। तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की इस क्षेत्र में आबादी एक करोड़ से ऊपर है। इस क्षेत्र में उनकी आबादी बहुसंख्यक थी। लेकिन जब से इस क्षेत्र में चीनी समुदाय हान की संख्या बढ़ी है और सेना की तैनाती हुई है तब से यह स्थिति बदल गई है।

शिनजियांग प्रांत में रहने वाले उइगर मुस्लिम ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट चला रहे हैं जिसका मकसद चीन से अलग होना है। दरअसल, 1949 में पूर्वी तुर्किस्तान, जो अब शिनजियांग है, को एक अलग राष्ट्र के तौर पर कुछ समय के लिए पहचान मिली थी। लेकिन उसी साल यह चीन का हिस्सा बन गया। 1990 में सोवियत संघ के पतन के बाद इस क्षेत्र की आजादी के लिए यहां के लोगों ने काफी संघर्ष किया. उस समय इन लोगों के आंदोलन को मध्य एशिया में कई मुस्लिम देशों का समर्थन भी मिला था लेकिन, चीनी सरकार के कड़े रुख के आगे किसी की एक न चली।

बीते कुछ समय के दौरान इस क्षेत्र में हान चीनियों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है. उइगरों का कहना है कि चीन की वामपंथी सरकार हान चीनियों को शिनजियांग में इसीलिए भेज रही है कि उइगरों के आंदोलन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट को दबाया जा सके। चीनी सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियां भी कुछ ऐसा ही दर्शाती हैं। शिनजियांग प्रांत में रहने वाले हान चीनियों को मजबूत करने के लिए चीन सरकार हर संभव मदद दे रही है।

यहां तक कि इस क्षेत्र की नौकरियों में उन्हें ऊंचे पदों पर बिठाया जाता है और उइगुरों को दोयम दर्जे की नौकरियां दी जाती हैं। कुछ जानकार चीनियों को नौकरियों में ऊंचे पदों पर बिठाने का एक कारण यह भी मानते हैं कि सामरिक दृष्टि से शिनजियांग प्रांत चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसे में चीनी सरकार ऊंचे पदों पर विद्रोही रुख वाले उईगरों को बिठाकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। चीन की वामपंथी सरकार के इस रुख के चलते इस क्षेत्र में हान चीनियों और उइगरों के बीच टकराव की खबरें आती रहती हैं. 2008 में शिनजियांग की राजधानी उरुमची में हुई हिंसा में 200 लोग मारे गए जिनमें अधिकांश हान चीनी थे।

इसके बाद 2009 में उरुमची में ही हुए दंगों में 156 उइगुर मुस्लिम मारे गए थे। उस समय तुर्की ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए इसे एक बड़े नरसंहार की संज्ञा दी थी। इसके बाद 2010 में भी कई हिंसक झड़पों की खबरें आईं. 2012 में छह लोगों को हाटन से उरुमची जा रहे एयरक्राफ्ट को हाइजैक करने की कोशिश के चलते गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इसमें उइगरों का हाथ बताया. 2013 में प्रदर्शन कर रहे 27 उइगरों की पुलिस फायरिंग में मौत हो गईथी।

सरकारी मीडिया का कहना था कि प्रदर्शनकारियों के पास हथियार थे जिस वजह से पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं। इसी साल अक्टूबर में बीजिंग में एक कार बम धमाके में पांच लोग मारे गए जिसका आरोप उइगरों पर लगा। ये भी वे मामले ही हैं जो विदेशी मीडिया की सक्रियता से सामने आ गए वरना माना जाता है कि ऐसे सैकड़ों मामले चीनी सरकार ने दबा दिए।. 2014 में ही राष्ट्रपति जिनपिंग के सख्त आदेशों के बाद यहां की कई मस्जिदें और मदरसों के भवन ढहा दिए गए। चीनी सरकारी मीडिया की बात मानें तो इस सब के लिए उइगरों का संगठन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट दोषी है।.वहीं, उइगर नेता और यह संगठन इन सभी आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताते हैं।

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