विचार मित्र

अब लाॅकडाउन के जिम्मेदार आप ही होंगे!

राजेश माहेश्वरी

अब कोरोना रौद्र रूप दिखाने लगा है। देश में संक्रमितों की संख्या नौ लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। प्रतिदिन संक्रमितों की संख्या नया रिकार्ड बना रही है। कुछ राज्यों में संक्रमण की रफ्तार कम हुई है तो कई राज्यों में कोरोना का कहर अभी जारी है। हालात इस तरह तेजी से बिगड़ रहे हैं कि कई राज्यों को लाॅकडाउन को आंशिक या पूरी तरह से लागू करना पड़ रहा है।

लाॅकडाउन लगाने की नौबत क्यों आई। असल में अधिकतर लोग जानबूझकर लाॅकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिसके चलते कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। जिस तरह से कई राज्यों सरकारों ने लाॅकडाउन को विभिन्न रूप में लगाना शुरू कर दिया है, उससे स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है। असल में सरकार ने जब से अनलॉक की नीति अपनाई है, लोग समझने लगे कि कोरोना वायरस महामारी खत्म हो गई है।

लॉक डाउन लगाना जिस तरह से मजबूरी थी ठीक वैसे ही उसे हटाना भी जरूरी हो गया था। अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए लाॅकडाउन में ढील देना जरूरी हो गया था। बीते छः सप्ताह की जो रिपोर्ट आई उसके मुताबिक उद्योग व्यापार क्षेत्र में काफी तेजी से काम शुरू हो चुका है। कुछ में तो लॉक डाउन से पहले वाली स्थिति लौट आई है। प्रवासी श्रमिकों के घर लौट जाने के कारण जरूर मानव संसाधन की कमी महसूस की जा रही है लेकिन उसके बाद भी उत्पादन ने गति पकड़ ली है। सबसे बड़ी बात ये है कि तमाम आशंकाओं के बावजूद बाजार में मांग नजर आ रही है। पिछली फसल अच्छी आने के कारण ग्रामीण बाजार भी अर्थव्यवस्था को अच्छा समर्थन दे रहे हैं।

कोरोना के कारण गर्मियों में होने वाले शादी-विवाह की संख्या में बेहद कमी आई। आमंत्रितों की संख्या भी सीमित किये जाने का असर कारोबार पर पड़ा। हमारे देश की आर्थिक रीढ़ को खेती और शादी दोनों का जबर्दस्त सहारा मिलता है। लेकिन जैसी उम्मीद है दीपावाली तक कोरोना ढलान पर आयेगा और तब बीते छः महीने की कसर पूरी हो जायेगी। यद्यपि इस बारे में अभी कुछ भी कहना कठिन है लेकिन ये बात तो है कि भारत को लेकर दुनिया आशान्वित है। चीनी एप प्रतिबन्धित होने के बाद जिस तरह से भारत में बने एप की विश्वव्यापी मांग हुई वह भी उत्साहजनक है। कहने का आशय ये है कि कोरोना संकट का प्रारम्भ में भारत ने जिस तरह से मुकाबला किया उससे उसकी विश्वसनीयता बढ़ी तथा आपदा प्रबन्धन के पेशेवर रवैये की दुनिया भर में तारीफ हुई।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सार्वजनिक तौर पर उसके प्रयासों की प्रशंसा की है और खूब शाबाशी दी है। भारत में कोरोना वायरस का फैलाव सामुदायिक नहीं माना जा रहा, लेकिन संक्रमण के आंकड़े 9 लाख को पार कर चुके हैं। औसतन तीन दिन में एक लाख संक्रमित मामले सामने आ रहे हैं, बेशक हमारी मृत्यु दर और संक्रमण के बाद स्वस्थ होने वालों की दर दुनिया के देशों से बहुत बेहतर है, लेकिन हमने इतने बड़े आंकड़े की कभी कल्पना ही नहीं की थी। चूंकि संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है, इसका औसत भी 10-12 फीसदी है, लिहाजा अब लॉकडाउन भी बेमानी लगता है।

असल समस्या की शुरूआत जून में अनलाॅक-1 से शुरू हुई। लॉक डाउन खुलते ही जनता ने दो माह से भी ज्यादा जिस धैर्य और अनुशासन का परिचय दिया वह सब देखते-देखते काफूर हो गया। बाजारों में तो लगता ही नहीं है कि कोरोना का कोई भय कहीं है भी। बड़े राजनीतिक जलसों में शासन के मंत्री तक बिना मास्क के नजर आते हैं । शारीरिक दूरी बनाये रखने की प्रति भी अव्वल दर्जे का उपेक्षा भाव हर किसी में है।

शादी-विवाह एवं शव यात्रा में लोगों की उपस्थिति को सीमित किये जाने के बाद भी भीड़ की जाती है। ये जान लीजिए कि सदी के महानायक तथा अमीर से आम आदमी तक किसी को नहीं छोड़ा। इस दौर की सबसे चैंकाने वाली खबर यही है सदी के महानायक अमिताभ बच्चन, उनके अभिनेता-पुत्र अभिषेक, बहू ऐश्वर्य राय बच्चन और पोती आराध्या कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। आश्चर्य संक्रमित होने पर कम है, लेकिन जो परिवार दुर्ग-सी जिंदगी में सुरक्षित है, साधन और सुविधाओं से संपन्न है, लॉकडाउन के पूरे अंतराल में घर तक ही सिमट कर रहा हो, उस घर तक कोरोना वायरस कैसे पहुंच गया? यह कोरोना संक्रमण का अप्रत्याशित रुझान भी है और देश को संदेश भी देता है कि यदि अमिताभ बच्चन सरीखा अनुशासित, मर्यादित, जागरूक और सचेत व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हो सकता है, तो फिर वायरस की चपेट से सुरक्षित कौन है?

कोरोना वायरस का संक्रमण हवा के जरिए भी फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 32 देशों के 239 वैज्ञानिकों और चिकित्सा विशेषज्ञों के ऐसे शोध को बुनियादी तौर पर स्वीकार कर लिया है। अब इस पर भी अध्ययन और परीक्षण किए जाएंगे। उसके बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा, लेकिन संक्रमण के ऐसे फैलाव से बचने की हिदायतें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दी हैं। वैज्ञानिकों का नया शोध क्या है, उसका सारांश भी सार्वजनिक नहीं हुआ है, लेकिन इतना कहा गया है कि खांसने, छींकने और बोलने से जो बूंदें बाहर आती हैं, उनसे संक्रमण फैल सकता है। जो लोग इस हवा में सांस लेंगे और मास्क जैसा आवरण नहीं पहना होगा, तो वे संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।

देश के कई स्थानों से ऐसी खबरें आये दिन मीडिया के माध्यम से प्रकाश में आती रहती हैं कि शादी, समारोह या अन्य में लाॅकडाउन के नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। नतीजतन एक साथ कई लोग संक्रमण की चपेट में आ गए। और ऐसा नहीं है कि गरीब या मध्यम तबके से ऐसी खबरें आई हों, इसमें ज्यादातर वो रसूखदार शामिल हैं जो कानून नियम को कुछ ज्यादा समझते नहीं है। देश भर में ऐसी गलतिया जान बूझकर होने से कोरोना तेजी पकड़ रहा है।

कोरोना को बढ़ने से रोकने के लिए सख्त लॉकडाउन भी लगाया गया था, हालांकि अब सरकारों ने देश की अर्थव्यवस्था को गतिमान करने और लोगों को रोजी-रोटी और रोजगार के लिए देश-प्रदेशों को काफी हद तक अनलॉक भी कर दिया है। लेकिन यह किसी को नहीं भूलना होगा कि अनलॉक का मतलब कोरोना से देश मुक्त हो चुका है, यह बिलकुल नहीं है। अब भी देश में दिन-प्रतिदिन भारी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं।

लापरवाही से देश में कोरोना को लेकर हालात खराब हो सकते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क पहनने, बार-बार हाथ धोने, सार्वजनिक स्थानों पर न थूकने जैसे निर्देशों के पालन को नजरअंदाज किया जा रहा है। यह महामारी कब तक चलेगी, कुछ पता नहीं। लेकिन इससे बचने के लिए अपने ही तरीके से सभी को उपाय करने चाहिए। जमीनी सच्चाई यह भी है कि देश में मार्च महीने में जहां इक्का-दुक्का लैब कोरोना टेस्ट कर रही थी, अब इनकी संख्या ग्यारह सौ से अधिक है।

मरीजों के उपचार के लिये बैडों की संख्या लाखों तक जा पहुंची है। मगर इस संकट काल में ज्यादा सतर्कता व सावधानी की जरूरत है। अब वह समय नहीं है कि पूरे देश में फिर से लॉकडाउन घोषित किया जा सके। ऐसे में आर्थिक स्थिति सुधारने के प्रयासों पर पानी फिर जायेगा। उससे जो सामाजिक व आर्थिक नुकसान होगा, उसकी भरपाई करना संभव न होगा। कोरोना संकट तो बड़ा है ही, उससे बड़ा संकट बेकारी व भुखमरी पैदा होने का है। ये संभलकर चलने का समय है, इसी में हम सबकी भलाई है।

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