बिहार : शौचालय न होने पर दुल्हन का ससुराल जाने से इनकार

गोपालगंज। कुछ दिन पहले तक बिहार की लड़कियों को भले ही दबी, संकोची माना जाता था, परंतु अब यहां की लड़कियां अपने सम्मान के लिए ससुराल जाने से भी इनकार करने लगी हैं। ऐसा ही एक मामला गोपालगंज जिले के मांझा प्रखंड के मारवा टोला गांव में सामने आया है, जहां ससुराल में शौचालय नहीं होने पर दुल्हन ने ससुराल जाने से इनकार कर दिया। हालांकि, दुल्हन के इनकार करने के बाद अब शौचालय निर्माण का कार्य प्रारंभ हो गया है।

मांझा प्रखंड के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि मारवा टोला गांव निवासी पारस महतो के इंजीनियर बेटे उपेंद्र कुमार की शादी करीब तीन महीने पूर्व मांझा प्रखंड के धंसही पंचायत के बलुही गांव की सुनीता कुमारी से हुई थी। इस विवाह में दुल्हन के परिवार ने अपनी बेटी की खुशी और आवश्यकता के लिए आवश्यक सारे सामान उपहारस्वरूप दिए थे।

कहा जाता है कि शादी के समय सुनीता ने जब ससुराल वालों से शौचालय के बारे में पूछा, तब ससुराल वालों ने कहा कि घर में शौचालय उपलब्ध है। बाद में हालांकि सुनीता को यह जानकारी मिली कि उसके ससुराल में शौचालय नहीं है। इसके बाद वह अपने ससुराल जाने से ही इनकार कर दिया।

इस मामले की सूचना जब मांझा प्रखंड कार्यालय पहुंची तब आनन-फानन में प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) वेद प्रकाश रविवार को मारवा टोला गांव पहुंचे और पारस महतो के परिजनों से बात की।

बीडीओ वेद प्रकाश ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि उस घर में वाशिंग मशीन, एलईडी टीवी सहित सहित अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, परंतु शौचालय का नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन और लोहिया स्वच्छता अभियान के तहत मांझा पश्चिमी पंचायत में सभी वार्डो में शौचालय निर्माण का कार्य पूरा कर लिया गया है, परंतु मारवा टोला गांव के कई घरों में शौचालय का निर्माण नहीं हो सका है।

बीडीओ ने भी स्वीकार किया, “शौचालय नहीं होने से बहू-बेटी को काफी परेशानी होती है। इसी वजह से आज एक घर की बहू ने ससुराल आने से इनकार कर दिया है।“

उन्होंने कहा कि पारस महतो के यहां शौचालय निर्माण का कार्य प्रारंभ करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें 26 अगस्त के पूर्व शौचालय का निर्माण कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। वेद प्रकाश बताते हैं कि वर्तमान समय में सुनीता के परिवार के लोग मध्य प्रदेश एक रिश्तेदार के यहां गए हैं। वहां से लौटते ही दुल्हन की विदाई सुनिश्चित करवाई जाएगी।

उन्होंने सुनीता के फैसले को एक मिसाल बताते हुए कहा कि इससे सभी लड़कियों और महिलाओं को सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सुनीता की इस अनोखी पहल के लिए प्रखंड कार्यालय उन्हें सम्मानित भी करेगा।

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